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ओहाका की राह पर हरे कीड़े

Sat, 12 Oct 2013 08:14 PM IST
कैलाश वाजपेयी
कैलाश वाजपेयी Updated Sat, 12 Oct 2013 08:14 PM IST
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विदेश में कबीर साहित्य के दो ही विद्वानों का सान्निध्य हमें अब तक मिला है। इनमें पहली थीं मादाम वोदवील, जिनसे बातचीत करने का सुअवसर हमें साठ के दशक में मिला था। दूसरे हैं, डेविड लारेजेन जो मेक्सिको में हमारे ही सहकर्मी थे और जिनके साथ वर्षों तक निगुण-सगुण भक्ति पर चर्चा हुआ करती थी। बीच-बीच में कभी जब प्रो. पंचनाड़ीकर अपने कक्ष से निकलकर बाहर आते थे तो वह महाराष्ट्र के बारकरी संप्रदाय पर भी हम दोनों का ध्यान आकृष्ट करते थे।

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एक दिन जब हम कालेगियो के कॉफी हाउस में थे, डेविड ने बताया कि मेक्सिको से कोई दो सौ किलोमीटर दूर एक छोटी सी बस्ती है जिसका नाम है 'ओहाका' । यहां माया संस्कृति के कुछ ऐसे गिने-चुने परिवार रहते हैं, जिन्होंने स्पेन से आए विजेताओं के समक्ष समर्पण नहीं किया। जब उन्होंने कैथोलिक बनने से इंकार कर दिया तब हारकर उन्हें एक ही स्थान पर बसा दिया गया। मेक्सिको से दूर माया पुरोहितों की छत्रछाया में ये चार-पांच सौ परिवार अपनी पारम्परिक जीवन पद्धति का अनुसरण करते हुए, प्रत्युष बेला में सूर्य की अभ्यर्थना में, ऋचाओं का पाठ करते हैं।
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इन सभी की भाषा नाहुआत्ल nahuatle है। पास खड़े एक अन्य सहयोगी ने यह भी कहा कि माया पुरोहितों की साधना शैली, भारत के जैनाचार्यों का स्मरण दिलाती है, जिनकी माला सूत की होती है। ऋतुकाल के दिनों में स्त्रियां, निराहार रहकर किसी गुह्य-मंत्र का अहर्निश पाठ करती रहती हैं। वृद्धावस्था आते-आते उनके शरीर में जो रासायनिक परिवर्तन होते हैं, उनका परिणाम यह होता है कि किसी भी बाहर से आए विजातीय प्राणी को वह अपनी मंत्रशक्ति से मेमना या बकरा बना डालने की विद्या में निष्णात हो जाती हैं। यह सारा विवरण सुनकर हमारे मन में यह इच्छा जागी कि क्यों न ओहाका जाकर माया संस्कृति के इन शेष बचे लोगों से संपर्क साधा जाए।
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हमारी शिष्या ओलीविया जो यह सब सुन रही थी पहले तो इस पक्ष में नहीं थी कि हम यह जोखिम उठाएं, इसलिए कि ओहाका में बसे ये लोग स्पेनिश बोलते नहीं हैं। मगर हमारी उत्सुकता को परखते हुए उसने वायदा किया कि वह यह पता करेगी कि किसे 'नाहुआत्ल' भाषा आती है। दूसरे दिन कक्षा में मार्था, निकोल, खोखे, फैदरिको आदि विद्यार्थी तो आए, लेकिन ओलीविया नहीं आयी। अगले दिन प्रो. पंचनाडीकर की क्लास थी और तब जब हम अपने अध्ययन कक्ष में द प्रोफेट आउटकास्ट पढ़ने में तल्लीन थे, तभी ओलीविया ने दरवाजा खोलते हुए कहा- 'मे आई कम इन'।

हमने 'सी कोमो नो' कहकर उसे आने दिया। ओलीविया ने बताया कि मेक्सिको सिटी के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पोलीस एकमात्र वह प्राणी हैं जिन्हें नाहुआत्ल भाषा आती है। आप कहें तो उनके विशालकाय बंगले पर शनिवार की शाम आपको उनके यहां आमंत्रित करने का इंतजाम करूं। शनिवार की शाम आई.जी. पुलिस के बंगले की ओर ले जाते हुए ओलीविया ने बताया, 'सर! यहां मेक्सिको में जेल की सजा काटकर आए हुए ज्यादातर कैदियों को पुलिस में भर्ती कर लिया जाता है।' 'खग जाने खग ही की भाषा' के सिद्धांतानुसार ऐसे दागी पुलिस अधिकारी, अन्य बदमाशों को पकड़ने में ज्यादा सिद्धहस्त होते हैं। आई.जी. पुलिस का बंगला काफी बड़ा था। पीछे बहुत बड़ा लॉन था, जिसमें कई पेड़ थे। आई.जी. महोदय अभी घर नहीं लौटे थे, उनकी पत्नी ने पूछा हम 'कार्ता ब्लांका' लेंगे या 'तकीला'? हमारे मना करने पर उन्होंने हमें कोकाकोला देते हुए कहा, 'रसोईघर में आओ'।

ओलीविया के साथ हम रसोईघर में घुसे ही थे कि होश फाख्ता हो गए। सामने खाल उधड़े तीन पशु एक भेड़, एक बकरा, और सुअर उलटे टंगे थे। हमने झिड़कते हुए ओलीविया से कहा, 'तुमने यह क्यों नहीं बताया कि हम शाकाहारी हैं।' ओलीविया ने क्षमा मांगते हुए मालकिन को फर्राटेदार स्पेनिश में पता नहीं क्या समझाया। इसी बीच मालकिन ने परिचारिका को हल्के स्वर में देर तक पता नहीं क्या सुझाया। फिर हमें बाहर लाकर खाने की मेज पर बैठाते हुए, ओलीविया को किसी संकटपूर्ण घड़ी का संदर्भ और उससे पैदा हुई पेचीदगी का जिक्र करते हुए कहा, 'आईजी साहब घर आ ही नहीं पायेंगे।'


इस बीच नौकरानी प्लेटों में हरे रंग की तली लोबिया की फली लाई। हम खुश कि कैसा दुर्लभ संयोग है, मगर यह क्या! जैसे ही चम्मच से दो-तीन उठाईं, आंखों को साफ दिख पड़े एक-एक सूत के बराबर मुड़े-पतले पैर। यह तो हरी फली नहीं हैं, कीड़े हैं। आई.जी. साहब की पत्नी ने कहा कि अभी-अभी पीछे के पेड़ों से झरिया कर गिराये गए हैं। शाकाहारी के नाम पर तलकर लाए हैं ये कीड़े। हम इन्हें अक्सर खाते हैं। पाले ही गए हैं ये इसलिए। हमने माथा पीट लिया। मालकिन ओलीविया पर खासी नाराज हुईं, 'कहां का जंगली गुरु पकड़ लाई है।' अंत में हमारे लिए ताकोस-तमालेस आदि मंगाए गए। कान पकड़कर हम जैसे-तैसे एक दो ताकोस खाकर ऊपर वाले को याद करते हुए वापस आए।

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