फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Issue: Economy remains intact in midst of the challenge of war

मुद्दा: युद्ध की चुनौती के बीच अर्थव्यवस्था, बरकरार है भारत की रफ्तार

Mon, 12 May 2025 06:42 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Mon, 12 May 2025 06:42 AM IST
विज्ञापन
सार
आईएमएफ रिपोर्ट हो या वैश्विक एजेंसियों की रेटिंग-यही दर्शाती है कि युद्ध की चुनौती के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।
loader
Issue: Economy remains intact in midst of the challenge of war
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

इन दिनों पूरी दुनिया में हाल ही प्रकाशित विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों से यह रेखांकित हो रहा है कि भारत ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देते हुए युद्ध के दौर में भी अपनी आर्थिकी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है और इसी वर्ष दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनते हुए दिखाई देगा।



हाल ही में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है, जो इसी वर्ष के अंत तक दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। तब देश की जीडीपी बढ़कर 40 खरब डॉलर को पार कर जाएगी, जो जापान की जीडीपी से ज्यादा होगी। यही नहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास की ऊंची दर से भारत की जीडीपी 2028 में बढ़कर 55.84 खरब डॉलर हो जाएगी और भारत जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसी तरह वैश्विक रेटिंग एजेंसी मॉर्निंग स्टार डीबीआरएस ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को न्यूनतम निवेश ग्रेड 'बीबीबी (कम)' से एक पायदान ऊपर उठाकर 'बीबीबी' कर दिया है। रेटिंग प्रवृत्ति को भी 'सकारात्मक' से 'स्थिर' कर दिया गया है। इस रेटिंग एजेंसी ने उन्नयन के लिए बुनियादी ढांचे में निवेश और डिजिटलीकरण, राजकोषीय समेकन, व्यापक आर्थिक स्थिरता के साथ सतत उच्च विकास और एक लचीली बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से देश के संरचनात्मक सुधारों का हवाला दिया है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि दुनिया के उभरते हुए देशों की तुलना में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। बीते अप्रैल में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह 2.09 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो किसी महीने अब तक का सर्वाधिक रिकॉर्ड राजस्व है। पिछले वर्ष 2024-25 में जीएसटी और आयकर संग्रहण रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा है। आईएमएफ और विश्व बैंक का मानना है कि भारत चुनौतियों के बीच नई संभावनाओं वाला देश है और वैश्विक व्यापार को बढ़ाने वाला इंजन बन सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत ट्रंप टैरिफ और वैश्विक व्यापार युद्ध के दौर में नीतिगत चुस्ती और दीर्घकालीन नजरिये से वैश्विक व्यापार चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ रहा है।


संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संगठन (अंकटाड) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक मंदी की आशंका और बढ़ते व्यापार तनावों के बीच भी घटती ब्याज दर, घटती महंगाई और घरेलू अर्थव्यवस्था के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था 6.5 फीसदी की दर से बढ़ते हुए दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। इसका कारण है कि सरकार सार्वजनिक खर्च को बढ़ा रही है और रिजर्व बैंक ने ब्याज दर में कटौती की है। इससे न केवल घरेलू खपत को सहारा मिलेगा, बल्कि निजी निवेश में भी उछाल आने की उम्मीद है।

इसमें कोई दो मत नहीं है कि पाकिस्तान से युद्ध, टैरिफ की चुनौतियों और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था भारत की शक्ति बन गई है। इस समय छह महत्वपूर्ण आधार भारत की घरेलू आर्थिकी को मजबूती देते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें घटती महंगाई, घटती ब्याज दर, अच्छा मानसून, बढ़ता शेयर बाजार, मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रयशक्ति और ट्रंप के टैरिफ से मुकाबला करने की भारत की कूटनीतिक रणनीति शामिल है। निस्संदेह देश में आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत विकास दर को बढ़ाने वाले हैं। निर्यात बढ़ रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। सरकार के पूंजीगत खर्च बढ़ने से भी अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है। घरेलू बाजार को मेक इन इंडिया अभियान से शक्ति मिल रही है। कई औद्योगिक उत्पाद देश में ही बनाए जा रहे हैं।

 इस समय देश के मध्यम वर्ग की बढ़ती क्रयशक्ति भी आर्थिकी के लिए अहम है। मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के बजट के माध्यम से टैक्स में कटौती और वित्तीय प्रोत्साहनों से मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति बढ़ाकर मांग में वृद्धि करके अर्थव्यवस्था को गतिशील करने के अभूतपूर्व प्रावधान किए गए हैं।

सरकार को घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कुछ और बातों पर ध्यान देना लाभप्रद होगा। भारत में आत्म निर्भरता की नीति और वोकल फॉर लोकल मंत्र को बढ़ाना होगा। जीएसटी में सरलता, निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल, कुशल बुनियादी संरचना, लॉजिस्टिक लागत में कमी, गतिशक्ति योजना का तेज क्रियान्वयन, व्यवसाय करने की प्रक्रिया की सरलता जैसे रणनीतिक कदमों से भारत के घरेलू बाजार की चमक बढ़ाई जा सकेगी। अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा, अनुसंधान व विकास (आरएंडडी), कृषि तथा श्रम सहित अन्य सुधारों के क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा।

हम उम्मीद करें कि पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के तहत मुंहतोड़ जवाब देते हुए युद्ध की चुनौती के बीच भी भारत की आर्थिकी तेजी से आगे बढ़ेगी और आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, इसी वर्ष दुनिया की चौथी बड़ी आर्थिकी बनेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed