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जख्मों के कई नाम, उनमें एक उन्नाव
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उन्नाव आत्मदाह केस
- फोटो : अमर उजाला
यह हफ्ते-दस दिन पहले की बात है। यह सब उत्तर प्रदेश में हुआ। 14 दिसंबर को उन्नाव से एक बुरी तरह से जली युवती दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल अपनी मां, भाई और बहन के साथ लाई गई। हमारे संगठन, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की नेताओं के साथ बृंदा करात अस्पताल गईं। पता चला कि युवती को उसके साथ दुष्कर्म करने वाले ने जमानत पर छूटने के बाद जला दिया था। देर रात में वह युवती मर गई।
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16 दिसंबर को कानपुर के एक अस्पताल में एक अन्य जलाई गई युवती फतेहपुर से लाई गई। उसके घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी ने उस पर तेल डालकर उसे जला दिया। हम लोगों ने उसकी मां और भाई को आश्वासन दिया कि हमारा संगठन उनकी मदद करने की कोशिश करेगा। हम वार्ड से निकल ही रहे थे कि दो खबरें मिलीं- उन्नाव के निष्कासित भाजपा विधायक सेंगर को दिल्ली के न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी और उन्नाव जिले से ही एक और जली हुई महिला अस्पताल पहुंचाई गई है। उस महिला को हम देखने गए। उसकी वैसी ही गरीब, कमजोर मां से भी मिले। उन दोनों की एक के बाद एक मौत हो गई।
इनकी न्याय की लड़ाई कहां तक पहुंचेगी, इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि सेंगर को सजा भी दिल्ली में ही मिली। लेकिन उत्तर प्रदेश की कितनी पीड़िताओं को दिल्ली में सुरक्षा और न्याय पाने का मौका मिलेगा? उनकी अपनी सरकार के मुखिया तो उनके पक्ष में एक शब्द नहीं बोलते। वह तो लोगों से बदला लेने की बात करते हैं। इन महिलाओं की मौत के बाद बड़े पैमाने पर ठुकाई का दौर चला।
पूरे देश में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन हुए। नागरिकता की परिभाषा बदलने के सरकारी प्रयास को लोगों ने स्वीकार करने से इन्कार किया। केरल में रोज प्रदर्शन हो रहे हैं। महाराष्ट्र में लाखों लोग मुंबई, भिवंडी, नागपुर, मालेगांव और अन्य जगहों में निकले। भोपाल में जबर्दस्त भीड़ जुटी। पंजाब में हजारों लोग जुलूसों में निकले। कहीं एक कंकर नहीं फेंका गया। लेकिन भाजपा-शासित राज्यों में माजरा बिल्कुल अलग था। यहां प्रदर्शनकारियों पर हमले किए गए। लाठियां बरसाई गईं और गोलियां भी चलीं।
कितने लोग आज उत्तर प्रदेश सरकार से दर्द भरे सवालों का जवाब मांग रहे हैं। जल के मरने वाली युवतियों की कमजोर, ठंड से ठिठुर रही माएं; दिल्ली में जीती हुई वह लड़की जो जीतकर भी हार गई, क्योंकि उस जीत की राह में उसे अपने बाप और मौसी तथा चाची की जानों की कीमत चुकानी पड़ी। कानपुर, लखनऊ, फिरोजाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और रामपुर में गोली खाकर मरने वाले नौजवानों की सिसक रही माएं, बिलख रही बेवाएं और अनाथ हुए बच्चे- सब सवाल पूछ रहे हैं। अब वाराणसी से खबर आई है। दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां ने पुलिस कार्यालय के सामने अपने आपको आग लगा ली, क्योंकि उनकी शिकायत की कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
एक-सी पीड़ा इन सबको एक कर रही है। उनकी एकता ही सरकार को उनकी सुनने के लिए मजबूर कर सकती है।
-लेखिका माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं।