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आईटी उद्योग का सिमटता आकाश

Thu, 10 Nov 2016 05:54 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Thu, 10 Nov 2016 05:54 PM IST
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IT industry shrinking sky
जयंतीलाल भंडारी

पिछले दो दशकों के दौरान भारत यात्रा पर आए ब्रिटेन के सभी तत्कालीन प्रधानमंत्रियों जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गार्डन ब्राउन तथा डेविड कैमरन के दौरे में बंगलूरू खासतौर से शामिल रहा है, जहां वे सॉफ्टवेयर कंपनियों और उनके प्रोफेशनल्स से मुलाकात जरूर करते रहे हैं, जिसके लाभप्रद परिणाम भी आए हैं। मगर पहली बार भारत के दौरे पर आईं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीजा मे बंगलूरू तो गईं और वहां उनका काफी व्यस्त कार्यक्रम भी रहा, मगर इसमें सॉफ्टवेयर कंपनियों का दौरा शामिल नहीं था।

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दरअसल टेरीजा की कंजरवेटिव सरकार ब्रिटेन में आईटी आउसोर्सिंग कम करने की नीति अपना रही है और पिछले दिनों आईटी पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को भी पहले से सख्त किया जा चुका है। चूंकि भारत के करीब 100 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात वाले सॉफ्टवेयर उद्योग में ब्रिटेन का योगदान करीब 20 फीसदी है, ऐसे में टेरीजा सरकार के कदमों से भारत के सॉफ्टवेयर उद्योग को झटका लगना स्वाभाविक है।
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उल्लेखनीय है कि जिस तरह से ब्रिटेन में भारतीय आईटी उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, उसी तरह से दुनिया के विभिन्न देशों में और भारत में भी आईटी उद्योग की स्थिति कमजोर हो रही है। दुनिया के 80 देशों के करीब 200 शहरों में भारत की आईटी कंपनियां मौजूद हैं, जिनके काम में भी कमी दिखाई दे रही है।
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निस्संदेह इन दिनों छलांगें लगाकर बढ़ते हुए भारतीय आईटी उद्योग में मंदी की आहट सुनाई पड़ रही है। हाल ही में वैश्विक सॉफ्टवेयर, डाटा तथा मीडिया कंपनी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट-2016 के अनुसार भारतीय आईटी उद्योग की चमक-धमक कम होती जा रही है और वह धीरे-धीरे ऐसी स्थिति में पहुंच रहा है, जहां से उबरना मुश्किल होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2008 की वैश्विक वित्तीय मंदी के दौरान भी भारतीय आईटी कंपनियां तेजी से वृद्धि करती हुई दिखाई दी। लेकिन इस समय आईटी उद्योग की वृद्धि पटरी से उतरी हुई है और ऐसे में यदि आईटी सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह ऐसी स्थिति में पहुंच जाएगा, जहां से उबरना मुश्किल होगा। गौरतलब है कि देश की दो बड़ी आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और इंफोसिस ने कहा कि वर्ष 2016 में आईटी सेक्टर के ढलान पर होने से उनकी कारोबार की चिंताएं बढ़ी हैं। टीसीएस से लगाकर इंफोसिस, विप्रो, टेक महिन्द्रा और काग्रिजेंट जैसी नामी आईटी कंपनियों के शेयर लुढ़क गए हैं। देश के आईटी सेक्टर में तेजी से घट रहे रोजगार अवसरों का आभास देश के आईआईटी और एनआईटी से लेकर सभी प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों में कम्प्यूटर-आईटी ब्रांच के स्टूडेंट्स के घटते हुए कैम्पस प्लेसमेंट से भी लगाया जा सकता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष इन दिनों कैम्पस प्लेसमेंट में करीब 20 से 30 फीसदी की कमी दिखाई दे रही है। वेतन पैकेज भी पिछले साल की तुलना में कम होते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कोटक, इंस्ट्यिूशनल इक्विटी की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016-17 की पहली छमाही में देश की टाटा आईटी कम्पनियों में पिछले वर्ष की पहली छह माही की तुलना में नियुक्तियां में 24 फीसदी की कमी  आई है।


भारत में साफ्टवेयर कंपनियों की राष्ट्रीय संस्था नास्कॉम भी मान रही है कि इस समय भारत में आउटसोर्सिंग के समक्ष मुश्किलें हैं और इस क्षेत्र में विश्व में भारत की बादशाहत संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।

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