फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   kusum khemani book

भूगोल में घूमती कुछ यादें

Sat, 08 Jun 2013 10:23 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Sat, 08 Jun 2013 10:23 PM IST
विज्ञापन
kusum khemani book

‘कमर बांध लो घुमक्कड़ों, दुनिया तुम्हारे स्वागत के लिए बेकरार है।’ हिंदी यात्रा साहित्य में अहम योगदान देने वाले राहुल सांकृत्यायन अक्सर यात्रा प्रेमियों को यही संदेश दिया करते थे।

विज्ञापन


वह कहते थे, घुमक्कड़ी सिर्फ व्यक्ति के मन को ही मुक्त नहीं करती, बल्कि उसकी सोच को भी विस्तार देती है। देश और दुनिया के तमाम खूबसूरत शहरों की यात्रा के बाद हुए सोच के इसी विस्तार को कुसुम खेमानी ने अपनी किताब ‘कहानियां सुनाती यात्राएं’ में दर्ज किया है।
विज्ञापन


देखा जाए तो लिखना भी एक तरह की यात्रा ही है। कुसुम खेमानी की किताब में इस लेखन यात्रा को हिंदुस्तान के हरिद्वार, हैदराबाद, गोवा, कलकत्ता, कश्मीर और शिलांग से लेकर विदेश के मिस्त्र, मास्को, वैंकूवर, भूटान, स्विटजरलैंड, बर्लिन और डर्बन जैसे कई पड़ाव मिलते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन किताब शुरू होती है एक कविता से। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता, ‘तुम एक यात्रा हो-जहां कुछ छूटने का अर्थ कुछ मिलना है, जहां हर थकान एक नई स्फूर्ति है जहां हर अनुभूति ईश्वर की मूर्ति है।’


इस किताब की खास बात है कि यह आपको सिर्फ यात्रा के भूगोल से ही परिचित नहीं करवाती, बल्कि उसके इतिहास के बारे में भी बताती है। नई पीढ़ी के पाठकों को किताब की भाषा थोड़ी जटिल लग सकती है, लेकिन शब्दों की तारतम्यता और किस्सागोईनुमा शैली किताब को सार्थकता देती है।

कहानियां सुनाती यात्राएं
लेखिका- कुसुम खेमानी
राधाकृष्ण प्रकाशन लिमिटेड
मूल्य- 400 रुपए

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed