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बॉलीवुड ने अब तक कितने जेम्स बांड तैयार किए?

Fri, 04 Dec 2015 06:39 PM IST
दिनेश श्रीनेत/अमर उजाला, दिल्ली
दिनेश श्रीनेत/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 04 Dec 2015 06:39 PM IST
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james bond and his popularity in indian film industry

जेम्स बांड की नई फिल्म को लेकर आम दर्शकों में उत्सुकता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भारत में इसकी रिलीज डेट इसलिए रोक दी गई क्योंकि उसी समय सलमान की फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' रिलीज होने वाली थी। दरअसल पिछले 10-15 सालों में जेम्स बांड की भारत में अपनी एक फैन फॉलोइंग बन चुकी है।

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1973 में रोजर मूर के आने के बाद बांड की फिल्मों ने भारतीय दर्शकों में दिलचस्पी जगानी शुरु की। वीडियो कैसेट आने के बाद इन फिल्मों ने भारतीय दर्शकों को घरों में उसके जरिए घुसपैठ की और 'लिव एंड लेट डाइ', 'डायमंड्स आर फॉरएवर' व 'द मैन विथ द गोल्डेन गन' जैसी फिल्मों के वीडियो कैसेट 80 और 90 के शुरुआती दशकों में खूब देखे गए। फिल्म 'आक्टोपसी' की तो काफी शूटिंग भारत में हुई थी और कबीर बेदी फिल्म के मुख्य खलनायक थे।
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पियर्स ब्रासनन के आते-आते बांड की फिल्में बाकायदा भारत में धूम-धाम के साथ रिलीज होने और दर्शकों की भीड़ बटोरने लगीं। बांड का किरदार शीतयुद्ध की उपज है। जिस वक्त बांड की फिल्मों ने भारतीय दर्शकों के दिलो-दिमाग पर असर डालना शुरु किया तो देश दो-तीन युद्धों से गुजर चुका था। उसकी जमीन पर पॉपुलर कल्चर ने हमारे अपने नायक और खलनायक तैयार कर दिए थे। अक्सर जासूसी उपन्यास में चीनी वैज्ञानिकों की साजिशों से भरे होते थे। सत्तर के दशक में ही उर्दू के कथाकार कृश्न चंदर तक ने जेम्स बांड जैसे एक किरदार को लेकर बेहद खूबसूरत उपन्यास 'हांगकांग की हसीना' लिख डाला।
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बॉलीवुड ने जेम्स बांड जैसा किरदार बनाने की कोशिश की मगर ज्यादातर मामलों में वह बांड फिल्मों की मूर्खतापूर्ण नकल बनकर रह गईं। सबसे पहली कोशिश ट्रिक फोटोग्राफी में महारत रखने वाले निर्देशक-फोटोग्राफर रविकांत नागाइच ने की। उन्होंने जितेंद्र के साथ एक फिल्म 'फर्ज' बनाई। इसमें जितेंद्र ने जेम्स बांड जैसे एक किरदार एजेंट 116 का रोल निभाया था। संयोग से यह फिल्म सुपरहिट हुई और इससे जितेंद्र के कॅरियर को भी काफी सहारा मिला। जीतू ने इस फिल्म के जरिए टाइट फिटिंग वाली पैंट, सफेद जूते और टी-शर्ट को एक फैशन ट्रेंड में बदल दिया।

नागाइच ने इसके बाद एजेंट 116 को लेकर दो और फिल्में बनाईं- 'कीमत' और 'रक्षा'। 'कीमत' में एजेंट 116 बने थे धर्मेंद्र और रक्षा में दोबारा जितेंद्र सामने आए। रवि नागाइच ने ही बाद में मिथुन चक्रवर्ती को लेकर 'सुरक्षा' और 'वारदात' फिल्में बनाईं। इसमें उन्होंने गन मास्टर G-9 को प्रस्तुत किया था। 'सुरक्षा' हिट रही मगर 'वारदात' फ्लॉप हो गई। दोनों ही फिल्मों में एजेंट की मुठभेड़ देश को तबाह करने की साजिश रच रहे एक सनकी वैज्ञानिक से होती है। एक तरफ जितेंद्र जहां अपने चॉकलेटी चेहरे के चलते रोजर मूर का विकल्प लगते थे, धर्मेंद्र की ही-मैन वाली छवि सीन कॉनरी की याद दिलाती थी।

धर्मेंद्र सीधे जेम्स बॉड जैसे जासूस तो नहीं बने मगर 'फर्ज' के सुपरहिट होने के बाद रामानंद सागर 1968 में 'आंखें' फिल्म लेकर आए। यह 'फर्ज' के मुकाबले काफी बड़े बजट की फिल्म थी और इसे कई इंटरनेशनल लोकेशन पर शूट किया गया था। अपनी भव्यता, खूबसूरत लोकेशंस और मधुर गीत-संगीत के कारण यह फिल्म उस साल ही सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म बन गई। 'फर्ज' के मुकाबले रामानंद सागर ने 'आंखें' पर काफी मेहनत की थी और यह स्पाई थ्रिलर एक क्लासिक बन गया।

एक और निर्देशक प्रमोद चक्रवर्ती ने धर्मेद्र के साथ 'जुगनू' और 'आजाद' फिल्में बनाईं जिनके कुछ दृश्य जेम्स बांड की फिल्मों से प्रेरित थे। रमेश सिप्पी की 'शान' का खलनायक और उसका अत्याधुनिक अड्डा भी पुराने दौर की जेम्स बांड की फिल्मों की याद दिलाता था। राजीव राय ने सन 2004 में अर्जुन रामपाल को लेकर 'असंभव' फिल्म बनाई। जिसमें वे भारतीय सेना के स्पेशल एजेंट बने थे। यह एक औसत फिल्म थी जिसकी न तो कोई खास चर्चा हुई और न यह बॉक्स ऑफिस पर चली।


नई पीढ़ी में सैफ अली खान एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं जिनकी दिलचस्पी जेम्स बांड जैसा किरदार निभाने में दिखती है। उन्होंने श्रीराम राघवन के साथ 'एजेंट विनोद' में काफी मेहनत की मगर फिल्म चली नहीं। सैफ इस फिल्म को लेकर इतने उत्साहित थे कि फिल्म रिलीज होने से पहले ही इसके सीक्वल के बारे में सोचना शुरु कर दिया था। इतना ही नहीं वेस्टलैंड पब्लिशर के साथ उन्होंने इस किरदार पर एक कॉमिक्स भी निकाली। मगर फिल्म बेअसर रही। इसके बाद वे कबीर खान के साथ 'फैंटम' लेकर आए मगर यह फिल्म भी बड़ी मुश्किल से अपनी लागत निकाल पाई।

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