फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   More in name

नाम में बहुत कुछ है

Wed, 10 Dec 2014 08:47 PM IST
योगेंद्र शर्मा
योगेंद्र शर्मा Updated Wed, 10 Dec 2014 08:47 PM IST
विज्ञापन
More in name

संतों ने हमारी अनेक मूर्खताएं हमें गिनाईं। फिर भी हमने सुधरने की कोशिश नहीं की। व्यवहार तो छोड़िए, अपनी भाषा तक नहीं सुधारी। जैसे, सड़क जहां की तहां रहती है, केवल यात्री चलते हैं। फिर भी हम प्रायः प्रश्न करते हैं, भैया, यह सड़क कहां जाती है। पिसता गेहूं है, पर हम गर्व से कहते हैं कि हम आटा पिसाने जा रहे हैं।

विज्ञापन


हुदहुद का नाम लो, तो किसी हल्की-फुल्की खूबसूरत चिड़िया का चित्र दिल-ओ-दिमाग में उभरेगा। हजारों जीव-जंतुओं को काल कवलित करने वाले समुद्री तूफान को इतना सुंदर, नाजुक-सा नाम क्या सोचकर दिया? नीलोफर को उसके प्रेमी ने अपना दिल बेदाम दे दिया। जब पाकिस्तान से वह तूफान तांडव करता हुआ चला, तो कई दिलजलों ने उसे कोसा होगा। बेचारी नीलोफर ने बेवजह एक चींटी तक नहीं मारी। उसका आशिक उसे सौंदर्य और कोमलता का दूसरा नाम समझता था। परंतु हमने तो खतरनाक तूफानों के नाम नीलोफर, कटरीना और रीटा रख छोड़े हैं। यह ऐसे ही है, जैसे किसी डायन या चुड़ैल का नाम कोई सीता, राधा या सावित्री रख दे। तूफानों के नाम तो जालिमों के नाम पर भी रखे जा सकते थे। लेकिन हमें तो अर्थ का अनर्थ करना है।
विज्ञापन


कहावत है, बुद्धिमान मूर्खों से बहुत कुछ लेते हैं, लेकिन मूर्ख बुद्धिमानों से कुछ नहीं लेते। उन्हें अक्लमंद होने का अभिमान जो रहता है। हम हमेशा ऐसे ही रहे हैं। चाहे मनीषियों ने निरंतर ज्ञान की वर्षा क्यों न की हो, लेकिन हमने अपने बर्तन औंधे ही रखे। शेक्सपियर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है। लेकिन कभी-कभी हमने नाम के महत्व को समझते हुए अक्लमंदी का परिचय दिया है। जैसे कि हमारे पड़ोसी जवाहरलाल गोयल ने सोच-समझकर कभी अपनी बिटिया का नाम इंदिरा रखा था। वर्षों बाद बेटा हुआ, तो उन्होंने उसका नाम रखा मनमोहन। उन्होंने मान लिया था कि यह नाम रख देने से उनका बेटा कम से कम दशक भर तो देश पर राज करेगा ही। अब उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद अपने पोते का नाम नरेंद्र रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed