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तमन्ना तुम अब कहां हो?

Mon, 25 Nov 2013 08:38 PM IST
देव प्रकाश चौधरी/पत्रकार, कला समीक्षक
देव प्रकाश चौधरी/पत्रकार, कला समीक्षक Updated Mon, 25 Nov 2013 08:38 PM IST
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nidhish tyagi book

तमन्ना तुम अब कहां हो?

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निधीश त्यागी, पेंगुइन प्रकाशन
कीमत-150 रुपए


'चुटकुले खत्म हो गए और सीढ़ियां शुरू हो गई हैं।' इस पोलिश उक्ति की याद निधीश त्यागी की कहानियों को पढ़ते हुए आपको भी आएगी। क्योंकि पिछले एक दशक से न जाने कितनी बार, कितनी तरह से हम यह बात सुन और पढ़ चुके हैं कि कहानी की मौत हो चुकी है, कहानी ने अपना चोला बदल लिया है, अब हमें कहानी की जरूरत नहीं है और भी न जाने क्या-क्या! लेकिन निधीश कुछ नया लेकर आए हैं। कुछ अलग। लंबा और बढ़-चढ़ कर लिखने की परंपरा से दूर, कुछ शब्दों के साथ वह आपके पास आए हैं।

अगर मौजूदा कहानी के परिदृश्य पर आप गौर करें तो थोड़े बहुत हेर-फेर के साथ हाल के दिनों की ज्यादातर कहानियां जिंदगी के अंतिम दिनों की त्रासदियां ही हैं। कहानी में पीछे छूट गया गांव होगा। हाहाकार मचाता शहर होगा। फूलदान की तरह घर में पड़े बूढ़े होंगे या ऐसी ही कुछ चीजें। लेकिन निधिश त्यागी की नई किताब 'तमन्ना तुम कहां हो' कुछ अलग है। शिल्प की दृष्टि से भी और संवेदना के स्तर पर भी।
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हमारे समय में कहानियों को जरूरत से ज्यादा शब्दों का भी लालच है। शायद इसलिए भी कि इतना लिखा जा रहा है, इतना कहा जा रहा है, इतना सुना जा रहा है तो फिर कम शब्दों में बात में वजन कहां से आएगा? बिना ज्यादा कहे कौन सुनेगा? लेकिन शायद इन्हें बहुत कुछ कह देने का, बहुत ज्यादा शब्दों का मोह नहीं है। उन्हें पता है कि कहानी सिर्फ शब्दों में नहीं होती। शब्दों के पहले और बाद के मौन की भी अपनी लंबी कहानी होती है।
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यही नहीं, अकेला होना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। अनगिनत शोरों और मनोरंजन के अनगिनत उपकरणों ने एक आम आदमी के अकेलेपन को लगभग खत्म कर दिया है। लेकिन निधीश अपनी बहुत छोटी-छोटी कहानियों (कभी-कभी एक-दो पंक्तियों की) को आपको सौंपकर खुद अकेले हो जाते हैं। और आप जब उनके शब्दों से गुजर चुके होते हैं तो भीड़ से घिर जाते हैं। क्योंकि उनकी कहानी खत्म होते ही आप अपनी कहानी बुनने लगते हैं।

बिना इस बात की परवाह किए कि आखिर कहानी का यह कौन सा वाद है या फिर आलोचना के खाने में कहां बैठता है? इस किताब में खुद के लिए एक जोखिम मोल लेकर निधीश अपनी कहानियों के जरिये पाठकों को कहानीकार बन जाने का मौका देते हैं और यहीं से सीढ़ियों की शुरुआत होती है...

इसी किताब से दिल तोड़ने वाली 22 कहानियां...

1. ये आप भी जानते हैं और मैं भी ये सब कुछ झूठ नहीं है क्योंकि हम सब के सच का कोई न कोई हिस्सा इससे मिलता-जुलता है।

2. अब तुम इस शहर में नहीं हो। मुझे इसलिए मेकअप लगाना पड़ रहा है कि कोई झांक न ले मेरे भीतर।


3. उसने अपने मोबाइल पर टाइप किया... तलाक... तलाक... तलाक..। और ड्राफ्ट सेव करके रख लिया।

4. अच्छा होता कि मैं अपने पति को कभी न छोड़ती। मैं अपने बच्चों की आंखों में तकलीफ पढ़ सकती हूं। अच्छा होता कि मैं लौट सकती और सब ठीक कर देती।

5. सबसे बड़ा डर मेरा यह है कि वह जिस शख्स के काबिल है, वह मैं नहीं हूं। मुझे यह खुद को रोज बताना पड़ेगा कि मैं वह शख्स बनकर रहूं।

6. मुझे दस साल लगे अपने हिंसक पति को छोड़ने में। अब वह कसमें खा रहा है कि वह बदल गया है और मुझे वापस चाहता है। आखिर अब न कहने में इतनी दिक्कत क्यों हो रही है।


7. बीवी, कामकाजी, फुलटाइम स्टूडेंट, पति दूसरे शहर में, मुझे न मदद मिलती है, न प्यार। भाग जाने के लिए एक सेलिब्रिटी के साथ की कल्पना।

8. मुझे बात वहीं खत्म कर देनी थी, जब शादी की रात मेरी बीवी रो पड़ी थी, क्योंकि वह मेरे साथ सोना नहीं चाहती थी। यह अट्ठारह साल पहले की बात है।

9. अगर मुझे पता होता कि शादी इस कदर मुश्किल है, तो शादी पैसे के लिए की जाती ।

10. मेरा मंगेतर मुझसे धोखा कर रहा है, मुझे शादी के दो रोज पहले पता चला। मैंने फिर भी उसी से शादी की, क्योंकि मेरा कोई दोस्त नहीं।

11. मेरे पिता का एक सीक्रेट लव चाइल्ड है। मंैने जासूसी कर ये पता लगाया। किसी से कहा नहीं।

12. मुझे अपनी बीवी से प्यार है, पर मंगलवार की हर रात मैं किसी मर्द के साथ रहता हूं। समलैंगिक हूं, पर बीवी को नहीं छोड़ सकता।

13. साल भर पहले मैने अबॉर्शन करवाया था। अब भी लगता है कि दुनिया में मुझसे बुरा कोई नहीं।

14. मेरे पति को नहीं मालूम कि मैं अपने डॉक्टर के बारे में सेक्सुअली फैंटेसाइज करती हूं।

15. मेरे साथ रात बिताने का शुक्रिया। खुद को मार डालने का जब मैं मजाक कर रहा था, वह मजाक नहीं था। तुमने मेरी जान बचा ली।

16. इराक का अपना दौरा खत्म करने के बाद मैं नहीं चाहती कि तुम घर वापिस आओ। तुमसे उबरना मेरे लिए जरूरी है और तुम्हारी शक्ल न देखना काफी मददगार होगा।

17. कई बार चाहता हूं कि मेरी पत्नी मर जाए (चैन से ) ताकि मुझे तलाक के कागजों से उसका दिल न तोड़ना पड़े।

18. मेरी मां ने अपनी जिंदगी के प्यार को मेरे लिए छोड़ा। अब वह एक नाखुश शादी में तीन और बच्चों के साथ है। मुझे इससे नफरत है।

19. जब मेरे बच्चे मुसीबत लगने लगते हैं, तो मैं बांझ औरतों के ब्लॉग्स पढ़ने लगती हूं और खुद को फिर भाग्यशाली मानने लगती हूं।

20. मैं अपनी बीवी को तलाक दे दूंगा। अगर उसने वजन घ्ाटाना शुरू न किया। मैं उसके आलस और मोटापे से थक चुका हूं।

21. मेरे पिता मेरी मां से पिछले 26 सालों से धोखा कर रहे हैं। मैं 29 साल की हूं और वे पिछले 49 सालों से साथ हैं। अच्छा होता वह उन्हें पहले ही छोड़ देतीं।

22. सोचती हूं मुझे पति से ज्यादा प्यार अपने पपी से है। उसमें कोई दिक्कत नहीं, पर पपी कितना बेशकीमती है।

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