फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Kota student suicides issue need change in mindset of society and regulation of coaching institutes

परिदृश्य: अपेक्षाओं में दबी सपनों की आवाजें, इस माहौल को बदलने की दरकार

Thu, 28 Dec 2023 07:18 AM IST
Priyank Sharma प्रियांक शर्मा
Updated Thu, 28 Dec 2023 07:18 AM IST
विज्ञापन
सार
2023 में कोटा में करीब 28 छात्रों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा समाज के अपेक्षा-आधारित माहौल को बदलने की मांग करता है। कोचिंग संस्थानों का विनियमन किया जाना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है अभिभावक और समाज की तरफ से पड़ने वाले दबाव को कम करना।
loader
Kota student suicides issue need change in mindset of society and regulation of coaching institutes
सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : Demo pic

विस्तार

राजस्थान का कोटा शहर मशहूर है अपने कोचिंग संस्थानों के लिए, जो जेईई और नीट जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को तैयार करते हैं। लेकिन यहां के एक परेशान करने वाले आंकड़े की गूंज 2023 में देश भर में सुनाई दी, जो युवा दिमागों पर शैक्षणिक दबाव के कष्टदायक असर की भी याद दिलाते हैं। सिर्फ 2023 में शहर में करीब 28 छात्रों ने आत्महत्या की, जो इसका प्रतीक है कि उच्च प्रतिस्पर्धी माहौल में युवाओं के सपने किस तरह अक्षम्य वास्तविकता से टकराते हैं। यह आंकड़ा कोचिंग संस्थानों की पारिस्थितिकी में निहित जटिलताओं को रेखांकित करता है और बताता है कि ये कैसे देश की शैक्षिक व्यवस्था में गुंथी हुई हैं।


भारत में ज्यादातर 12वीं  कक्षा के छात्रों की कहानी सिर्फ दो महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में सफलता की खोज तक सीमित है। विशिष्ट इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए जेईई और प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के लिए नीट परीक्षा। उम्मीदवारों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच भारी असमानता, जो दस फीसदी से भी कम है, इन परीक्षाओं में प्रतिस्पर्धा को कई गुना बढ़ा देती है। इससे एक ऐसे माहौल को बढ़ावा भी मिलता है, जहां दबाव पनपता है और छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।


पिछले कई वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि कोटा के प्रेशर कुकर माहौल में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं में किस तरह वृद्धि हुई है। 2022 में 15, 2019 में 18 और 2018 में 20 छात्रों ने आत्महत्या की थी। इस उच्च जोखिम वाले परिदृश्य के बीच राज्य की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं। अपेक्षाकृत कमजोर वर्ग के बच्चों को कोचिंग देने के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों के साथ सहयोग अनजाने में इन पृथक केंद्रों के अस्तित्व और कथित जरूरत को मजबूत करता है, जिससे युवाओं के दिमाग पर तनाव और बढ़ता जाता है।

नए वर्ष की शुरुआत हमें आत्मनिरीक्षण और पुनर्मूल्यांकन का अवसर दे रही है। कोचिंग संस्थानों का विनियमन किया जाना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है अभिभावक और समाज की तरफ से पड़ने वाले दबाव को कम करना, जो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार भी छात्रों को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का सबसे बड़ा कारण है।

'प्रत्येक बच्चा अद्वितीय है', का मंत्र केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, इसे सामाजिक व्यवहार का आधार बनाने की जरूरत है। इसके लिए जरूरी है कि एक समावेशी शैक्षिक परिदृश्य का निर्माण हो, ताकि छात्रों पर बेवजह दबाव न हो। वर्ष 2024 की शुरुआत ऐसे शैक्षिक वातावरण को बनाने के संकल्प से होनी चाहिए, जिसमें विविध प्रतिभाओं को पनपने का अवसर मिल सके और हर बच्चा अपनी विशिष्टता के अनुसार कॅरिअर का चुनाव कर सके। यह महत्वपूर्ण क्षण एक परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत का भी समय होना चाहिए, जिसमें शिक्षा कुछ प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की संकीर्ण सीमाओं को पार करती हो, क्योंकि ऐसा होने पर ही शिक्षा अपने वास्तविक उद्देश्य में खरी उतर पाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed