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क्या यह यूरोप का अंत है?

Wed, 19 Dec 2018 07:06 PM IST
Nootan Gupta थामस एल फ्रीडमैन
थामस एल फ्रीडमैन Published by: Nootan Gupta Updated Wed, 19 Dec 2018 07:06 PM IST
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Is this the end of Europe?
फ्रांस में यलो जैकेट आंदोलन
दूसरे विश्व युद्ध के बाद से, उदार वैश्विक व्यवस्था जिसने इतिहास के किसी भी कालखंड की तुलना में दुनिया में सर्वाधिक स्वतंत्रता और समृद्धि फैलाई, उसे दो स्तंभों ने टिकाए रखा हैः युनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका और युनाइटेड नेशंस ऑफ यूरोप जिसे अब यूरोपियन यूनियन यानी यूरोपीय संघ के नाम से जाना जाता है। 

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मुक्त बाजारों, उदार लोगों और स्वतंत्र विचारों के ये दोनों केंद्र आज ग्रामीण और उपनगरीय विद्रोह से थरथराए हुए हैं, जिसके लिए मुख्य तौर पर श्वेत कामगार वर्ग और बेताब मध्य वर्ग जिम्मेदार है, जिसे आम तौर पर वैश्वीकरण, आप्रवास और प्रौद्योगिकी के उभार का लाभ नहीं मिला, जैसा कि लंदन, पेरिस और सैनफ्रैंसिस्को और उनकी बहुसांस्कृतिक आबादी को मिला। 

यह देखकर धक्का लगा कि किस तरह से क्रिसमस से पहले पेरिस की दुकानें यलो वेस्ट प्रदर्शनकारियों के हमले से खुद को बचाने के उपाय कर रही हैं। इससे थोड़े दिन पहले रोम में बताया गया कि यूरोपीय संघ का संस्थापक सदस्य इटली अपनी नई  धुर वामपंथी/धुर दक्षिणपंथी गठबंधन वाली विचित्र सरकार के अधीन किसी दिन यूरोपीय संघ और यूरो से नाता तोड़ सकता है। यूरोपीय संघ को छोड़ने जैसे आत्मघाती कदम उठाने के बाद ब्रिटेन को मानो लकवा मार गया है। राष्ट्रपति ट्रंप वास्तव में यूरोपीय संघ के बिखराव को रोकने की कामना करने के बजाय इससे खुश ही हैं। यह सब देखकर मुझे यह कहने में हिचक नहीं कि हम इतिहास के अहम मोड़ पर खड़े हैं।

यूरोपीय संघ और अमेरिका की मुख्य चिंता एक जैसी हैः प्रौद्योगिकी और वैश्वीकरण में आई तेजी ने और अधिक आप्रवासियों को उनके दूरस्थ छोरों तक ला दिया। आज पेरिस की पब्लिक हाउसिंग सोसाइटीज में आप्रवासियों का प्रभुत्व हो चुका है। ठीक इसी समय समान लिंग वालों के बीच विवाह और उभयलिंगियों के अधिकारों की स्वीकार्यता जैसे लंबे समय से लंबित सामाजिक कदम उठाए गए हैं और औसत काम के लिए अब औसत पारिश्रमिक इतना नहीं मिल पाता, जिसमें औसत मध्य वर्ग की जीवन शैली को कायम रखा जा सके। 

बीसवीं सदी में अमेरिका और यूरोपीय संघ के विकास को रफ्तार देने वाले वाले मध्य वर्ग के निर्माण का आधार था- हाई-वेज, मिडिल स्किल्ड जॉब। यानी उच्च वेतन और औसत कौशल संबंधी नौकरियां। लेकिन रोबोटिक्स और आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस, आउटसोर्सिंग तथा चीन से होने वाले आयात ने मिडिल स्किल्ड वाली बहुत-सी व्हाइट कॉलर (प्रबंधकीय और प्रशासनिक काम) और ब्ल् कॉलर (श्रमिक) नौकरियां खत्म कर दीं। 

अब हाई वेज (उच्च पारिश्रमिक), हाई स्किल्ड जॉब्स (उच्च कौशल वाली नौकरियां) तथा लो-वेज (निम्न पारिश्रमिक) लो स्किल्ड जॉब (अकुशल श्रमिक) बस हैं। लेकिन उच्च वेतन और मिडिल स्किल्ड जॉब खत्म हो रहे हैं, जिससे ऐसे लोगों के बड़े समूह तैयार हो रहे हैं, जिनके पास नियमित आय नहीं हैं। ऐसे लोगों में वैश्वीकृत शहरी लोगों के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है, जिनके बारे में उन्हें लगता है कि वे उन्हें हिकारत से देखते हैं और जिन्होंने आज के उच्च पारिश्रमिक वाली नौकरियों के लिए जरूरी गैर नियमित कौशल हासिल कर लिया है।

जब आप इन सभी को एक साथ चुनौती देते हैं, जिनसे लोगों के हित जुड़े हुए हैं, जिनमें उनके घर, नौकरियां और सामाजिक मान्यताएं चाहे अच्छी या बुरी जो भी हों, तो आपके सामने सही तस्वीर उभर सकती है कि आखिर क्यों फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को पूरे देश में नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। 24 नवंबर को द गार्जियन ने यलो वेस्ट के प्रदर्शन पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें पेरिस के बाहरी हिस्से में एक एयरफ्रेट कंपनी में काम करने वाले फ्लोरेंस ने मैक्रों के बारे में कहा, वह जब टेलीविजन में आते हैं, तो हमें लगता है कि वह सामान्य लोगों के साथ असहज रहते हैं, यह हम लोगों का अपमान है। 

एक रिटायर्ड कारपेंटर ब्रूनो ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए मैक्रों द्वारा डीजल पर बढ़ाए गए टैक्स के बारे में कहा, मेरे पास डीजल से चलने वाली एक छोटी वैन है और मेरे पास नई गाड़ी खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। हमें ऐसा लगता है कि देहातों में रहने वाले लोगों को भुला दिया गया है। 

प्रोवाइन की एक 62 वर्षीय स्कूल शिक्षिका मैरी लेमोइन, जो खुद के बारे में कहती हैं कि वह न तो लेफ्ट से हैं और न ही राइट से, का कहना था, 'मैं यहां अपने बच्चों और पोते पोतियों और उन सारे लोगों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए आई हूं जो महीने की पंद्रह तारीख के आते-आते परेशान हो जाते हैं, क्योंकि उनकी जेबें खाली हो जाती हैं। मैक्रों हमारे लुइस सोलहवें हैं। हम जानते हैं कि उन्हें क्या हो गया है।' 

इस चुनौती से निपटने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के असाधारण नेतृत्व की जरूरत है, जिसे इन तकलीफों को दूर करने के लिए रणनीति लेकर सामने आना चाहिए। लेकिन नेतृत्व तैयार नहीं दिखता। मैं समझ सकता हूं कि आखिर क्यों ब्रिटेन के नागरिकों ने ब्रेग्जिट के पक्ष में वोट दिया। उन्हें बताया गया था कि वे 22 लाख विदेशी कामगारों को नियंत्रित कर सकते हैं और यूरोपीय संघ के बाजार तक ब्रिटेन की स्वतंत्र पहुंच को कायम रखेंगे, मगर किया कुछ नहीं। यह सब झूठ था। 

एक स्तंभकार एलन फ्रैकां ने कहा, मैक्रों साम्राज्यवादी तरीके से काम करते हैं। उन्होंने एक छोटी टीम बना रखी है और लगता है जैसे वह कोई कमांडो यूनिट हो। मैक्रों सोचते हैं कि वह फ्रांस में नहीं सिंगापुर में शासन कर रहे हैं। उन्होंने हर तरह की राजनीतिक गलतियां की हैं। 

इस दुनिया में उच्च केंद्रीकृत देशों का प्रदर्शन विकेंद्रीकृत देशों की तुलना में बदतर ही रहना है। यही वास्तविक बदलाव है जो फ्रांस को करना चाहिए और यदि वह ऐसा नहीं कर सकता तो फिर स्तंभों के गिरने का इंतजार कीजिए। इसीलिए फ्रांस मायने रखता है। 
© The New York Times 2018
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