{"_id":"6acda9a0bb38654e980e8ce6","slug":"heat-of-war-houthi-rebels-riyadh-attacks-inseparable-from-broader-conflict-political-solution-must-be-found-2026-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"युद्ध की आंच: रियाद में हूती विद्रोहियों के लगातार हमले व्यापक संघर्ष से अलग नहीं, राजनीतिक समाधान तलाशना होगा","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
युद्ध की आंच: रियाद में हूती विद्रोहियों के लगातार हमले व्यापक संघर्ष से अलग नहीं, राजनीतिक समाधान तलाशना होगा
सार
सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के लगातार हमलों को पश्चिम एशिया में जारी व्यापक संघर्ष से अलग करके नहीं देखा जा सकता। क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कूटनीति और राजनीतिक समाधान का रास्ता ही तलाशना होगा।
विज्ञापन
रियाद में तनाव बढ़ा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स -एएनआई-रॉयटर्स
विस्तार
हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब की राजधानी रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगातार हमलों से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब सिर्फ दो पक्षों के बीच लड़ाई तक सीमित नहीं रह गया है। दस अक्तूबर को जो हमला हुआ, वह पिछले एक दशक में सऊदी अरब पर हुआ सबसे बड़ा हमला था, जिसमें एक भारतीय समेत करीब 13 लोगों की मौत हुई।
विज्ञापन
अगले ही दिन फिर हूती विद्रोहियों ने एयरपोर्ट के दूसरे टर्मिनल पर हमला किया, साथ ही धमकी दी कि अभी और हमले हो सकते हैं। गौरतलब है कि सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता रहा है और हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल रहा है। इस पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों के बीच शत्रुता नई नहीं है। लेकिन किसी संघर्ष का लंबे समय तक जारी रहना इस बात को जायज नहीं ठहरा सकता कि उसकी आग पड़ोसी देशों के नागरिक ठिकानों तक पहुंचा दी जाए।
विज्ञापन
यही वजह है कि भारत समेत विभिन्न देशों ने एक स्वर में ऐसे हमलों की निंदा की है। हूती विद्रोहियों के साथ राजनीतिक समाधान तक पहुंचना आसान नहीं होगा। वर्षों से जारी संघर्ष ने उन्हें सैन्य अनुभव और लड़ने की क्षमता दी है। ऐसे में केवल सैन्य ताकत के बल पर उन्हें पूरी तरह परास्त करने की उम्मीद करना भी व्यावहारिक नहीं लगता। रही बात अमेरिकी सहायता की, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बारे में जल्द निर्णय लेने की बात कही है।
विज्ञापन
हालांकि, पिछले साल हूतियों के खिलाफ अमेरिकी अभियान के दौरान पहले ही महीने में करीब एक अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद खर्च होने के बाद ट्रंप ने अभियान में जीत की घोषणा कर दी थी। ऐसे में स्वाभाविक है कि इस बार अमेरिका किसी नए सैन्य अभियान में उतरने से पहले उसके संभावित खर्च और परिणामों पर विचार करेगा। दरअसल, इस संकट को पश्चिम एशिया में जारी व्यापक संघर्ष से अलग करके नहीं देखा जा सकता। लिहाजा इस संकट का स्थायी समाधान व्यापक क्षेत्रीय तनाव को कम करने और ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष समाप्त करने की दिशा में प्रगति से ही संभव है।
पश्चिम एशिया पहले ही कई मोर्चों पर संघर्ष और अस्थिरता से जूझ रहा है। जाहिर है, नए सैन्य अभियान आग में घी डालने का ही काम कर सकते हैं। जरूरी है कि सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ संघर्ष के मूल कारणों को दूर करने की कोशिश भी हो। क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कूटनीति और राजनीतिक समाधान का रास्ता तलाशना ही बेहतर होगा।