फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   New reference of root and fruit

कंद, मूल, फल के नए संदर्भ

Sun, 04 Oct 2015 06:08 PM IST
इंदिरा मितल
इंदिरा मितल Updated Sun, 04 Oct 2015 06:08 PM IST
विज्ञापन
New reference of root and fruit

इस धरती का हर प्राणी प्रकृति की समस्त संपदा का वारिस है और उसके भोग के सौभाग्य का हम जाने-अनजाने दुरुपयोग करते ही हैं। यदि समय रहते नहीं चेतेंगे, तो आनेवाली पीढ़ियों के लिए चंद्रमा या किसी अन्य ग्रह पर जा बसना ही विकल्प बचेगा। यह भी सुनिश्चित नहीं कि वहां ऐसी ही हरी-भरी वसुंधरा मिलेगी।

विज्ञापन


संपन्न यूरोपीय देश प्राकृतिक साधनों का महत्व भलीभांति समझते हैं। जैसे, विश्वयुद्ध के दौरान राशनिंग के बाद इफरात के दौर में अमेरिका लैंड ऑफ वेस्ट कहलाया जाने लगा। हालांकि यहां नेटिव अमेरिकन और आमिश लोग अन्न, जल, वायु और ऊर्जा का यथोचित सम्मान व संरक्षण करते हैं। वैसे ही, जैसे भारतीय संस्कृति में अन्न, जल और वायु को देवतुल्य माना गया है और इन देवताओं के प्रसाद का अंश भर भी अपव्यय अक्षम्य है।
विज्ञापन


तेज रफ्तार जिंदगी में समय बहुमूल्य है और खाना बनाने की तैयारी में शॉर्टकट एक सहूलियत। उपकरणों से छीली-कटी-गूंधी, पिसी-पिसाई सामग्री के पीछे बड़ी मात्रा में अपव्यय को देखते हुए यूरोप और अमेरिका में जागरूकता की एक नई लहर उठी है, जिसके 'स्टेम टू रूट' और 'नोज टू टेल' जैसे पक्षधर अन्न, सब्जी या फल और अन्य सामग्री का कोई भी अंश बर्बाद करने के विरुद्ध हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


साफ सब्जियों के सख्त हिस्से और छिलके या सख्त मांस और हड्डियां, मछली के सिर-पूंछ खुले पानी में उबाल कर पौष्टिक तत्वयुक्त वेजिटेरियन या नॉन-वेज यखनी/शोरबा बने। भिगोई और उबाली सब्जियों का पौष्टिक तत्वयुक्त पानी सूप-ग्रेवी में जाए और बचा-खुचा छिलका-गूदा कंपोस्ट के ढेर में खाद बने। जूठी प्लेटों का बचा-खुचा खाना मुर्गी फार्म को जाए।

सैन फ्रांसिस्को पहला शहर था, जहां रेस्तरां ही नहीं, घरेलू रसोईघर में फिंकने वाली हर चीज को खाद के लिए काम में लाना अनिवार्य बनाया गया। सिएटल पहला शहर है, जहां घरेलू कूड़े की री-साइकिलिंग के उल्लंघन पर भी वेस्ट मैनेजमेंट विभाग कड़ी चेतावनी देता है। इकतीस प्रतिशत तक खाद्य पदार्थ जाया होने से चिंतित देश में सिएटल शहर के सख्त नियमों के पीछे पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक नीतियां हैं।

मटर के छिलकों को साफ कर और बारीक काटकर भुजिया बने; ब्रोकोली व गोभी की डंठलें तराश कर महंगे अस्पैरेगस के सलाद सा स्वादिष्ट सलाद बने; सब्जियां उबाल-छानकर सूप बने और बचा गूदा आटे में सने या उबले आलू में मसल कर टिकिया बने। यह कंजूसी नहीं, किचन इकोनॉमिक्स है।

स्वाद के शौकीन केवल मुंह से नहीं, आंखों से भी खाते हैं। ग्रोसरी स्टोर्ज में सजी-संवरी सब्जियों, रंग बिरंगे फलों का अपना ही आकर्षण है, किंतु दूसरी ओर हैं अनाकर्षक किंतु खाने योग्य फल-सब्जियां, जिनके ढेर के ढेर फेंक दिए जाते हैं। ऑकलैंड, कैलिफोर्निया की एक संस्था ने अनाकर्षक सब्जियों से पांच हजार लोगों के लिए भोजन तैयार  कर मिसाल कायम की। अपव्यय घटे, तो दाम भी घटें और संतुलित व स्वास्थ्यवर्धक भोजन अधिक लोगों के बजट के भीतर हो।


स्विट्जरलैंड केवल घड़ियों और चॉकलेट्स के लिए  नहीं, हॉस्पिटैलिटी और टूरिज्म ट्रेनिंग संस्थानों के लिए ख्यात है। विश्व के प्रथम चार श्रेष्ठ रेस्तरां में से दो के स्वामी शेफ डैनियल हम्म स्विस का बिजनेस फलसफा एक शब्द में निहित है : सादगी। उनका कहना है कि किचन में सामग्री हो या प्लेट पर सजा पकवान; प्रयोग में आनेवाली हर चीज का महत्व है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed