फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Need of policy on increasing population

बढ़ती आबादी पर नीति की दरकार

Tue, 21 Aug 2018 07:08 PM IST
शांता कुमार
शांता कुमार Updated Tue, 21 Aug 2018 07:08 PM IST
विज्ञापन
Need of policy on increasing population
शांता कुमार

नीति आयोग ने पानी की समस्या के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट देकर इस समस्या की गंभीर होती परिस्थिति से देश को सावधान कर महत्वपूर्ण काम किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि साठ करोड़ भारतवासी पीने के पानी की भयंकर समस्या से जूझ रहे हैं। दो लाख लोग साफ पानी की कमी के कारण मर जाते हैं। गुणवत्ता की दृष्टि से विश्व के 122 देशों में भारत बहुत नीचे 120 वें स्थान पर है। 84 फीसदी ग्रामीण घरों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। यह भी कहा गया है कि 21 प्रमुख नगरों में 2020 तक पानी उपलब्ध नहीं होगा। इस उच्च स्तरीय संस्था की यह रिपोर्ट भारत के भविष्य की एक डरावनी तस्वीर पेश करती है।


loader

बहुत से कारण हो सकते हैं, परंतु सबसे प्रमुख और बुनियादी कारण बढ़ती आबादी का प्रकोप है। हम 34 करोड़ से बढ़कर 136 करोड़ हो गए। प्रतिवर्ष एक करोड़ साठ लाख लोग बढ़ रहे हैं। कुछ वर्षों बाद भारत चीन को पीछे छोड़कर विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जाएगा। प्रकृति के सभी साधनों की एक सीमा है, परंतु भारत की आबादी बढ़ने की कोई सीमा नहीं है।

देश की राजधानी दिल्ली गैस चैम्बर बन गई, बच्चों की बीमारियां बढ़ रही हैं। पूरे नगर का कूड़ा जिस एक स्थान पर इकट्ठा किया जाता है, वहां पहाड़ बन गया। कुछ दिनों पूर्व वहां आग लग गई थी, जिसमें दो लोग मर गए। दिल्ली में रोजाना सैकड़ों नई गाड़ियां सड़क पर आ रही हैं। भीड़ बढ़ रही है, यातायात रुक रहा है। यह सब बढ़ती आबादी का प्रकोप है।
 
बढ़ती आबादी के दबाव में हो रहे अवैध निर्माण से कोई राज्य बचा नहीं है। बढ़ती आबादी के कारण मकानों की जरूरत बढ़ी है और सरकारी अधिकारियों के भ्रष्टाचार से पूरे देश के सभी स्थानों पर अवैध निर्माण हुए हैं। कई बार सारा मामला न्यायपालिका के पास जाता है। अवैध निर्माण गिराने का आदेश दिया जाता है। बुलडोजर करोड़ों की संपत्ति को ध्वस्त करता है। अधिक आबादी के दबाव में मकानों के निर्माण के लिए रेत और बजरी की आवश्यकता पड़ती है, जिससे अवैध खनन होता है। पूरे देश में रेत माफिया खड़ा हो गया है। कई जगह नदी-नालों की रेत निकाल ली गई और अब उनकी अंतड़ियां तक कुरेदी जा रही हैं।
 
बढ़ती आबादी के दबाव में बहुत से जंगल कट गए, और पशु-पक्षी परेशान हो गए। बंदर, तेंदुए और हाथी तक रिहायशी बस्तियों में घुसने लगे हैं। हिमाचल में बंदरों के कारण हजारों किसानों ने खेती करना बंद कर दिया है।

भारत आज विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। विश्व के छह अमीर देशों में भारत का नाम है। हर वर्ष अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है, दूसरी ओर दुनिया में सबसे अधिक भूखे लोग भारत में रहते हैं। कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक भारत में है। बढ़ती बेरोजगारी की हालत यह है कि पुलिस के सिपाही और चपरासी के पद के लिए लाखों उम्मीदवार अर्जी देते हैं, जिनमें एमए पास तक होते हैं।

नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले चार वर्षों में पूरी योजना को नई दिशा दी है। गांव, गरीब और किसान के लिए नई योजनाएं प्रारंभ की हैं, परंतु मुझे डर है कि इन योजनाओं से होने वाले लाभ को बढ़ती आबादी का दानव न निगल जाए। सभी दलों को मिलकर एक राष्ट्रीय सहमति बनाकर एक राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनानी चाहिए। समय आ गया है, जब इस समस्या के समाधान को टाला नहीं जा सकता।

- लेखक हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हैं

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed