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राष्ट्रपति शासन प्रणाली की ओर मॉरीशस
दिवाकर भट्ट
Updated Sun, 23 Nov 2014 12:41 PM IST
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मॉरीशस में अगले महीने होने वाले संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम की गठबंधन पार्टी यदि दो तिहाई बहुमत से जीतती है, तो फ्रेंच मूल के एमएमएम (मॉरीशस मिलिटेंट मूवमेंट) पार्टी के नेता पॉल बिरांजे अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। तब डॉ. नवीन रामगुलाम राष्ट्रपति होंगे। वैसी स्थिति में मॉरीशस में फ्रांस की तरह राष्ट्रपति शासन प्रणाली स्थापित हो सकती है और सरकार सात वर्ष की हो सकती है। सात साल तक कुर्सी पर बने रहने के लिए हुए इस गठबंधन को लेकर वहां के लोगों में कुछ नाराजगी है।
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मॉरीशस में नई सरकार के लिए चुनाव आगामी 10 दिसंबर को होना है। नवीन रामगुलाम सरकार ने विगत सात नवंबर को ही चुनाव की घोषणा कर दी थी। गौरतलब है कि मॉरीशस में पांच वर्ष में चुनाव होते हैं। पहले यह चुनाव 2015 में होना था, लेकिन सरकार ने एक वर्ष पूर्व ही संसद भंग कर चुनाव की घोषणा कर दी। समय पूर्व चुनाव कराने के पीछे मौजूदा सरकार को जीत की अधिक संभावना नजर आ रही है। हालांकि चुनाव की घोषणा करने से पहले ही प्रधानमंत्री रामगुलाम ने अचानक विरोधी पार्टी एमएमएम के नेता पॉल बिरांजे से यह कहकर हाथ मिला लिया कि हम मिल-जुलकर चुनाव जीत सकते हैं। 60 सदस्यीय संसद के लिए हो रहे चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन के विरुद्ध पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. अनिरुद्ध जगन्नाथ की पार्टी एमएसएम (मॉरीशस सोशलिस्ट मूवमेंट) का पीएमएसडी (मॉरीशस सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी) से गठबंधन है। 13 लाख की आबादी वाले इस देश में करीब आठ लाख मतदाता 20 संसदीय क्षेत्रों से 60 सांसदों को चुनेंगे। उल्लेखनीय है कि मॉरीशस में एक संसदीय क्षेत्र से तीन सांसद चुने जाते हैं।
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इस चुनाव में जीतने पर सत्ताधारी लेबर पार्टी के मुखिया प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम की मंशा देश के संविधान में संशोधन कर फ्रांस की भांति देश में राष्ट्रपति शासन प्रणाली की स्थापना करने की है। अभी वहां सरकार की सारी शक्तियां प्रधानमंत्री के पास हैं। लेकिन नवीन रामगुलाम का गठबंधन अगर चुनाव जीतने में सफल होता है और इसे दो तिहाई बहुमत मिल जाता है, तो वह संविधान में संशोधन करेगा, जिससे सारी शक्तियां राष्ट्रपति के पास आ जाएंगी। तब नवीन रामगुलाम राष्ट्रपति और पॉल बिरांजे प्रधानमंत्री होंगे।
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कुर्सी के लिए हुए इस समझौते को मॉरीशस के 52 प्रतिशत भारतवंशी पचा नहीं पा रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगे भी सत्ता बरकरार रखने के लिए ही नवीन रामगुलाम ने कल तक उनकी सरकार के घोर आलोचक बिरांजे से हाथ मिलाया है। भारतवंशियों को आशंका है कि इससे उनके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। भारतवंशियों की नाराजगी का फायदा पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. जगन्नाथ की पार्टी को मिल सकता है। उन्हें भारतवंशियों के हितैषी के रूप में देखा जाता है।