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बदले की राजनीति में उलझते जगन

Sat, 07 Dec 2019 02:52 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Sat, 07 Dec 2019 02:52 AM IST
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Jagan is entangled in the politics of revenge
जगन मोहन रेड्डी - फोटो : a

अांध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी ने भारी बहुमत से चुनाव जीतने के बाद ही धमाकेदार शुरुआत की और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के मुखिया चंद्रबाबू नायडू को राजनीति के हाशिये पर ला दिया। जगन मोहन की शुरुआत अच्छी थी, लेकिन वह प्रशासन और राजनीति, दोनों मोर्चे पर चंद्रबाबू विरोधी के रूप में ही सामने आ रहे हैं। शुरुआती छह महीनों में तो जगन मोहन रेड्डी के फैसलों ने उनकी छवि खराब ही की है। वाईएसआर कांग्रेस की सरकार के पास काम करने के लिए अभी साढ़ चार साल बचे हुए हैं। लेकिन जगन मोहन का रवैया एकदम साफ है। वह राजनीतिक रूप से तेदेपा को किनारे कर देना चाहते हैं। आगामी नौ दिसंबर से शुरू होने वाले राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तूफानी होने की आशंका है। जाहिर है, यह सत्र राज्य में वाईएसआर कांग्रेस सरकार की छवि और भावी प्रशासन के बारे में बहुत कुछ तय कर देगा। जगन रेड्डी ने चंद्रबाबू नायडू द्वारा लिए गए सभी फैसलों को तेजी से निरस्त करने का निर्णय लिया। वह वरिष्ठ लोगों के मार्गदर्शन और सलाह की कमी भी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने खुद यह स्वीकार किया है कि उन्हें शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों की अनुभवी सलाह नहीं मिल रही।


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जगन रेड्डी का केंद्र सरकार-खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेहतरीन तालमेल है। महत्वपूर्ण मुद्दों पर जगन ने एनडीए सरकार के प्रस्तावों का समर्थन किया है। संसद में वाईएसआर कांग्रेस अमित शाह द्वारा लाए गए महत्वपूर्ण विधेयकों और प्रस्तावों के साथ खड़ी दिखी। और तो और, जगन ने सोनिया और राहुल गांधी की एसपीजी सुरक्षा हटाने के केंद्र सरकार के फैसले का भी समर्थन किया।

उन्होंने एक ही झटके में पूर्ववर्ती चंद्रबाबू नायडू सरकार द्वारा राज्य की राजधानी अमरावती के निर्माण के लिए जारी किए गए सभी अनुबंधों को रद्द कर दिया। वह अगले साल से राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करना चाहते हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो वर्ष 2024 में यानी अगले विधानसभा चुनाव तक आंध्र प्रदेश पूर्णतः शराब मुक्त और शराब पर प्रतिबंध लगाने वाले चार भारतीय राज्यों, गुजरात, मिजोरम, बिहार और नगालैंड, के क्लब में शामिल हो जाएगा।

विगत मई में वाईएसआर कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद जहां विश्व बैंक ने अमरावती परियोजना के लिए 30 करोड़ डॉलर की फंडिंग से अपने हाथ खींच लिए, वहीं खुद जगन ने अन्ना कैंटीन (रियायती भोजन) योजना बंद कर दी। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की सरकार ने उसके बाद 3,000 करोड़ रुपये की पोलावरम राष्ट्रीय सिंचाई परियोजना के अनुबंधों को रद्द करते हुए उसी काम के लिए फिर से निविदाएं आमंत्रित की हैं। जगन का कहना है कि चंद्रबाबू नायडु की पिछली सरकार में भ्रष्टाचार हुआ था और वह अपनी सरकार के कामकाज में पारदर्शिता ला रहे हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी आखिर इस तरह का नकारात्मक रवैया क्यों अपना रहे हैं? इसकी वजह साफ है। आंध्र प्रदेश की राजनीति को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि राज्य में दो प्रमुख जातियों, खम्मा और रेड्डी का वर्चस्व है। ये दोनों जातियां एक दूसरे की विरोधी हैं। कपू जाति यहां तीसरी शक्ति है। कई वर्षों से राज्य के मतदाताओं ने रेड्डी या खम्मा में से किसी एक को चुना और उन्हें बारी-बारी से पांच साल के लिए सत्ता सौंपी। हालांकि दोनों जातियों के मुख्यमंत्रियों ने सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को अच्छी तरह से चलाया।

जगन रेड्डी ने हाल ही में एक विवादास्पद टिप्पणी की कि बच्चों को स्कूल में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करनी चाहिए। इस बयान ने उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेदेपा ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि जगन रेड्डी मातृभाषा तेलुगू को भूल गए हैं। बाल दिवस के मौके पर नाडु-नेडू कार्यक्रम शुरू करने वाले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि आज के बच्चे अंग्रेजी भाषा पर कमजोर पकड़ होने के कारण शिक्षा में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 'राज्य के 33 फीसदी बच्चे निरक्षर हैं। देश उन्नत तकनीकों और बढ़ते इंटरनेट के साथ आगे बढ़ रहा है। दस वर्ष बाद 2025-2030 में रोबोट हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण होगा।' जगन ने दोहराया कि अगर बच्चे अंग्रेजी में शिक्षित नहीं होते हैं, तो उनका क्या भविष्य होगा?  उन्होंने यह जोर देकर कहा कि हमें अपने बच्चों को शिक्षा के माध्यम के रूप में अंग्रेजी को लागू करके अंग्रेजी माध्यम के बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मदद करनी चाहिए, ताकि वे दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हो सकें। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का माध्यम तेलुगू से अंग्रेजी करने का मुद्दा राज्य में राजनीतिक रंग ले रहा है।

जगन मोहन न केवल राष्ट्रीय निरक्षरता दर के मुकाबले राज्य की निरक्षरता दर के अधिक होने से चिंतित हैं, बल्कि उनका मानना है कि ऐसी स्थिति से तभी निपटा जा सकता है, जब प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इसी कारण पहली कक्षा से छठी कक्षा तक शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी करने का फैसला लिया गया है। शिक्षा सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसे हम अगली पीढ़ी को देने जा रहे हैं। यह प्रतिस्पर्धी दुनिया में जाने के लिए तैयार भावी नागरिकों के व्यक्तित्व का निर्माण करेगी। निष्पक्ष रूप से कहें, तो जगन रेड्डी के पास पुरानी व्यवस्थाओं के विरोध करने के सभी कारण हैं, लेकिन यह उनके और आंध्र प्रदेश के लोगों के हित में होगा कि वह किसी भी बड़ी समस्या के प्रति सतर्क और स्थिर दृष्टिकोण रखें। अन्यथा कभी ऐसा भी हो सकता है कि उनके लिए सभी रास्ते बंद हो जाएं। इसलिए उन्हें बीच का रास्ता अपनाना होगा।

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