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युवाओं को सिखाएं जीवन प्रबंधन

Wed, 24 Jan 2018 08:14 AM IST
दीपक श्रीवास्तव
दीपक श्रीवास्तव Updated Wed, 24 Jan 2018 08:14 AM IST
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Need of Life Management Teaching
दीपक श्रीवास्तव

वैश्वीकरण और आर्थिक सुधार का सबसे बड़ा लाभ भारत में व्यावसायिक शिक्षा को मिला है। पिछले कुछ दशकों में व्यावसायिक संस्थानों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिसका श्रेय विकास दर की वृद्धि को जाता है। छात्रों को कॉरपोरेट क्षेत्र में रोजगार के योग्य बनाने के लिए इन संस्थानों द्वारा विभिन्न डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रम पेश किए जा रहे हैं।


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हालांकि ऐसे कोर्स में जीवन प्रबंधन कौशल के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है। तथ्य यह है कि आधुनिक मानव के जीवन में संघर्षों, इच्छाओं और महत्वाकांक्षाओं का बोझ बहुत ज्यादा है। कॉरपोरेट दुनिया अनिश्चितता और तनाव से भरी हुई है। परस्पर विरोधी जरूरतें प्राथमिकता तय करने में मुश्किलें पैदा करती हैं। समय का उपयोग और प्रबंधन जरूरी है। हमें विभिन्न तरह के लोगों से निपटने की जरूरत होती है। कॉरपोरेट जगत में प्रतिस्पर्धा करने से पहले, यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि अपनी विफलता से कैसे निपटें। अत्यधिक तनाव के कारण मानसिक बीमारी के बहुत से मामले हैं। देश में मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा जैसी जीवन-शैली से संबंधित बीमारियां बढ़ रही हैं। मसलन, भारत दुनिया में सबसे ज्यादा मधुमेह रोगियों का घर है। स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के अत्यधिक उपयोग से मानसिक रोग बढ़ रहे हैं। भारत एक ओर जहां गरीबों को भोजन देने में विफलता की चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं मोटापे के बढ़ते मामलों से भी उसे मुकाबला करना पड़ रहा है।

ऐसे में भावनाओं और तनावों के प्रबंधन का हुनर सिखाने की जरूरत है। इस तरह के कौशल को आधुनिक व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली में शामिल नहीं किया गया है। कॉरपोरेट जगत की समझ के साथ ही युवाओं में जीवन प्रबंधन कौशल विकसित करने का यही सही समय है। भविष्य में हमें और भी ज्यादा प्रशिक्षित और किफायती जीवन प्रबंधन सलाहकार या कोच की जरूरत होगी। बेहतर जीवन के लिए प्रभावी जीवन प्रबंधन जरूरी है, जिसमें आतंरिक और बाह्य, दोनों आयाम शामिल हैं। जबकि कॉरपोरेट प्रबंधन केवल बाह्य आयामों से निपटता है। कॉरपोरेट जगत में प्रतिस्पर्धा के लिए हमें स्व-जागरूकता के जरिये स्वयं को प्रबंधित करना सीखना होगा। हमें अपनी जरूरतों और भावनाओं को समझने की जरूरत है। मन और शरीर की रचना और उनके तालमेल की पढ़ाई अवश्य होनी चाहिए।

जीवन में बेहतर दृष्टि विकसित करने के लिए जीवन प्रबंधन की आवश्यकता है। जीवन प्रबंधन कौशल एक सकारात्मक व्यवहार और दृष्टिकोण का विकास करता है, जो कॉरपोरेट चुनौतियों के साथ रोजमर्रा की जरूरतों से सफलतापूर्वक निपटने के लिए हमें सशक्त बनाता है। ये कौशल बेहतर निर्णय लेने, बाधाओं को दूर करने, समय प्रबंधित करने, रचनात्मक सोचने, दूसरों से सहानुभूति रखने, विफलताओं का सामना करने और अपने जीवन का स्वस्थ व रचनात्मक ढंग से प्रबंधन करने में मदद करते हैं।

हमारे पास प्राचीन भारतीय ज्ञान से लाभ लेने का अवसर है। हम प्राचीन भारतीय व्यवस्था में जीवन-कौशल के जरूरी उपकरण ढूंढ सकते हैं, जैसे आध्यात्मिक मूल्य, योग, ध्यान, सचेतन तकनीक, इत्यादि। भारत मन-शरीर के स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता पर प्राचीन ज्ञान का स्थल है। विभिन्न देशों के लोग आंतरिक शांति के लिए भारत आते हैं और वे आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित प्राचीन भारतीय ज्ञान से लाभ उठाते हैं।

लेखक निरमा विश्वविद्यालय, अहमदाबाद में प्रोफेसर हैं। 

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