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घोड़े और उनका रहस्यमय संसार: अहम सबक सीख बन सकते हैं बेहतर इंसान, कभी-कभी नियंत्रण छोड़ना ही सबसे सटीक रणनीति

Sun, 08 Dec 2024 05:43 AM IST
ज्योति भास्कर स्टेरी बुचर, द न्यूयॉर्क टाइम्स
स्टेरी बुचर, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: ज्योति भास्कर Updated Sun, 08 Dec 2024 05:43 AM IST
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सार
वारविक शिलर जैसे प्रशिक्षकों ने घोड़ों के मनोविज्ञान की अज्ञात दुनिया से पर्दा उठाया है। लेकिन कुछ वर्ष पहले शेरलॉक नामक घोड़ा उनके लिए भी पहेली बन गया था। शिलर के होश तो तब उड़ गए, जब उन्हें पता चला कि यह घोड़ा ठीक उसी तरह व्यवहार कर रहा था, जैसे कुछ वर्ष पहले तक वह खुद करते थे।
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mysterious world of Horses lessons for being better humanbeing letting go control is best strategy
घुड़सवारी से जादुई जीवंतता का अनुभव (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घोड़े भी क्या शानदार जीव हैं। हरदम उड़ने को तैयार। इंद्रियां पूरी तरह से मुस्तैद। वे बारी-बारी से जागते हैं, यानी एक जागता रहता है, तो दूसरे घोड़े सोते हैं। वे लगभग 360 डिग्री तक देख सकते हैं और एक बार में दो वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, यानी प्रत्येक आंख से एक वस्तु को देखते हैं। वे दिन में 16 घंटे तक चरते हैं। उनके थूथन पर उगी मूंछें चट्टानों से कोमल घास को पहचानने के लिए विकसित हुई हैं। उनकी खाल स्पर्श के प्रति इतनी संवेदनशील होती है कि वे अपने शरीर पर बैठी मक्खी तक को महसूस कर सकते हैं और उसे भगाने के लिए अपनी त्वचा को हिला सकते हैं। उनकी सूंघने की क्षमता लगभग कुत्ते जितनी ही तेज होती है।


घोड़े आपस में दोस्ती करते हैं, एक-दूसरे के चेहरे से मक्खियों को उड़ाने व देह खुरचने का काम करते हैं। मनुष्यों के दिमाग में प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स होता है, जो योजना बनाने, संगठित करने, लक्ष्य निर्धारित करने और निर्णय लेने का काम करता है, पर घोड़े के पास ऐसा कुछ नहीं होता। वे मूल्यांकन के बिना विचारों और भावनाओं का अनुभव करते हैं। हालांकि वे काफी कुछ याद रख सकते हैं, लेकिन भविष्य में क्या चाहते हैं, इस पर विचार नहीं करते, जिससे वे वर्तमान में जीने की विशिष्ट योग्यता रखते हैं। चूंकि उन्हें सामूहिक सुरक्षा के बिना मरने का भय होता है, इसलिए वे सह-अस्तित्व में भरोसा करते हैं। पालतू बनाए जाने के बाद लगभग 5,500 वर्षों से घोड़े निरंतर हमारी सेवा में रहे हैं, चाहे युद्ध में भाग लेना हो, रथों की दौड़ हो, भैंसों का शिकार करना हो, घास काटना हो, डाक ले जाना हो, हमारे आदेश पर दौड़ना, छलांग लगाना व खींचना हो, घोड़े हमेशा हमारे साथ रहे हैं। इतने लंबे व घनिष्ठ संबंध के बावजूद घोड़ों और मनुष्यों के बीच चीजें हमेशा अच्छी नहीं होती हैं। घोड़े डरपोक हो सकते या भाग सकते हैं। वे उछल और काट सकते हैं या अपने पैरों को जमा सकते हैं और आगे बढ़ने से इन्कार कर सकते हैं। ऐसे में, घोड़े व मालिक, दोनों की निराशा बढ़ने लगती है, और चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे क्षणों में वारविक शिलर जैसे प्रशिक्षक मनुष्य व घोड़ों के बीच समझ की खाई को पाटते हैं। हाल ही में शिलर ने घोड़ों को प्रशिक्षण देने की अपनी तकनीक को बदला है। अब वह घोड़े और मनुष्य के बीच के रिश्ते को आज्ञाकारिता के बजाय सहयोग की भावना से हल करते हैं। जहां दोनों का रिश्ता पूरी तरह से रुकने या तेज उड़ान भरने के बारे में कम है, और आपसी विश्वास व समझ बनाने के बारे में ज्यादा।


घोड़ा जो बना पहेली
सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। लेकिन कई बार प्रशिक्षकों के सामने भी ऐसी परिस्थितियां खड़ी हो जाती हैं, जिनमें उन्हें ही प्रशिक्षण की जरूरत महसूस होती है। 2016 में, शेरलॉक नामक एक छोटा लाल घोड़ा शिलर्स के खलिहान में खड़ा था, जो किसी पहेली से कम नहीं था। वह आज्ञाकारी था, पर आंखों में जिज्ञासा या चमक नहीं थी। उसमें भावनाओं की कमी थी। उसकी बेचैनी उसके शरीर में दिख रही थी। शिलर ने घोड़े को परिष्कृत करने के लिए पुरानी प्रशिक्षण तकनीकों का सहारा लिया, फिर भी शेरलॉक पर कोई असर नहीं हुआ। वह उदास ही रहा। इसलिए शिलर ने एक प्रयोग किया। उसने अपने बाड़े में घोड़े को देखने में ही समय बिताया। जब शिलर शेरलॉक की ओर एक या दो कदम आगे बढ़ता, तो घोड़े के कान के हिलने या उसकी नजर के हिलने पर शिलर रुक जाता। अगर शिलर पीछे हटता, तो घोड़ा आह भर सकता था या अपना सिर थोड़ा नीचे कर सकता था। शेरलॉक खलिहान में चहचहाती मुर्गियों को देखने के लिए मुड़ता, तो शिलर भी देखता। उसने महसूस किया कि घोड़े में तनाव के संकेत पहले से ज्यादा सूक्ष्म और सार्थक थे। शिलर को पता था कि वह सही रास्ते पर है, क्योंकि संचार की शुरुआत हो चुकी थी। सुपरिचित प्रशिक्षक रे हंट, जिनकी मृत्यु 2009 में हुई थी, ने कहा था, ‘एक घोड़ा जानता है कि आप कब जानते हैं और यह भी जानता है कि आप कब नहीं जानते हैं।’ शेरलॉक के रहस्यों को सुलझाते हुए शिलर ने हंट के कथन पर अलग ढंग से विचार करना शुरू किया। उन्होंने सोचा, शायद इसका संबंध घोड़े के इस ज्ञान से ज्यादा था कि आप उनके साथ मौजूद हैं। वह कहते हैं कि घोड़े हमारे आसपास अपनी सुरक्षा के स्तर को निर्धारित करने के लिए बहुत-सी चीजें करते हैं। एक दिन उसके व अपने बारे में सोचते हुए उसके दिमाग में आया कि बचपन में उसकी भावनाओं को किस तरह यह कहते हुए दबाया गया था कि लड़कों को रोना या डरना शोभा नहीं देता। तभी शिलर को एहसास हुआ कि वह भी शेरलॉक ही है। शेरलॉक वैसा ही व्यवहार कर रहा था, जैसा शिलर खुद वर्षों तक करता आया है। घोड़ों से कुछ सीखने के लिए आपको सुनना सीखना पड़ेगा। शिलर सुनता गया व शेरलॉक का रवैया बेहतर हो गया, और उसकी आशावादिता व जिज्ञासा खिल उठी।

घोड़े और सवार का एक हो जाना
घोड़े पर पैर रखकर बैठना उसकी जादुई जीवंतता का अनुभव करना है। सवार को घोड़े की पसलियों का फैलाव महसूस होता है। जब वह आहें भरता है, तो उसे लगता है कि उसकी भुजाएं कांप रही हैं। जब वह अपने मुंह में लगाम को समायोजित करता है, तो लगाम के माध्यम से उसकी जीभ का धक्का महसूस होता है। उनके द्वारा उत्पन्न गर्मी और धूल भरी गंध में जीवन और ताकत की महान प्रेरणा है और जब वह चलने के लिए आगे बढ़ता है, तो उसका शरीर लुढ़कता है। सवार घोड़े के अंदर की चिंता और भनभनाहट को महसूस कर सकता है और जैसे ही घोड़ा शांत होता है, उसे यह घबराहट कम होती हुई महसूस होती है। एक विचारशील सवार हर पल इस बात से अवगत होता है कि घोड़े के कान क्या कर रहे हैं, उसकी निगाह कहां पड़ती है, उसके पैरों की ताल, गति और चाल, उसकी सांसों की लय, और उसका मन कहां है। जब घोड़ा और सवार एक ही लय में होते हैं, तो दिमाग और शरीर एक हो जाते हैं।

घोड़े से जो सीखा
  • कभी-कभी नियंत्रण छोड़ना ही सबसे सटीक रणनीति होती है।
  • जितना आप शांत होंगे, उतना ही आपका घोड़ा शांत होगा।
  • बगैर किसी उम्मीद के जब आप घोड़े से संवाद करने की कोशिश करते हैं, तब ही चमत्कारी नतीजे मिलते हैं।
  • घुड़सवारी सीखना आपके भीतर जागरूकता लाता है और आप बेहतर इन्सान बनते हैं।
  • घोड़े को खुद के अनुकूल करना है, तो बदलाव आपको अपने भीतर करने होंगे।
  • एक अच्छे श्रोता बनने की कोशिश करें।
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