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विवेचना: जिंदगी की तरह ही अनिश्चित होते हैं बाजार, परिस्थितियों से सीखने में है बुद्धिमानी
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अर्थव्यवस्था।
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विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों के लिए शेयर बाजार का सफर आसान नहीं रहा है। कोरोना महामारी के वर्षों के बाद जैसे ही सुरंग के अंत में कुछ रोशनी दिखी, वैसे ही कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने निवेशकों के लिए इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया। अगर यूक्रेन-रूस और इस्राइल-गाजा युद्ध दूर की बात थी, तो अब हमारी सीमाओं पर ऐसा हो रहा है। कई लोगों को लगता है कि युद्धों का शेयर बाजारों पर अल्पकालिक प्रभाव पड़ता है, लेकिन वास्तव में वे दीर्घकालिक परिणाम छोड़ते हैं। उदाहरण के लिए, हवाई किराये में वृद्धि, उच्च मुद्रास्फीति, बैंक बचत और जमा पर कम ब्याज कुछ नई सामान्य बातें हैं।
यदि आप बारीकी से देखें, तो हर जगह अनिश्चितता है-रोजगार बाजार, शिक्षा, व्यवसाय और सबसे महत्वपूर्ण रूप से जीवन की बढ़ती लागत की वास्तविकता। हमें अनिश्चितता के लिए तैयार रहना चाहिए। यही हमारी एकमात्र उम्मीद और शाश्वत सत्य है कि जीवन की तरह ही बाजार भी अनिश्चित हैं। हम तेजी से बदलती परिस्थितियों के दौर में जी रहे हैं। इसलिए आने वाले समय में और भी उतार-चढ़ाव आने की संभावना है। शोर-शराबा कम करते हुए हमें अपने निर्णयों को लेकर शांत रहना चाहिए। अक्सर, इन परिस्थितियों से आप क्या सीख सकते हैं, इस पर ध्यान केंद्रित करना बुद्धिमानी है। उदाहरण के लिए, शेयर बाजारों के पिछले एक साल के रिकॉर्ड को ही देख लें। पिछले साल इसी समय, जब चुनाव के नतीजे आने वाले थे, तो बाजार पहले तो शांत था। फिर नतीजों के कुछ दिनों बाद तक बाजार में गिरावट आई और फिर अचानक बहुत ज्यादा उछाल आया।
अगर कोई निवेशक घबरा जाता और सिर्फ चुनाव के नतीजों और उसके बाद की घटनाओं के आधार पर प्रतिक्रिया करता, तो उसे बहुत तकलीफ होती। फिर सितंबर, 2024 से फरवरी, 2025 के बीच विदेशी निवेशक (एफआईआई) बाजारों में शुद्ध विक्रेता थे, और प्रतिक्रिया में शेयर बाजार गिर गए। वास्तव में, अगर कोई जुलाई, 2024 से अब के बीच बाजार में प्रवेश करता, तो उसे नुकसान होता। इसी तरह, भारत-पाकिस्तान युद्ध और उसके नतीजों ने बाजारों और निवेशकों में तनाव पैदा कर दिया है। हमारे सामने ऐसी स्थिति है, जहां लोग डरे हुए हैं और यह उनके निवेश पर उनकी प्रतिक्रिया से पता चलता है। सात से 12 मई के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव आया और यह उतार-चढ़ाव जारी है, जिससे निवेश के लिए नए लोगों में घबराहट पैदा हो रही है। अगर आप लंबी अवधि, जैसे कि 20-30 साल या उससे ज्यादा की अवधि को देखें, तो शेयर की कीमतें और शेयर बाजार अल्पावधि में ज्यादा प्रतिक्रिया कर सकते हैं। निवेशकों की भावनाएं सामने आ सकती हैं और शेयर की कीमतें कंपनी की वास्तविक कीमत से दूर जा सकती हैं। एक निवेशक के तौर पर आपको यह समझने की जरूरत है कि कीमत और मूल्य के बीच का अंतर निवेशकों के लिए जरूरी है।
आपको पता होना चाहिए कि एक ही बाजार या खास शेयर कब निवेश के लिए सस्ते होते हैं। इसे बिक्री के तौर पर सोचें, कीमतें गिरती हैं और लोग त्योहारी बिक्री के मौसम में खरीदारी करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप कुछ भी खरीदें, तो यह आपके लिए अनुकूल होगा। जिस तरह से सुपरमार्केट में बिक्री अक्सर खराब गुणवत्ता वाली चीजों के साथ होती है, उसी तरह आप ऐसे स्टॉक खरीद सकते हैं, जो सस्ते हैं, क्योंकि उनका व्यवसाय खराब है, इसलिए नहीं कि उनका मूल्य सस्ता है। दूसरा, बड़ा सबक यह है कि अपने निवेश को समग्र रूप से देखें-बचत जमा, सोना, रियल एस्टेट, स्टॉक इत्यादि में पैसा लगाएं। जिस तरह संतुलित आहार लेना स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खनिज, विटामिन आदि का अच्छा मिश्रण हो, उसी तरह आपके निवेश को भी मिश्रण (विविधता) की आवश्यकता होती है। परिसंपत्ति आवंटन का सिद्धांत एक निवेश पोर्टफोलियो के निर्माण का आधार है। अपनी जोखिम लेने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के आधार पर, आप निवेश साधनों की एक टोकरी चुन सकते हैं।
केवल स्टॉक या एफडी या सिर्फ अचल संपत्ति पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करें। आपको अनिश्चितता के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। कभी ऐसा भी हो सकता है, जब शेयर बाजारों में आपके निवेश का मूल्य कम हो जाएगा। कुछ महीनों से लेकर एक साल के भीतर वे 20-30 फीसदी तक गिर भी सकते हैं। शांत रहने और अपने निवेश और निवेश लक्ष्य से निराश न होने की आपकी क्षमता ऐसे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अनिश्चितता के कारण एक और परिदृश्य भी सामने आता है-शेयर कीमतों और बाजारों में तेज उछाल। ऐसे में निवेशकों को बहकना नहीं चाहिए, क्योंकि कीमतें अस्थिर स्तरों तक बढ़ सकती हैं, जैसा कि हमने 1990 के दशक के अंत में डॉटकॉम बुलबुले में या 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 2004 और 2009 के बीच कमोडिटी और रियल एस्टेट बूम के दौरान देखा था। स्मरण रहे कि सभी निवेशों का मूल्य गिर और बढ़ भी सकता है, इसलिए आप जितना निवेश करेंगे, उससे कम भी वापस मिल सकता है।
बाजार में उतार-चढ़ाव कोई असामान्य बात नहीं है। गिरते बाजारों को एक अवसर के रूप में सोचें और इस बात से सावधान रहें कि ऐसा होने पर बाजार क्यों बढ़ रहे हैं। मूल्य और कीमत के बीच के अंतर को समझें। यह ऐसा है, जैसे बिक्री तभी सार्थक है, जब उत्पाद का मूल्य आपके लिए सही हो। अगर आपको दस साल तक किसी शेयर को रखने में सहजता महसूस नहीं होती है, तो आपको उसे दस मिनट के लिए भी नहीं रखना चाहिए। सफल निवेशक बनने के लिए यह मानसिकता जरूरी है। हमेशा याद रखें, चलने से पहले आप कई बार गिरते हैं। वास्तव में आप खड़े होने और गिरने से पहले रेंगते रहे हैं। और जिस तरह से आपने दुर्घटना होने पर साइकिल या बाइक चलाना बंद नहीं किया, उसी तरह आपको सिर्फ इसलिए निवेश करना बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपके पोर्टफोलियो ने अल्पावधि में घाटा दिखाया है। तेज-तर्रार सुर्खियां पढ़ना या अपने निवेश के मूल्य में गिरावट देखना घबराहट पैदा कर सकता है। रास्ते में हमेशा कुछ रुकावटें आती रहेंगी, लेकिन निवेश की यही प्रकृति है।