मंथन: एक दंपती और उनका देश, प्रेम की गाथा से राष्ट्रीय फलक तक 'विनी एंड नेल्सन'
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विस्तार
दक्षिण अफ्रीका में लंबे समय से मेरी दिलचस्पी रही है और 1995 में मैंने वहां जाकर काम करने के बारे में विचार भी किया था। यह वही समय था, जब वहां पहले बहुनस्लीय चुनाव हुए ही थे और महान नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति चुने गए थे। मैं प्रत्यक्ष रूप से यह देखने को अत्यंत उत्सुक था कि वह भूमि कैसी है और वहां के लोगों ने बड़े संघर्ष से मिली आजादी का क्या किया। हालांकि जिस नौकरी में मेरी रुचि थी, वह मुझे नहीं मिल सकी। इसके बावजूद, उस देश के घटनाक्रम पर मेरी नजर बनी रही और मैंने पांच बार वहां की यात्रा की, जिनमें से कुछ तो दोस्तों से मिलने के लिए थीं और कुछ तो वहां के अभिलेखागारों में यह तलाशने के लिए थीं कि वहां एक भारतीय मोहनदास के. गांधी के बारे में कैसी सामग्री उपलब्ध है, जिसने दक्षिण अफ्रीका में दो दशक बिताए थे।
हाल ही में एक किताब पढ़ते हुए दक्षिण अफ्रीका और वहां के लोगों के बारे में रुचि फिर से जाग गई। यह किताब है, जॉनी स्टाइनबर्ग की विनी ऐंड नेल्सन, जिसमें उन्होंने स्वतंत्र रूप से रह रहे एक विवाहित जोड़े की कहानी का उपयोग संकटग्रस्त भूमि के जटिल और संघर्ष से घिरे इतिहास को बताने के लिए किया। किताब की शुरुआत 1957 में उनकी पहली मुलाकात से होती है, जब नेल्सन विनी की सुंदरता और जिंदादिली से प्रभावित हुए थे। वह उम्र में न केवल उनसे दो दशक बड़े थे, बल्कि पहले से शादीशुदा थे और उनके बच्चे भी थे। यह सब भी उन्हें उनके साथ गहराई से प्रेम करने से रोक नहीं सका। वह उनके व्यक्तित्व और अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (एएनसी) के उभरते सितारे के रूप में उनकी सार्वजनिक धमक से प्रभावित थीं।
स्टाइनबर्ग की किताब का उपशीर्षक है, पोट्रेट ऑफ ए मैरिज। इसमें दशकों में विकसित होते गए उनके रिश्ते को संवेदनशीलता और अधिकार के साथ चित्रित किया गया है, लेकिन हमेशा उस समय के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास की पृष्ठभूमि के बरक्स। नेल्सन और विनी के चरित्र जीवंत हो उठते हैं। उनके संघर्षों, त्याग, चिंताओं और विषमताओं के बारे में गहराई और विस्तार से लिखा गया है। हालांकि स्टाइनबर्ग ने कुछ अन्य व्यक्तियों का भी जीवंत चित्रण किया है, जिनमें प्रमुख हैं, स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल रहे नेल्सन के साथी और विरोधी, विनी के दोस्त और सहायक, नस्लवादी सरकार के संचालन से जुड़े कुछ क्रूर लोग और रंगभेद आंदोलन के कुछ विदेशी दोस्त (जिनमें दक्षिण भारत में जन्मे संयुक्त राष्ट्र के शानदार अधिकारी एनुगा एस रेड्डी शामिल हैं)।
नेल्सन के सभी बच्चों पर भी उचित ध्यान दिया गया है, जिनका जीवन उनके पालन-पोषण की परिस्थितियों से अभिशप्त था, उनके पिता व्यापक रूप से उनके जीवन के प्रति उदासीन या अनुपस्थित थे। स्टाइनबर्ग ने नेल्सन और विनी की बेवफाइयों पर भी बेधड़क होकर लिखा है। अपनी पहली मुलाकात के एक साल बाद 1958 में नेल्सन मंडेला और विनी मैडिकिजेला विवाह सूत्र में बंध गए। जल्दी-जल्दी उनके दो बच्चे हो गए; लेकिन बड़े होते बच्चों को उनके पिता कम ही देख पाते थे। विनी के दूसरे बच्चे को जन्म देने के थोड़े दिन बाद ही मंडेला भूमिगत हो गए थे और फिर 1963 में उन्हें जेल भेज दिया गया।
यों तो स्टाइनबर्ग की पूरी किताब पहले से लेकर आखिरी पेज तक पठनीय है, फिर भी मंडेला की 27 वर्षों की कैद पर केंद्रित खंड सर्वाधिक ध्यान खींचते हैं। इसमें जेल के उनके जीवन और विनी के जोहान्सबर्ग की एक टाउनशिप में बिताए जीवन पर उन दोनों के नजरियों से बारी-बारी से लिखा गया है।
रॉबेन द्वीप में पत्थर तोड़ते हुए या किसी और तरह का शारीरिक श्रम करते हुए नेल्सन अपनी भविष्य की राजनीतिक रणनीति से संबंधित योजनाएं बनाते रहते थे। अहम यह है कि स्टाइनबर्ग ने स्वतंत्रता संघर्ष के बारे में लिखते हुए रेखांकित किया कि सिर्फ एएनसी अकेली महत्वपूर्ण किरदार नहीं थी। उन्होंने पैन अफिकैनिस्ट कांग्रेस (पीएसी) और उसके चमत्कारिक नेता रॉबर्ट सोबुकवे के बारे में भी लिखा। एएनसी ने जहां श्वेतों और भारतीयों के लिए भी अपनी बांहें खोल रखी थीं, वहीं पीएसी का विचार था कि सिर्फ अफ्रीकी ही इस भूमि के वैध निवासी हैं। इसकी विचारधारा को सोबुकवे द्वारा असामान्य प्रभाव के साथ व्यक्त किया गया था। वह एक ऐसे व्यक्ति थे, जिसे मंडेला एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते थे और शायद एक खतरे के रूप में भी।
इस बीच, सोवेटो में विनी न सिर्फ अपनी जिंदगी को सहेजने की कोशिश कर रही थीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में अपने करिअर को संवारना चाहती थीं। स्टाइनबर्ग ने बच्चों की परवरिश और नौकरी पाने में संघर्ष, और रंगभेद सरकार द्वारा उनके उत्पीड़न और समय-समय पर जेल जाने के बारे में बताया है। इस बीच, एक उल्लेखनीय साहस के साथ, उन्होंने खुद को- जेल में बंद मंडेला की पत्नी होने के नाते- लोगों की नेता घोषित कर दिया। हमेशा स्टाइलिश कपड़ों में नजर आने वाली विनी ने विदेशी संवाददाताओं को कई साक्षात्कार दिए, जिससे विदेशों तक नेल्सन मंडेला और उनके संघर्ष की कहानी फैलने लगी। वह कुछ ऐसे बदमाश लोगों से भी घिर गई थीं, जो विनी से अपनी करीबी का फायदा लोगों को धमकाने और यहां तक कि कई बार ऐसे लोगों की हत्या तक कर देने में कर रहे थे, जिनसे उन्हें लगता था कि उनके हितों को नुकसान पहुंच सकता है। जैसा कि स्टाइनबर्ग दिखाते हैं, विनी खुद इस बात से अनभिज्ञ नहीं थीं, और कभी-कभी उनकी अपनी सुरक्षा के नाम पर की गई हिंसा में लिप्त रहती थीं।
1980 के दशक के आखिर में दक्षिण अफ्रीका के गोरे शासकों को देर से ही सही, एहसास होने लगा कि मौजूदा रंगभेदी व्यवस्था टिकाऊ नहीं हो सकती। उन्होंने जेल में नेल्सन मंडेला से बात करनी शुरू कर दी और गतिरोध तोड़ने का रास्ता तलाशने लगे। वार्ताकारों में रंगभेद शासन के दो श्वेत खुफिया अधिकारी थे, जिन्होंने मंडेला के साथ काफी समय बिताने के बाद, एक गुप्त नोट में लिखा था कि 'यह संभव नहीं है कि उन्हें उनके संगठन के प्रति उनकी वफादारी को धोखा देने और उनके गहराई से जुड़े राजनीतिक दर्शन से डिगाने के लिए उन्हें "खरीदा" जा सके।' उन्होंने यह भी लिखा, 'कोई भी उनकी आध्यात्मिक शक्ति; कटुता की कमी, उनकी स्वाभाविक सदाशयता के साथ ही उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी से प्रभावित हो सकता है।'
इन शब्दों से लेखक को 1922 में अहमदाबाद में महात्मा गांधी के खिलाफ देशद्रोह के मामले की सुनवाई के दौरान की गई जज रॉबर्ट ब्रूमफील्ड की टिप्पणी याद आ गई। औपनिवेशिक शासन के जज ने गांधी से कहा, 'आप उन लोगों से अलग हैं, जिनकी मैंने कभी भी सुनवाई की है या जिनकी सुनवाई कर सकता हूं।' जज ने आगे कहा, 'इस तथ्य को नजरअंदाज करना असंभव होगा कि आप अपने करोड़ों देशवासियों की नजरों में एक महान देशभक्त और एक महान नेता हैं। यहां तक कि राजनीति में आपके विरोधी भी हैं, वे भी आपको उच्च आदर्शों और महान और संत जीवन के व्यक्ति के रूप में देखते हैं।' कानून के तहत गांधी को छह साल की जेल की सजा सुनाते हुए, ब्रूमफील्ड ने टिप्पणी की : 'मुझे ऐसा करते हुए कहना चाहिए कि अगर भारत में चल रहे घटनाक्रमों के क्रम में सरकार के लिए अवधि कम करना और आपको रिहा करना संभव हो जाए, तो मुझसे ज्यादा प्रसन्न कोई नहीं होगा।' शायद, यह मंडेला और गांधी की महानता ही थी कि वे उन साम्राज्यवादियों में भी मानवता को जगाने में सक्षम थे, जिन्होंने उनका और उनके लोगों का दमन किया था।
फरवरी, 1990 में नेल्सन मंडेला को 27 साल की कैद के बाद रिहा किया गया था। 1996 में नेल्सन और विनी का तलाक हो गया। यह किताब दिसंबर 2013 में नेल्सन की मृत्यु और उसके साढ़े चार साल बाद विनी की मृत्यु तक उनकी व्यक्तिगत यात्राओं का अनुसरण करती है।