जिंदगी छीनने वाला खेल
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पिछले दिनों मुंबई में एक चौदह साल के बच्चे मनप्रीत ने सातवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। वह बड़ा होकर पायलट बनना चाहता था। उसने खुदकुशी करने से पहले इंटरनेट पर इसकी जानकारी हासिल की थी कि छत से कैसे कूदते हैं। अपने दोस्तों को उसने बताया था कि अगले दिन वह स्कूल नहीं आ सकेगा। साथ ही छत से कूदने से पहले भी उसने दोस्तों से कहा कि अब सभी उसे बस फोटो में ही देख सकेंगे। बच्चे आम तौर पर जब ऐसा कदम उठाते हैं, तो हम चौंकते हैं। लगता है कि न जाने बच्चा किस परेशानी से गुजर रहा था कि ऐसा कदम उठाया। इतना अकेला भी क्यों था कि अपनी परेशानी किसी को बता नहीं सका।
लेकिन मुंबई में रहने वाले इस बच्चे ने परेशानी के कारण नहीं, खेल में जीतने के लिए खुदकुशी की। वह ब्लू व्हेल नाम का खेल खेल रहा था। बताया जाता है कि फाइनल राउंड में पहुंचने से पहले बच्चों को खुद को तकलीफ देकर होने वाले एडवेंचर और आनंद के लिए उकसाया जाता है। अपने ही प्रति हिंसा करनी पड़ती है, फिर इसे जीतने के लिए खुदकुशी करने को उकसाया जाता है। उससे पहले सेल्फी खींचकर अपलोड करनी पड़ती है। अब तक दुनियाभर में इस खेल के कारण ढाई सौ से अधिक बच्चे जान गंवा चुके हैं। इसमें रूस में ही एक सौ तीस जानें गई। अब तक उन्नीस देशों में बच्चे और किशोर जान दे चुके हैं।
इसमें खिलाड़ी को पहले कागज पर एक ब्लू व्हेल बनाने के लिए कहा जाता है, फिर उसे अपने शरीर पर गोदना होता है। इस खेल को खिलाने के लिए एक एडमिन होता है। खेल पचास दिन तक चलता है और एडमिन पचास दिन तक बताता रहता है कि आगे क्या करना है। खिलाड़ी को एक कोड नंबर दिया जाता है, जिसका जुड़ाव डरावनी फिल्मों और भयानक चीजों से होता है। हाथ पर ब्लेड से एफ 57 भी गोदना पड़ता है। इसकी तस्वीर अपलोड करनी होती है। हर टास्क के पूरे होने के बाद हाथ पर एक कट लगाना पड़ता है।
इस खेल को एक बार शुरू करने पर नहीं छोड़ा जा सकता। खेल शुरू होते ही एडमिन खिलाड़ी के फोन को हैक कर लेता है। अगर खेलने वाला इसे छोड़ना चाहे, तो माता-पिता को मारने तक की धमकी दी जाती है। उसे तरह-तरह से ब्लैकमेल किया जाता है।
इस अमानवीय ऑनलाइन खेल को रूस में फिलिप बुडेकिन नाम के आदमी ने ईजाद किया था। और रूस से यह दुनिया भर में जा पहुंचा। अफसोस यह है कि इतनी मौतों के बाद भी अब तक इसे किसी देश में बैन नहीं किया गया है। जब रूस में बुडेकिन को पकड़ा गया, तो उसने कहा कि जो लोग इसे खेलकर अपनी जान दे रहे हैं, वे इस धरती पर रहने और जीने के लायक नहीं थे। वे बॉयोलॉजिकल वेस्ट थे।
यह खेल 2013 में बनाया गया था। आत्महत्या का पहला मामला 2015 में सामने आया था। गेम बनाने वाला फिलिप जेल में है। उसने यह भी कहा कि यह खेल दुनिया की सफाई के लिए है। पता चला है कि ब्रिटेन में भी यह खेल लांच होने वाला है। वहां के एक स्कूल प्रिंसपल ने इस बारे में चिंता प्रकट की है और लोगों को आगाह किया है। विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक इसे डार्क वेब का एरिया कह रहे हैं। यह खुद के साथ धोखा करते हुए जबरिया जान लेने का षड्यंत्र करना सिखाता है। एक विशेषज्ञ ने कहा कि यह फिरौती वसूलने की तरह है।
अपने यहां कोलकाता में माता-पिता और स्कूल इसके खिलाफ अभियान चला रहे हैं। यदि ऐसा है, तो फौरन बच्चे को उससे अलग करें। कायदे से तो सरकार को फौरन इस पर बैन लगाना चाहिए।