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शहनाई: संगीत बुरे अनुभवों को भूलने में मदद करता है, सफल होने का सबसे पक्का तरीका- हमेशा एक बार और प्रयास करें
Mon, 11 Nov 2024 04:12 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
बिस्मिल्लाह खान
बिस्मिल्लाह खान
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 11 Nov 2024 04:12 AM IST
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संगीत बुरे अनुभवों को भूलने में मदद करता है
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अमर उजाला
विस्तार
मैं संगीत प्रेमी हूं, लेकिन संगीत के प्रति मेरा लगाव अलग है। मैं केवल संगीत नहीं सुनता, मुझे उस गीत और संगीतकार के जीवन का अध्ययन करना भी पसंद है, यह गीत की भावना को और बढ़ा देता है। मैं संगीत के अलावा कुछ नहीं जानता। संगीत बुरे अनुभवों को भूलने में मदद करता है, क्योंकि आप राग और पछतावे को एक साथ अपने दिमाग में नहीं रख सकते। जब आप दूसरों को खुशी देते हैं, तो बदले में आपको भी ज्यादा खुशी मिलती है। संगीत दूसरों को खुशी और खुद मुझे एक अच्छा अनुभव देता है। भले ही दुनिया खत्म हो जाए, संगीत फिर भी जीवित रहेगा। संगीत की कोई जाति नहीं होती। 'ये जो देश है तेरा’ में मैंने शहनाई बजाई है, यह मेरे पसंदीदा गानों में से एक है। यह मुझे ऊपर वाले के पास वापस जाने की याद दिलाता है।
जब मेरी पत्नी का निधन हुआ, तो मैं एक वर्ष तक बहुत परेशान रहा। उस समय सब चाहते थे कि मैं दूसरी शादी कर लूं, लेकिन मैंने अपने दिल की सुनी, और तय किया कि शादी नहीं करूंगा। हर तरफ से मैं उस वक्त लोगों के विचारों के दबाव में दब रहा था, लेकिन मैंने उन लोगों को कहा कि मेरा साथी शहनाई है। एक रात मैं गहरे ध्यान में था, मुझे कहीं से कुछ सुगंध आ रही थी, यह एक अवर्णनीय सुगंध थी, कुछ-कुछ चंदन और चमेली जैसी। मैंने सोचा कि यह गंगा की सुगंध है, लेकिन सुगंध और अधिक तीव्र हो गई।
जब मैंने अपनी आंखें खोलीं, तो बालाजी मेरे ठीक बगल में खड़े थे, बिल्कुल वैसे ही जैसे उन्हें चित्रित किया गया है। उस क्षण मुझे एहसास हुआ कि ईश्वर किसी धर्म को नहीं जानता, ईश्वर केवल मानव जाति के हैं। बनारस में बालाजी और मंगला गौरी का मंदिर है-बालाजी तक पहुंचने के लिए आपको सीढ़ियों की मदद से थोड़ा नीचे जाना होगा, लेकिन मंगला गौरी थोड़ी ऊंचाई पर हैं। मैं आजकल वहां नहीं जा पाता।
मुझे अमेरिका में रहने को कहा गया, लेकिन मैंने कहा, वाराणसी वह जगह है, जहां गंगा बहती है, जहां मैं भगवान बालाजी के लिए शहनाई बजा सकता हूं। मैं अपने घर पर रहूंगा, कहीं और नहीं। मेरे पूर्वज बालाजी मंदिर में कार्यक्रम पेश करते थे। उन्हें पूरे महीने के लिए 35 या 40 रुपये मिलते थे, और जब मेरी दादी कार्यक्रम करती थीं, तो उन्हें 14 आने मिलते थे। एक बार इराक के एक मौलाना से मेरी बहस हुई थी। उसने कहा कि संगीत ईशनिंदा है, शैतान का जाल है, और तुम्हें इसमें नहीं पड़ना चाहिए। मैंने उनसे कहा, मौलाना, मैं बस इतना चाहता हूं कि आप निष्पक्ष रहो। फिर मैंने गाना शुरू किया और जब मैंने गाना खत्म किया, तो मैंने उनसे पूछा कि क्या यह ईशनिंदा है। इसे किस दृष्टि से ईशनिंदा कहा जाएगा? वह अवाक रह गए, उनके पास कहने को कुछ नहीं बचा था। मैंने उनसे कहा कि ऐसी गलतियों में न पड़ें। मैंने उनसे पूछा कि क्या राग में ईश्वर का नाम लेना गलत है। हर कोई अलग-अलग सोचता है।
सूत्र: एक बार और प्रयास करें
हमारी सबसे बड़ी कमजोरी हार मान लेना है। सफल होने का सबसे पक्का तरीका हमेशा एक बार और प्रयास करना है। जहां आप हैं, वहीं से शुरुआत करें। जो आपके पास है, उसका इस्तेमाल करें। जो आप कर सकते हैं, वह करें। याद रखें, यदि संघर्ष नहीं होगा, तो प्रगति भी नहीं होगी।