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संक्रमण: संकट सिर्फ एमपॉक्स का नहीं... एक बार फिर स्वास्थ्य संकट के केंद्र बन सकते हैं संघर्ष वाले क्षेत्र

Mon, 02 Sep 2024 04:32 AM IST
ज्योति भास्कर जीन कासेया
जीन कासेया Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 02 Sep 2024 04:32 AM IST
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सार
पहले से ही संघर्ष, विस्थापन और स्वास्थ्य ढांचे के पतन से जूझ रहे अफ्रीकी देशों में एमपॉक्स की चुनौती और जटिल हो गई है।
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Mpox Crisis Widespread Infection in Conflict areas can once again become central health crisis
मंकीपॉक्स से जुड़ी चुनौती (प्रतीकात्मक) - फोटो : freepik.com

विस्तार

एमपॉक्स संक्रमण से जूझ रहे लोगों का पता लगाना आसान नहीं है। डर और कलंक के कारण मरीज लक्षण दिखने के तुरंत बाद चिकित्सा सहायता नहीं लेते हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में दर्दनाक दाने, बुखार, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। गलत सूचना तेजी से फैल रही है। डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य सेवा कर्मी न केवल बीमारी से लड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, बल्कि वे उन बड़ी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं, जिन पर उनका बहुत कम नियंत्रण है।



एमपॉक्स के फिर से उभार ने दुनिया को याद दिलाया है कि यह बीमारी व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए कितनी खतरनाक है। लेकिन ऐसे संकटों को बढ़ाने वाले कारकों पर कम ध्यान दिया गया है, खासकर अफ्रीका में। कई अफ्रीकी देशों की व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के कारण ये और भी बदतर हो गए हैं, जिससे ऐसी कमजोरियां उजागर हुई हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से आगे तक फैली हुई हैं।


लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो ने हैजा, इबोला और कोविड-19 जैसे प्रकोपों का सामना किया है। अब यह अफ्रीका में फैले एमपॉक्स प्रकोप के केंद्र में है। इस साल कांगो में 17,000 से ज्यादा मामले और 500 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जो कि महाद्वीप में सबसे ज्यादा मामले और मौतें हंै। ये क्षेत्र, जो पहले से ही संघर्ष, विस्थापन और स्वास्थ्य ढांचे के पतन से जूझ रहे हैं, व्यापक और घातक एमपॉक्स प्रकोप का अतिरिक्त तनाव झेल रहे हैं। नए एमपॉक्स स्ट्रेन के उभरने से यह चुनौती और जटिल हो गई है। कोई भी शारीरिक संपर्क वायरस के संचरण का कारण बन सकता है। यानी सशस्त्र संघर्ष से विस्थापित हुए सैकड़ों हजारों लोगों के भीड़-भाड़ वाले शिविर बड़े पैमाने पर बीमारी फैलने के संभावित केंद्र हैं। ये विस्थापित परिवार संघर्ष के आघात से जूझ रहे हैं, और अब उन्हें बीमारी से भी निपटना होगा। पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाकर्मी, जो एमपॉक्स के खिलाफ संघर्ष में अग्रिम पंक्ति के रक्षक हैं, सीमित संसाधनों के साथ देखभाल प्रदान करने के लिए जूझ रहे हैं।

सशस्त्र विद्रोहियों और देश की सेना के बीच युद्ध ने बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया है और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघन से त्रस्त दक्षिण किवु में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। एमपॉक्स विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए खतरनाक है। कांगो में पांच वर्ष से कम आयु के 11 लाख से अधिक बच्चे और लगभग 6,05,000 गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं जुलाई 2023 और जून 2024 के बीच तीव्र कुपोषण के उच्च स्तर का सामना कर रही हैं। कई लोगों को संक्रमण से लड़ने के लिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर रहना पड़ता है। 

जब तक इन आबादियों को परेशान करने वाली सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक एमपॉक्स इस क्षेत्र से खत्म नहीं होगा। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और अफ्रीका की सीडीसी ने एमपॉक्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है, लेकिन अब तक किए गए उपाय महाद्वीप में इतने बड़े संकट को संबोधित करने के लिए अपर्याप्त हैं। एमपॉक्स वैक्सीन का वितरण असमान रहा है। टीकों की उच्च लागत बीमारी की रोकथाम के प्रयासों को और बाधित कर सकती है, खासकर दक्षिण किवु में, जहां इसकी सबसे अधिक जरूरत है। डब्ल्यूएचओ ने यूनिसेफ और वैश्विक वैक्सीन गठबंधन गावी जैसे अपने भागीदारों को डब्ल्यूएचओ द्वारा औपचारिक रूप से स्वीकृति दिए जाने से पहले एमपॉक्स टीके खरीदने की अनुमति दी है, यह सही दिशा में उठाया गया कदम है।

एमपॉक्स प्रकोप के सबक स्पष्ट हैं-व्यापक सामाजिक संदर्भ को संबोधित किए बिना स्वास्थ्य संकटों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित नहीं किया जा सकता है। दुनिया को यह पहचानना चाहिए कि कांगो जैसे स्थानों में, जहां संघर्ष और बीमारी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों को संघर्ष को हल करने, समुदायों के पुनर्निर्माण और प्रभावित लोगों की गरिमा को बहाल करने के प्रयासों के साथ जोड़ा जाना चाहिए। इस तरह की एक-दूसरे से जुड़ी प्रतिक्रिया के अभाव में संघर्ष वाले क्षेत्र एक बार फिर स्वास्थ्य संकट के केंद्र बन सकते हैं।

(साथ में निसाइज नेदेम्बी, नगाशी एनगोंगो, ताजुदीन राजी और मोरेनिक ओ फोलयान)

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