फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   No provision to resque from lightning

आकाशीय बिजली से बचाव के प्रावधान नहीं

Thu, 23 Jun 2016 07:23 PM IST
भारत डोगरा
भारत डोगरा Updated Thu, 23 Jun 2016 07:23 PM IST
विज्ञापन
No provision to resque from lightning
भारत डोगरा

पिछले दो दिनों में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने से 110 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई। इससे पहले भी आकाशीय बिजली गिरने से काफी अधिक मौतें देश में होती रही हैं। बिजली गिरने को सबसे जानलेवा आपदा के रूप में मान्यता मिल रही है। चार राज्यों में हुई मौजूदा त्रासदी को इस तरह की विश्व की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जा रहा है।

विज्ञापन


कुछ अध्ययनों में यह कहा गया था कि जलवायु परिवर्तन के दौर में आकाशीय बिजली गिरने की समस्या बढ़ सकती है। ऐसा एक अध्ययन कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रो. डेविड राम्पस का है, तो दूसरा अध्ययन इस्राइल के प्रो. कॉलेन राइस का है। इस लिहाज से भी भारत की इस आपदा पर विशेषज्ञों की पैनी नजर है। अपने यहां यह आपदा पहले से ही भीषण रही है और औसतन एक वर्ष में इससे जुड़ी लगभग 2,000 से 2,500 मौतें सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती रही हैं। इस आपदा के बढ़ने की आशंका को देखते हुए यह और जरूरी हो गया है कि इससे बचाव के और तुरंत इलाज उपलब्ध करवाने के सभी संभव प्रयास किए जाएं।
विज्ञापन


इसके लिए यह भी जरूरी है कि राष्ट्रीय स्तर पर मदद की हकदार विभिन्न बड़ी आपदाओं में आकाशीय बिजली गिरने की आपदा को समुचित स्थान दिया जाना चाहिए। प्रभावित-परिवारों को सहायता-राशि मिलने के साथ घायल लोगों के इलाज की समुचित व्यवस्था करना भी जरूरी है। जिन क्षेत्रों में यह आशंका अधिक है, वहां के सरकारी अस्पतालों में आकाशीय बिजली से प्रभावित घायल लोगों के इलाज की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिका क्षेत्रफल में हमसे बहुत बड़ा देश है और वहां आकाशीय बिजली गिरने की अनेक घटनाएं होती हैं। लेकिन वहां एक वर्ष में केवल 51 मौतों का आंकड़ा ही दर्ज है। जबकि हमारे यहां 2,500 मौतों का आंकड़ा है। अतः बेहतर बचाव के उपायों से मौतों को कम रखने की सभी संभावनाओं पर विचार कर इनका उचित प्रचार-प्रसार करना चाहिए। हमारे देश में आकाशीय बिजली से सबसे अधिक प्रभावित खेत मजदूर, किसान, पशु चराने वाले और वन-मजदूर आदि होते हैं, जिन्हें मूसलाधार बारिश और बिजली गिरने के समय आसानी से आश्रय नहीं मिलता।

हाल ही में एक अध्ययन में पांच बड़ी आपदाओं से पिछले 45 वर्षों के दौरान (1967-2012) भारत में होने वाली मौतों संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। फैसल इलियास, केशव मोहन, शिबु मणि और एपी प्रदीप कुमार द्वारा किए गए इस अध्ययन में बताया गया है कि इस दौरान देश में जहां 39 प्रतिशत मौतें आकाशीय बिजली गिरने से हुईं, वहीं 18 प्रतिशत मौतें बाढ़ से, 15 प्रतिशत भू-स्खलन से, 15 प्रतिशत मौतें लू से और 13 प्रतिशत मौतें शीतलहर से हुईं।


यह स्थिति वास्तव में बेहद चिंताजनक है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जो आपदा राहत सहायता प्रावधान हैं, उनमें आकाशीय बिजली गिरने की आपदा को स्थान नहीं मिला है। यानी सबसे बड़ी त्रासदी साबित होने के बावजूद इससे प्रभावित लोगों को इन कोषों से सहायता नहीं मिल पाती। हालांकि इसके बावजूद मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता दी जा सकती है, जैसे कि बिहार में प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है। लेकिन यह आवश्यक है कि सबसे बड़ी जानलेवा आपदा के लिए राज्य और राष्ट्र स्तर के आपदा राहत कोषों से भी जरूरी क्षतिपूर्ति और मुआवजे की शीघ्र व्यवस्था की जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed