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ब्रह्मांड को समझने का नया फलक: प्रकाश से आगे, दुनिया को जानने की नई राह

Wed, 14 Oct 2026 07:49 AM IST
Vir Singh वीर सिंह
Updated Wed, 14 Oct 2026 07:49 AM IST
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सार
भौतिकी नोबेल विजेता फ्रांसिस हैलजेन ने सदियों से ब्रह्मांड को केवल प्रकाश के जरिये देखने के एकाधिकार को तोड़कर नया फलक प्रदान किया है।
 
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New Window into the Universe Beyond Light a New Way to Explore the World
फ्रांसिस हैलजेन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अंततोगत्वा मानवता ने ब्रह्मांड के उच्च ऊर्जा वाले रहस्यमयी कणों को दक्षिण ध्रुव की बर्फ में ढूंढकर आकाशगंगाओं से सीधे साक्षात्कार करने के लिए एक रास्ता खोज लिया! और, ऐसा करने वाले फ्रांसिस हैलजेन को भौतिक विज्ञान में 2026 के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दक्षिण ध्रुव पर एक विशाल डिटेक्टर ‘आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी’ की स्थापना कर ब्रह्मांड के उन कणों को खोजना, जिन्हें 'भूत कण' (घोस्ट पार्टिकल) भी कहा जाता है, में हैलजेन का प्रमुख योगदान रहा है।


प्रकाश के कण फोटॉन के बाद ब्रह्मांड में सबसे अधिक संख्या न्यूट्रिनो की है। आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी को उन कणों के अध्ययन के लिए बनाया गया था, जो ब्रह्मांड के सबसे अधिक ऊर्जा वाले स्रोतों, जैसे सुपरनोवा और गामा-किरण विस्फोट (गामा-रे बर्स्ट) जैसे विकट विस्फोटों से निकलते हैं। चूंकि, न्यूट्रिनो किसी भी माध्यम (पदार्थ) से प्रतिक्रिया नहीं करते, इसलिए वे हर चीज के आर-पार निकल जाते हैं। यहां तक कि पृथ्वी के भी। इसीलिए, इन्हें ‘भूत कण’ भी कहते हैं। इसी अद्वितीय क्षमता के कारण शोधकर्ता इन कणों की मदद से ब्रह्मांड की विस्फोटक घटनाओं तक सीधी रेखा खींच सकते हैं, जिससे उन्हें खगोलीय घटनाओं की शोध करने की एक अनोखी विधि मिल सकती है। न्यूट्रिनो का पता लगाना इसलिए भी कठिन है, क्योंकि उन पर चुंबकीय क्षेत्र का कोई प्रभाव नहीं होता।


1980 के दशक में हैलजेन के मन में एक विचार आया कि अंटार्कटिका की बर्फ में किए गए छेदों में 1.5 किलोमीटर से अधिक गहराई तक तारों से जुड़े डिटेक्टर लटकाए जाएं। उन्हें भरोसा था कि वहां वह प्रकाश की उस दुर्लभ और हल्की चमक का पता लगा पाएंगे, जो तब पैदा होती है, जब तेजी से चलने वाला न्यूट्रिनो किसी परमाणु से टकराता है। उनका मानना था कि बड़ा शोध क्षेत्र न्यूट्रिनो को पकड़कर उनकी दिशा और ब्रह्मांड में उनके स्रोत का पता लगाने में मदद कर सकता है। 2010 में बनी इस ऑब्जर्वेटरी में 5,160 सेंसर लगे हैं। इसकी कुल लागत 27.1 करोड़ डॉलर थी। इसकी स्थापना के दो वर्ष के अंदर ही डिटेक्टर ने आकाशगंगा के बाहर से आने वाले उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो का पता लगाया था। 2013 में हैलजेन की टीम ने ऐसे न्यूट्रिनो का पता लगाने की रिपोर्ट दी, जिनकी ऊर्जा इतनी अधिक थी कि वे सोलर सिस्टम में कहीं भी पैदा नहीं हो सकते थे। इस शोध ने न्यूट्रिनो एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र को स्थापित करने में सहायता की।  

स्प्रिंगर नेचर  के एक लेख के अनुसार, 2013 और 2014 में इस ऑब्जर्वेटरी ने तीन बेहद ऊर्जावान न्यूट्रिनो बर्ट, अर्नी और बिग बर्ड खोजे। इनकी ऊर्जा काफी अधिक थी। यह पृथ्वी के सबसे एडवांस्ड पार्टिकल कोलाइडर में बनने वाले न्यूट्रिनो की एक ऐसी खोज थी, जिसका इंतजार वैज्ञानिक लंबे समय से कर रहे थे। वे इन न्यूट्रिनो को पहली बार पृथ्वी के सबसे आधुनिक कण त्वरक में बनने वाले न्यूट्रिनो से जोड़कर देख पाए। इनका संबंध एक दूर स्थित आकाशगंगा से माना गया, जिसे आमतौर पर ‘टेक्सास इवेंट’ कहा जाता है। हैलजेन को उस प्रयोगात्मक अवधारणा को आगे बढ़ाने का श्रेय जाता है, जिसे प्रारंभ में कई शोधकर्ता ‘विश्व की सबसे आश्चर्यजनक अवधारणा’ मानते थे। अंटार्कटिका में इतने बड़े स्तर की सुविधा बनाने में बहुत बड़ी सामग्री जुटाने से संबंधी चुनौतियां थीं।

भौतिकी का 2026 का नोबेल पुरस्कार एक तकनीकी उपलब्धि के साथ वैचारिक क्रांति को भी दर्शाता है। यह बताता है कि अंटार्कटिका में एक घन किलोमीटर क्षेत्र में फैली बर्फ, जिसमें प्रकाश को पकड़ने वाले सेंसर लगे हैं, एक टेलीस्कोप की तरह काम कर सकती है। इससे उन न्यूट्रिनो का पता लगाया जा सकता है, जो इतने मायावी होते हैं कि बिना कोई निशान छोड़े पृथ्वी के आर-पार निकल जाते हैं। हैलजेन ने न्यूट्रिनो एस्ट्रोनॉमी से ब्रह्मांड को देखने का एक नया आयाम सृजित किया है। यह लेक्टोमैग्नेटिक टेलीस्कोप से होने वाले अन्वेषणों का पूरक है और कुछ मामलों में उनसे श्रेष्ठ भी। नील्स बोहर इंस्टीट्यूट के टॉस पेटर्सन के शब्दों में-‘आइसक्यूब ने सदियों से ब्रह्मांड को देखने के दृष्टिकोण में प्रकाश के एकाधिकार को तोड़ने में मदद की है।’

हैलजेन और उनके सहयोगियों के इस शोध के व्यावहारिक परिणाम भले ही तुरंत न दिखें, पर वे बहुत गहरे और महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यह खोज खगोल भौतिकी से बिल्कुल भिन्न क्षेत्रों में भी काम आ सकती है। मसलन, डार्क मैटर की प्रकृति से लेकर सबसे अधिक ऊर्जा वाली कॉस्मिक किरणों की उत्पत्ति तक, यह मानव ज्ञान की सीमाओं से जुड़े प्रश्नों का उत्तर और हमारे ज्ञान मंडल को ब्रह्मांड की अथाह सीमाओं तक विस्तार दे सकती है। -लेखक जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. एमेरिटस हैं।
 
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