पाकिस्तान में नई शुरुआत
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
पाकिस्तान के लिए यह हफ्ता उत्सव मनाने का रहा, जिसमें संगीत, नृत्य और वायदों की झड़ी लगी थी। अगले हफ्ते बकरीद भी आने वाली है, इसलिए लोग थोड़े दिनों के लिए जश्न के माहौल में हैं। एक ऐसे लोकतंत्र में, जहां अब भी नागरिक नेतृत्व को सत्ता पर नियंत्रण के लिए सेना के साथ संतुलन बनाना पड़ता हो, 2018 का चुनाव होते देखना अच्छा शगुन था। एक नए प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के आने के साथ नेशनल एसेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं में लोकतंत्र की एक नई शुरुआत हुई है। बहुत से वायदे किए गए हैं और ये सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या नए प्रधानमंत्री इमरान खान इन वायदों को पूरा कर पाएंगे। लंबे अरसे बाद यह पहला मौका है, जब नेशनल एसेंबली में सौ से ज्यादा नए चेहरे देखे जा सकते हैं। ये ऐसे राजनेता हंै, जिन्होंने एएनपी के अफसंदर वली खान, पीएमएपी के महमूद अचकजई और जेयूआईएफ के अलोकप्रिय नेता मौलाना फजलुर रहमान जैसे पुराने नेताओं को हराया है।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
इमरान खान बहुत सारे सहयोगियों के साथ गठबंधन सरकार चलाएंगे, जिन्होंने पहले ही मांग की है कि उन्हें महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने चाहिए। इसलिए सरकार चलाना नए प्रधानमंत्री के लिए आसान नहीं होगा। इमरान खान को पंजाब विधानसभा में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भले उनका दावा है कि पंजाब में उनके पास पर्याप्त सीटें हैं, लेकिन वह अब भी मुख्यमंत्री पद के लिए एक सही उम्मीदवार की तलाश कर रहे हैं। शहबाज शरीफ के बेटे और नवाज शरीफ के भतीजे हमजा शहबाज शरीफ वहां पीएमएलएन के नेता हैं। इसलिए वहां पीटीआई को कड़ी टक्कर मिलने वाली है। हालांकि पहले शरीफ परिवार को केंद्र में पीपीपी से हार मिली है, लेकिन पिछले दस साल में शरीफ परिवार ने पंजाब पर अपना दावा नहीं खोया है। अगर हमजा शरीफ को सरकार गठन के लिए पर्याप्त वोट नहीं मिले, तो पीएमएलएन अगले पांच साल के लिए खेल से बाहर हो जाएगी और फिर उसे वापस पाना कठिन होगा।
पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के असद कैसर ने गुप्त मतदान के जरिये कमजोर विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार पीपीपी के दिग्गज नेता खुर्शीद शाह को हराकर नेशनल एसेंबली के स्पीकर पद की शपथ ली। खैबर पख्तुनख्वा विधानसभा के पूर्व स्पीकर कैसर को 176 वोट मिले, जबकि शाह को 146 वोट और आठ वोट रद्द किए गए। स्पीकर के चुनाव में पीटीआई का शक्ति परीक्षण तो हो ही गया था, उसी से ऐसा लगने लगा था कि जब सदन के नेता के रूप में मतदान होगा, तो इमरान खान आसानी से 176 वोट या उससे ज्यादा पा लेंगे, क्योंकि विपक्ष बंटा हुआ है। नेशनल एसेंबली में इमरान खान को 176 वोट मिले, जबकि शहबाज शरीफ को मात्र 96 वोट। नेशनल एसेंबली में कुल 342 सीटें हैं। इनमें से 272 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव हुआ। इसके अलावा पाकिस्तानी संविधान के अनुसार, दस सीटें धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित हैं और 60 सीटें महिलाओं के लिए, जिसे पांच फीसदी से अधिक वोट वाले विभिन्न दलों के आनुपातिक प्रतिनिधित्व से भरा जाएगा।
विदेश नीति के मामले में भारत में एक अच्छी शुरुआत की गई थी और किसी अन्य देश के बजाय इन दोनों मुल्कों के बीच आपसी बातचीत को लेकर पाकिस्तान में काफी दिलचस्पी थी। चुनाव नतीजा आने के बाद इमरान खान ने भारत के लिए एक अच्छा और संतुलित संदेश देकर इस प्रक्रिया की शुरुआत कर दी है। बधाई देने के लिए आए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोन के बाद भारतीय उच्चायुक्त की मुलाकात को भी काफी दिलचस्पी से देखा गया। लेकिन शायद भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा हस्ताक्षरित क्रिकेट का बल्ला सबसे अच्छा उपहार था। यहां यह भी याद करना चाहिए कि दोनों मुल्कों के बीच बहुत पुराने क्रिकेट संबंध रहे हैं और यही समय है कि दोनों को एक-दूसरे देश में खेलना चाहिए। पाकिस्तान में अक्सर कहा जाता है कि दुनिया में एक ही क्रिकेट मैच है-पाकिस्तान बनाम भारत। विपक्ष की बात करते हुए इमरान खान बहुत संजीदा थे और उन्होंने विपक्ष को आश्वस्त किया कि मतदान के दौरान छेड़छाड़ की उनकी शिकायतों पर गौर किया जाएगा।
इन दिनों बिलावल भुट्टो ने नेशनल एसेंबली में अपनी पारी की शुरुआत की है, जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को आकर्षित किया था। उन्होंने अपने विरोधियों के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करने से परहेज किया था और उन मुद्दों पर टिके रहे, जो पाकिस्तानियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर निचले सदन में उनके साथ उनके पिता और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी हैं, जो वास्तव में पीपीपी की असली ताकत हैं। पार्टी के कई नेता और विशेष रूप से आम कार्यकर्ता मानते हैं कि यही वक्त है, जब जरदारी खुद पीछे रहकर युवा बिलावल को पार्टी मामलों को देखने के लिए आगे बढ़ाएं। जरदारी के भ्रष्टाचार के किस्से, जिनमें उन्हें मिस्टर टेन परसेंट कहा जाता था, अब भी लोगों के जेहन में ताजा हैं।
अगर संसद में पहली कतार को कोई देखे, तो उसे वहां भी बदलाव दिखेंगे। अतीत में नवाज शरीफ पंजाबियों से घिरे रहते थे, जो उनके करीबी सहयोगी और नई सत्ता गठबंधन का चेहरा थे। लेकिन इमरान खान के आसपास सिंध और खैबर पख्तुनख्वा के लोग हैं, जो पीटीआई के समर्थक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बलूचिस्तान के राजनीतिक दल भी उनके साथ हैं और इस तरह वे केंद्र द्वारा अपनी शिकायतों का समाधान करना चाहते हैं। लेकिन सेना का सख्त रवैया उन्हें याद दिलाता है कि अब भी वही सत्ता का प्रभार संभाले हुए है, जो अपने पसंदीदा का ख्याल रखती है और विरोधियों के साथ कठोरता से पेश आती है।
दो बार इमरान खान संसद पहुंचे हैं, पहली बार सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए और दूसरी बार स्पीकर के चुनाव के लिए मतदान करने। पीएमएलएन के नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में पेशी के लिए बख्तरबंद गाड़ी में अदालत ले जाया गया, जिसका इस्तेमाल सामान्य कैदियों के लिए किया जाता है। इमरान खान को याद रखना चाहिए कि इन दिनों भले उन्हें सेना का समर्थन मिल रहा है, लेकिन अगर उन्होंने अपनी जूती से पैर बाहर निकाले, तो उनके लिए भी ऐसी ही बख्तरबंद गाड़ी का इंतजाम किया जा सकता है।