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गोरखपुर का संदेश
तवलीन सिंह
Updated Sun, 18 Mar 2018 07:30 PM IST
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तवलीन सिंह
पिछले वर्ष योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं गोरखपुर गई थी। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में मैंने योगी जी की प्रशंसा इस तरह की सुनी थी, ‘आप लुटियंस वाले पत्रकार जानते नहीं है कि कितना काम किया है उन्होंने गोरखपुर के लिए। अस्पताल बनवाए हैं, सड़कें बनवाई हैं, देहातों में भी उन्होंने बहुत कुछ किया है।’ ऐसी बातें इसलिए सुनने को मिलीं, क्योंकि उस समय मैंने बहुत लोगों को कहा था कि योगी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री नियुक्त करना प्रधानमंत्री की पहली बड़ी गलती साबित हो सकता है।
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विधानसभा चुनाव से पहले मैंने उत्तर प्रदेश का दौरा किया था और किसानों व गरीब देहातियों से बात करने के बाद मालूम यह हुआ था कि उनको परिवर्तन और विकास की आशा थी। राम मंदिर का जिक्र तक मैंने कहीं नहीं सुना, योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक यात्रा जिस आंदोलन से शुरू हुई थी।
उनकी छवि एक कट्टरपंथी हिंदुत्ववादी की है, सो उनकी नियुक्ति से मुसलमानों को स्पष्ट इशारा गया कि उत्तर प्रदेश में उनकी खैर इस आधार पर ही हो सकती है कि वह चुपचाप यह बर्दाश्त करते रहें कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ कुछ शर्तों पर ही होगा। सो गोरखपुर पहुंचने के बाद मैंने बड़ी मस्जिद में सबसे पहले जाने का निर्णय लिया। मुख्य बाजार की गंदी, भीड़ भरी गलियों से गुजरती हुई मस्जिद तक जब मैं पहुंची, तो अंदर कुछ बुजुर्ग मिले, जिनसे मैंने बातें शुरू कीं। मेरा पहला सवाल यही था कि क्या योगी के दौर में उनको भय का माहौल बनता दिख रहा है। कुछ देर तक सब चुप रहे। फिर एक सफेद दाढ़ी वाले ने कहा, ‘जी खौफ तो नहीं, लेकिन तनाव इसलिए है कि अनेक मुसलमानों का रोजगार गोश्त की दुकानों में है और इनमें से बहुत बंद हो चुकी हैं, वे भी, जिनके पास लाइसेंस हैं। ऊपर से मुस्लिम मोहल्लों में एंटी रोमियो दस्ते घूमने लग गए हैं और इनका काफी आतंक है।’
मस्जिद के बाद मैं गोरखनाथ मठ गई। वहां की साफ-सुथरी गौशाला देखी, अस्पताल देखा और गुरु गोरखनाथ के दर्शन करने के बाद लोगों से बातें कीं। वहां जितने भी लोग मिले, सब योगी के प्रशंसक थे। सबने कहा कि गोरखपुर के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है। जब मैंने उनसे पूछा कि बतौर सांसद उन्होंने अगर इतना कुछ किया है, तो बीस वर्षों में शहर का हाल इतना बुरा क्यों है कि एक भी क्षेत्र साफ, सुंदर क्षेत्र नहीं है। उन्होंने कहा कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ योगी जी ने बहुत काम किया है।
उस दौरे के तीन महीने बाद ऑक्सीजन सिलिंडरों के अभाव में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब 70 बच्चों की मौत हुई। उस हादसे के बाद उत्तर प्रदेश से ज्यादातर खबरें बुरी ही मिली हैं। एंटी रोमियो दस्ते ने शादियों में दखल दिया है। हिंदुत्ववादियों ने इस शक पर एक बुजुर्ग की जान ली कि उसने हिंदू लड़की को मुस्लिम लड़के के साथ भागने में मदद की। योगी ने पिछले एक साल में अच्छे काम अगर किए भी हैं, तो उन पर इन हिंसक घटनाओं का काला साया छाया रहा है।
इन सब बातों के बावजूद मुझे यकीन था कि भाजपा गोरखपुर किसी हाल में नहीं हार सकती। सो गोरखपुर की हार से यही संकेत मिलता है कि योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनाकर शायद नरेंद्र मोदी ने पहली बड़ी गलती की है। उत्तर प्रदेश में अभी तक परिवर्तन और विकास के आसार दिखे होते, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत तय होती। अब लगता है कि ऐसा नहीं है।