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एक मुक्तिदाता की विरासत
Updated Thu, 07 Mar 2013 09:43 PM IST
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समूची दुनिया की प्रगतिशील ताकतों ने ह्यूगो शावेज के रूप में एक ऐसा करिश्माई नेता खो दिया है, जिसने पिछले दशकों में खासकर लैटिन अमेरिका में इतिहास की धारा को बदला था। उन्होंने व्यवहार में दिखाया था कि पूंजीवादी व्यवस्था के दायरे में भी नव उदारवाद की आर्थिक नीतियां उनके समाजवादी कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने का विकल्प हो सकती हैं। और उन्होंने यह अमेरिका के पिछवाड़े में कर दिखाया था।
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अमेरिकी वर्चस्ववाद को विचारधारात्मक सतह पर भी उन्होंने चुनौती दी और आर्थिक सतह पर भी। उनका विश्वास था कि वह जिन जनहितकारी नीतियों को लागू कर रहे थे, वे समाजवाद की ओर ले जाएंगी। अंतिम सांस तक वह क्यूबाई क्रांति और उसकी उपब्धियों से प्रेरणा ले रहे थे।
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ह्यूगो शावेज ने मिसाल कायम करके लैटिन अमेरिका में राजनीतिक प्रक्रियाओं पर गहरा असर डाला था। इसी कारण तमाम दक्षिण अमेरिकी देशों में साम्राज्यवाद-विरोधी जन उभार सामने आया। बोलीविया में इवो मोरालेस की जीत ने खास तौर पर शावेज के हाथ मजबूत किए थे, तो क्यूबा के साथ मिलकर उन्होंने लैटिन अमेरिका के मूलगामी प्रगतिशील रूपांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था। इसका नतीजा इन देशों के चुनावों में प्रगतिशील और साम्राज्यवाद-विरोधी ताकतों की जीत के रूप में बार-बार सामने आया।
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शावेज ने विश्व व्यापार संगठन, पर्यावरण परिवर्तन मंच जैसे प्लेटफॉर्म पर विकसित देशों के बोलबाले के खिलाफ लड़ाई के लिए विकासशील देशों को गोलबंद करने में सक्रिय भूमिका अदा की थी और ब्रिक्स, इब्सा, नाम आदि विकासशील देशों के संगठनों के स्तर पर उनसे सक्रिय रूप से सहयोग किया था।
वेनेजुएला का राष्ट्रपति चुने जाने के तत्काल बाद शावेज ने संविधान सभा के चुनाव के लिए कदम उठाए, ताकि एक जनहितकारी संविधान तैयार किया जा सके। वंचित तबकों को अधिकार संपन्न बनाने वाले इस बोलीवरीय संविधान से लैस होकर शावेज अपनी जनता की जिंदगी संवारने के काम में जुट गए। इस सिलसिले में महत्वपूर्ण काम उन्होंने यह किया कि वेनेजुएला के तेल व गैस उत्पादन का राष्ट्रीयकरण कर दिया। यानी उन्होंने देश की तेल उत्पादक कंपनी से आने वाला पैसा विभिन्न समाज कल्याण कार्यक्रमों की ओर मोड़ दिया।
जब अमीर कारोबारी घरानों ने, जिनकी आर्थिक ताकत का मुख्य स्रोत ही अब सूख गया था, हताशा में तोड़फोड़ का रास्ता अपनाया, तब शावेज ने सत्ता के पक्ष में मजदूरों को गोलबंद किया। यह जनता के बीच शावेज की लोकप्रियता का ही कमाल था कि उनका तख्तापलट करने की साजिश रचने वालों को अपने पांव पीछे खींचने पड़े और उन्हें दोबारा राष्ट्रपति बनाया गया।
संवेदनहीन नौकरशाही के शिकंजे को तोड़ने और भागीदारीपूर्ण जनतांत्रिक व्यवस्था के तहत जनता की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए शावेज ने विशेष कार्यक्रम तैयार किए, जिन्हें ‘मिशन’ का नाम दिया गया। साधारण नागरिकों की चिंता के विभिन्न क्षेत्रों को लेकर ऐसे 19 से ज्यादा मिशन शुरू किए गए, जिनका स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्रों में जबर्दस्त असर दिखाई दिया। 2006 तक वेनेजुएला से निरक्षरता पूरी तरह मिटाई जा चुकी थी।
समाजवादी क्यूबा ही लैटिन अमेरिका का दूसरा ऐसा देश है, जो इस लक्ष्य को हासिल कर पाया है। क्यूबा के डॉक्टरों की मदद से शावेज ने अपने नागरिकों लिए बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित कीं। इन मिशनों के माध्यम से ही उन्होंने सुनिश्चित किया कि खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों के दौर में भी आम जनता को सस्ता अनाज हासिल हो। पिछले ही साल वेनेजुएला सरकार ने एक क्रांतिकारी कानून बनाकर मजदूरों को बहुत सारे अधिकार दिए थे। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि सुधार लागू करने तथा भूमि इजारेदारी को तोड़ने के लिए भी शावेज ने कदम उठाए थे।
भूस्वामी वर्ग के भारी विरोध के बावजूद उन्होंने भूमि सुधार कानून लागू कराया था। उन्होंने यह सच्चाई पहचानी थी कि आवास की कमी और अपराध, दो ऐसी गंभीर समस्याएं हैं, जिनका वेनेजुएला को सामना करना पड़ रहा था। नौकरशाही के असहयोगपूर्ण रवैये को भांपकर ही वह इसका रूपांतरण करना चाहते थे, ताकि इसे वंचित तबकों के हितों के अनुकूल ढाला जा सके।
शावेज की बराबर यह कोशिश रहती थी कि विकासशील देशों के बीच रिश्ते बढ़ें। अमेरिका ने 'प्लान कोलंबिया' के नाम से समूचे लैटिन अमेरिका पर नव उदारवादी आर्थिक नीतियां थोपने की योजना बनाई थी। इसकी काट के लिए शावेज ने क्यूबा के साथ मिलकर लैटिन अमेरिका के लिए बोलीवरीय विकल्प को आगे बढ़ाया था। दक्षिण अमेरिकी देशों के आपसी रिश्ते को मजबूती देने के लिए विकासशील दुनिया के बैंक की स्थापना और समूचे क्षेत्र के लिए एक ही मुद्रा चलाना उनका सपना था।
साम्राज्यवाद और वित्तीय पूंजी की तीखी आलोचना और विकासशील देशों के संसाधन हथियाने के लिए अमेरिका द्वारा छेड़े गए युद्धों की तीव्र भर्त्सना संयुक्त राष्ट्र में उनके उस चर्चित भाषण में भी सामने आई थी, जो उन्होंने जॉर्ज बुश के फौरन बाद दिया था! अपने भाषण में साम्राज्यवाद को शैतान करार देते हुए उन्होंने इस विश्व मंच से विश्व व्यवस्था को जनतांत्रिक बनाए जाने के लिए आवाज उठाई थी।
शावेज की विरासत एक ऐसी पूंजी है, जो दुनिया भर में साम्राज्यवाद-विरोधी जन उभारों को प्रेरित करती रहेगी। ये बढ़ते संघर्ष ही विश्व जनगण के विशाल बहुमत के मुक्तिदाता के रूप में समाजवाद की शावेज की कल्पना को जमीन पर उतरना सुनिश्चित करेंगे। इन संघर्षों को मजबूती देने की कोशिश ही शावेज के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।