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शासन और राजनीति की मोदी शैली

Sun, 12 Jan 2020 06:38 PM IST
Raman Singh आर राजगोपालन
आर राजगोपालन Published by: Raman Singh Updated Sun, 12 Jan 2020 06:38 PM IST
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MODI STYLE OF GOVERNANCE AND POLITICS
नरेंद्र मोदी - फोटो : a

प्रधानमंत्री के तौर पर छठे साल की ओर बढ़ रहे नरेंद्र मोदी ने शासन और राजनीति की एक शैली स्थापित की है। अटल बिहारी वाजपेयी और उनके शासन में बहुत अंतर है। उनका शासन मोरारजी देसाई के शासन से भी थोड़ा अलग है। पिछले करीब छह साल में शासन की दृष्टि और सोच में उन्होंने बड़े बदलाव को अंजाम दिया है और शासन को चुस्त-दुरुस्त बनाया है। 2014 के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति को कांग्रेस मुक्त बनाने की दिशा में वह न केवल और आगे बढ़े, बल्कि उनका एजेंडा 2024 तक सभी क्षेत्रों में विकास लाना है।


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शासन में मोदी का बड़ा लक्ष्य 2025 तक नया भारत बनाना है। इसके लिए उन्होंने भारतीय नौकरशाही में 40 फीसदी पदों पर पेशेवर तथा प्रगतिशील दृष्टिकोण वाले स्वतंत्र चिंतकों को लेटरल इंट्री के जरिये लाने का नियम बनाया है। इन 40 फीसदी लोगों के लिए कोई नियम और सार्वजनिक परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। जाहिर है, इसने आईएएस पदाधिकारियों के बाबूराज को बड़ा झटका दिया है।

नरेंद्र मोदी जोखिम उठाते हैं। वह न तो नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से डरते हैं और न ही विचलित होते हैं। उन्होंने जीएसटी कानून पारित करवाने तथा नोटबंदी जैसे फैसले लिए। उसके बाद उन्होंने अमेरिका से कच्चे तेल के आयात को दोगुना किया है। यह कदम उठाकर मोदी ने अमेरिकी कंपनियों से 5 जी न खरीदने के चलते अमेरिका की नाराजगी दूर करने की कोशिश भी की है। अब भारत तेल आयात के लिए खाड़ी देशों पर पूरी तरह से निर्भर नहीं है। 5 जी के लिए उन्होंने चीन के प्रायोजक ह्वावे कंपनी से संपर्क किया। ये दो बड़े क्रांतिकारी कदम हैं, जिन पर बहुत से लोगों ने गौर नहीं किया है। चौथा महत्वपूर्ण कदम कोयला क्षेत्र में सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का फैसला है। वह गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहले से ही समृद्ध अनुभव रखते थे और अब उनके पास एक बड़ा और राष्ट्रीय दृष्टिकोण है।

विदेशी संबंधों में उन्होंने हमारे कूटनीतिक दृष्टिकोण को बदल दिया है। रक्षा क्षेत्र में उन्होंने बहुत से नए विचारों को जगह दी है। हाल ही में उन्होंने बिपिन रावत को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बनाया है और सैन्य मामलों का एक नया विभाग बनाया है। यह आसान नहीं था। ऐसा उन्होंने नौकरशाही से संघर्ष करके किया है। माना जाता है कि रक्षा क्षेत्र में नौकरशाही का वर्चस्व खत्म कर उन्होंने आईएएस वर्ग को सबक सिखाया है। जिस तरह मोदी ने नेहरूयुगीन योजना आयोग को खत्म कर उसकी जगह नीति आयोग की स्थापना की, वैसे ही उन्होंने रेलवे बोर्ड को खत्म कर भारतीय रेल में निजी भागीदारी लाने का फैसला किया, क्योंकि वह समझ चुके थे कि तकनीकी प्रमुखों ने रेलवे की सुरक्षा और संरक्षा को भ्रमित किया।

तथ्य यह है कि नरेंद्र मोदी ने वास्तव में सरकार को न्यूनतम किया है। न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन की अवधारणा के बारे में उनका कथन था, 'पहले मेरे कैबिनेट नोट को पूरे कैबिनेट में पहुंचने में छह महीने लगते थे, पर अब मात्र 15 दिन लगते हैं। यही न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन है। लोग उतने ही हैं, लेकिन नतीजे ज्यादा हैं। पहले हम सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करने के लिए विदेश जाते थे। मैंने कहा, ऐसा कुछ नहीं करना है, बस वीडियो कॉन्प्रेंस के जरिये हम एक बार में ही इसे अंतिम रूप दे देंगे।' भारत सरकार के पास 85 विभाग और लगभग 70 प्रमुख मंत्रालय हैं। मोदी इन सभी मंत्रालयों और विभागों की अवधारणा को समझते हैं। उनका सबसे प्रिय मंत्रालय पर्यटन है। अपने सभी सार्वजनिक बैठकों और व्यवसायियों के संबोधन में मोदी गर्व के साथ कहते हैं कि लोगों को कम से कम एक साल में 15 पर्यटक स्थलों का दौरा करना चाहिए। इसलिए उन्होंने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा और नई दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की स्थापना की है। पिछले दो वर्षों में इन दोनों स्थानों पर भारी संख्या में पर्यटक आए हैं। नरेंद्र मोदी को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित बहु-मॉडल मंच 'प्रगति' (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस ऐंड टाइमली इम्प्लीटेशन) प्रिय है। अपने दूसरे प्रधानमंत्री काल की पहली प्रगति बैठक में उन्होंने 2022 तक सबके लिए आवास की प्रतिबद्धता दोहराई। यही नहीं, वह हमेशा आयुष्मान भारत और सुगम्य भारत जैसे प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते रहते हैं।

मोदी शैली के शासन पर हमने काफी चर्चा कर ली। आइए, अब मोदी शैली की राजनीति पर बात करें। हम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय, दो स्तरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी ने किसी को नाराज नहीं किया है। उनके नेतृत्व का कद इतना ऊंचा है कि वह सभी वैश्विक नेताओं को उनके पहले नाम से पुकारते हैं। उन्हीं के शब्दों में कहें, तो इसका कारण यह है कि भारतीय मतदाताओं ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में 303 सीटें दीं।

ईरान-अमेरिका के बीच युद्धोन्माद बढ़ने के हालिया घटनाक्रम में मोदी के चुप रहने की कूटनीति को कई विश्व नेताओं ने सराहा है। विभिन्न राज्यों के प्रमुख शहरों में द्विपक्षीय वार्ता आयोजित करने की उनकी सोच (जैसे चेन्नई के महाबलीपुरम में उन्होंने शी जिनपिंग और वाराणसी में जापानी प्रधानमंत्री के साथ बैठक की) भारत की संघीय संरचना को उसमें शामिल करने का हिस्सा है। भारतीय राजनीति की बात करें, तो 2024 तक मोदी का लक्ष्य 2019 के भाजपा के घोषणापत्र को पूरा करना है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि भाजपा की 90 फीसदी चुनावी घोषणाएं मोदी सरकार द्वारा सफलतापूर्वक लागू की गईं।

मोदी की राजनीति कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को खत्म करने की है और भाजपा पांच साल और सत्ता में रहना चाहती है। मोदी 35 से 40 क्षेत्रीय पार्टियों को निशाने पर लेकर प्रसन्न हैं और उनकी वंशवादी राजनीति को धूल चटा रहे हैं। जाहिर है, मोदी ने बाबूराज को खत्म करने के साथ-साथ भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस के पतन को भी बेहद सफलतापूर्वक सुनिश्चित किया है।

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