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समाज: सार्थक वही जो बदलाव लाए, नैतिक शिक्षा ऐसी जो आंतरिक परिवर्तन की बने वाहक
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सार
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अमर उजाला
विस्तार
कुछ वर्ष पहले पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय की मनोवैज्ञानिक एंजेला डकवर्थ ने लिखा कि चरित्र निर्माण का मतलब है तीन तरह की शक्तियों का निर्माण करना-दिल की ताकत (दयालु, विचारशील, उदार होना), मानसिक ताकत (जिज्ञासु, खुले दिमाग वाला होना, अच्छे निर्णय लेना) और इच्छाशक्ति की ताकत (आत्म-नियंत्रण, दृढ़ संकल्प, साहस)। मैं उन लोगों में से हूं, जो सोचते हैं कि नैतिक निर्माण किसी भी स्वस्थ समाज का केंद्रीय तत्व है। नैतिक निर्माण सिर्फ दिमाग में चीजों को बिठा लेना नहीं है, बल्कि इसमें हृदय का आंतरिक परिवर्तन भी शामिल है।इस हफ्ते मैं हार्वर्ड के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन में मेकिंग केयरिंग कॉमन परियोजना द्वारा आयोजित नैतिक विकास सम्मेलन में था, जहां मेरे मन में कुछ विचार उठे।
माहौल- लोगों के चरित्र मुख्य रूप से तब बनते हैं, जब वे सुसंगत नैतिक माहौल के भीतर रहते हैं। वे एक संस्था के भीतर बनते हैं, जिसका एक अलग लोकाचार होता है, जो कुछ मानकों को बनाए रखता है। इस तरह आदतें और स्वभाव धीरे-धीरे समूह के लोगों पर अंकित हो जाते हैं।
नैतिक कौशल- लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने के लिए कुछ कौशलों का अभ्यास करना होता है, जिन्हें ठीक वैसे ही सिखाया जाता है, जैसे बढ़ईगीरी या टेनिस खेलना सिखाया जाता है। सबसे पहले समझने के कौशल हैं-सुनने और बातचीत करने में अच्छा होना, और जीवन की कहानियां बताना, ताकि आप अपने आसपास के लोगों को सही ढंग से देख सकें और उन्हें महसूस करा सकें कि आप उन्हें देख रहे हैं। आप लोगों को कैसे देखते हैं, यह निर्धारित करता है कि आप दुनिया में कैसे दिखते हैं।
प्रशंसा- यह सबसे शक्तिशाली नैतिक भावनाओं में से एक है। महान ऐतिहासिक हस्तियां अक्सर किसी न किसी महान शख्सियत की प्रशंसा करती हैं। नेल्सन मंडेला के पास महात्मा गांधी थे; अब्राहम लिंकन के पास जॉर्ज वाशिंगटन थे। वॉरेन बफे ने एक बार कहा था, ‘मुझे बताएं कि आपके हीरो कौन हैं, और मैं आपको बताऊंगा कि आप कैसे बनने जा रहे हैं।’ सौभाग्य से, हम कई समृद्ध और विविध नैतिक परंपराओं के उत्तराधिकारी हैं। स्कूल इन परंपराओं को पढ़ा सकते हैं और छात्र तय कर सकते हैं कि उन्हें कौन-सी परंपरा सही लगती है।
गहन अध्ययन-अधिकांश महान नैतिक परंपराएं लोगों को महान ग्रंथों का जुनूनी ढंग से अध्ययन करने के लिए कहती हैं। यह केवल कुछ पुस्तकों को पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि उनमें प्रवेश करने और अपने भीतर संघर्ष करने के लिए है, जब तक कि उसके गहरे अर्थ हमारे भीतर प्रवेश न कर जाएं।
कमियों पर विजय- हम सभी किसी न किसी तरह के दोष के शिकार हैं। ड्वाइट आइजनहावर की मुख्य खामी उनका भयानक गुस्सा था। एक दिन उनकी मां ने कहा, ‘जो अपनी आत्मा पर विजय प्राप्त करता है, वह उससे महान है, जो एक शहर जीतता है।’ आइजनहावर ने कहा कि यह उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सीखों में से एक थी, क्योंकि इसने उन्हें सिखाया कि अगर दुनिया में कुछ भी सकारात्मक करना है, तो क्रोध पर विजय पानी होगी।
सेवा से बदलाव-सामुदायिक सेवा केवल समाज को बेहतर बनाने के लिए नहीं होती; यह सेवा करने वाले के भीतर बदलाव लाने के लिए की जाती है। सामुदायिक सेवा लोगों को सिखाती है कि अगर आप दूसरों का सहयोग करना नहीं जानते, तो उनके नेक विचारों का कोई मतलब नहीं है।