फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   journey After uttrakhand tragedy

टूटन और बिखराव की दवा चाहिए

Sun, 11 Aug 2013 06:07 PM IST
शंभूनाथ शुक्ल
शंभूनाथ शुक्ल Updated Sun, 11 Aug 2013 06:07 PM IST
विज्ञापन
journey After uttrakhand tragedy

उत्तरकाशी से गंगोत्री तक की दूरी करीब 100 किलोमीटर की है, पर सड़क उत्तरकाशी से पांच किमी आगे बढ़ते ही गंगौरी से खत्म हो जाती है। यानी लगभग 94 किमी की सड़क भागीरथी के तेज प्रवाह अथवा ऊपर से गिरे पत्थरों ने नष्ट कर दी है।

विज्ञापन


एनएच-108 का गंगौरी के आगे नामोनिशां नहीं है। सीमा सड़क संगठन वाले दिन में जितने रास्ते बनाते हैं, रात की तेज बारिश उसे फिर खत्म कर देती है। पर्यटन ठप है। होटलों में ताले पड़े हैं और पूरा का पूरा उत्तराखंड प्रकृति की इस मार से हतप्रभ है।
विज्ञापन


यह वह सीजन है, जब यहां तिल धरने की जगह नहीं मिला करती थी। सावन शुरू होते ही गंगोत्री से गंगाजल ले जाने वालों में ऐसी होड़ मचती थी कि ऋषिकेश से गंगोत्री तक का पूरा पहाड़ी मार्ग गेरुए वस्त्र धारी कांवड़ियों से भरा रहता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर इस बार प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि अच्छे से अच्छा शिवभक्त भी हरिद्वार या ऋषिकेश से आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।

आपदा के बाद से पूरे उत्तराखंड का वाणिज्य चौपट है। टैक्सी वाले रो रहे हैं और होटल वाले ताला डाल कर नीचे चले गए हैं। रमेश नौटियाल उत्तराखंड हादसे के पहले तक ऋषिकेश से उत्तरकाशी तक टैक्सी चलाते थे। पर अब बस उनकी सेवा दो-चार किमी की हो पाती है।

दुखी होकर कहते हैं, ′पता नहीं किसकी नजर लग गई हमारे उत्तराखंड को।′ ऋषिकेश से जब हम आगे बढ़े थे, तब व्यस्त रहने वाले एनएच-108 का सन्नाटा देखकर ही लग गया था कि अब यहां पर्यटन के वास्ते कोई नहीं आएगा।

चंबा तो सही सलामत हम पहुंच गए, लेकिन धारकोट के पास एक ट्रक मलबे में ऐसा दबा था कि पैदल यात्री ट्रक के ऊपर से होकर गुजर रहे थे। हमें चंबा ही रुकना पड़ा और अगले दिन दोपहर तक वह ट्रक निकाला जा सका।

हम तीसरे दिन ही उत्तरकाशी पहुंच पाए, जो कि ऋषिकेश से मात्र 184 किमी. दूर है। उत्तरकाशी से हम गंगौरी पहुंचे, जहां सबसे ज्यादा विनाश हुआ था। गंगौरी पुल जिसके जरिये असी गंगा पार करते हैं, इस कदर टूट चुका था कि बस पैदल किसी तरह उस पर चल सकते थे।

असी गंगा की तेज धार किनारे बने एक तिमंजिले मकान के ऊपर की दोनों मंजिलें बहाव में ले गई और पहली मंजिल किनारे पर ही रह गई। यहीं पर गंगोत्री से आई भागीरथी में असी गंगा का संगम होता है। हम जैसे ही आगे बढ़े हरहराती भागीरथी के तेज प्रवाह में मीलों तक एनएच-108 का अता-पता नहीं था।

नैताला हमारा आखिरी पड़ाव था। गंगा से काफी ऊंचाई पर बसे नैताला में बहुत सारे गेस्ट हाउस हैं और गंगोत्री जाने वाले यात्री बजाय उत्तरकाशी के यहीं पर रुकना पसंद करते हैं, क्योंकि एक तो यहां शोर-शराबा नहीं है और दूसरा भागीरथी का सुरम्य तट यहां पर्यटकों को लुभाता है।

अगले दिन हम भटवारी पहुंचे, जहां इक्का-दुक्का कांवड़िए मिले, जो शायद रोक लगने के पहले किसी तरह यहां आ गए थे। दिल्ली से 22 जुलाई को चले थे और 29 की सुबह हम गंगोत्री पहुंचे।

बाजार लगभग बंद था। तीन परचून की दुकानें तथा दो प्रसाद की दुकानें और एक ढाबा खुला था। कुछ यात्रियों की गाड़ियां वहां जरूर खड़ी थीं। यात्री तो आईटीबीपी और सेना की मदद से निकाल लिए गए पर गाड़ियां वहीं खड़ी हैं। कुछ पंडे व श्री पांच मंदिर समिति गंगोत्री के कुछ कर्मचारी और साधुओं समेत करीब डेढ़ सौ लोग वहां थे।

फिर भी मंदिर में पूजा-पाठ चल रहा था। गंगोत्री की यात्रा के बहाने हमने हादसे के बाद के उत्तराखंड को करीब से देखा और पाया कि उत्तराखंड का 17 जून का हादसा अब तक के भारत में आए किसी भी हादसे से ज्यादा भयंकर और त्रासद था।

इस पहाड़ी राज्य को उस हादसे से उबरने के लिए एक-दो नहीं लगभग दस साल लग जाएंगे।

उत्तराखंड सरकार के पास अब इतनी इच्छा शक्ति भी नहीं है कि वह राज्य को हादसे से उबार कर इसका पुनर्निर्माण करा सके। बाकी देश के लोग इतनी दहशत में हैं कि वे आने वाले चार-पांच वर्षों तक उत्तराखंड यात्रा का मन नहीं बनाएंगे और यहां के लोगों की पीड़ा यह है कि आईटीबीपी और सेना ने परप्रांतीय लोगों को निकालने की मंशा तो जताई पर स्थानीय लोगों के प्रति उनका व्यवहार सौतेला रहा।


महज 15 किलो गेहूं, 15 किलो चावल, पांच किलो दाल और सौ-सौ ग्राम मसाले बांटकर सरकार अपना दायित्व पूरा कर रही है। वह तो गुजरात सरकार की राहत अगर नहीं आती तो शायद उत्तराखंड सरकार अपने लोगों को राहत भी नहीं बांट पाती।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed