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अखिलेश को क्लीन चिट नहीं दी

Fri, 13 Sep 2013 08:31 PM IST
हिमांशु मिश्र
हिमांशु मिश्र Updated Fri, 13 Sep 2013 08:31 PM IST
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interview of k rahman khan

मुजफ्फरनगर जल रहा है और राजनीतिक दल इसके लिए एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। चूंकि लोकसभा चुनाव नजदीक है, इसलिए कोई भी दल वोट की फसल काटने के लोभ से खुद को नहीं बचा पा रहा। इस घटना के कारणों और इस पर जारी राजनीति पर अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री के रहमान खान से हिमांशु मिश्र ने बातचीत की-

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मुजफ्फरनगर के सांप्रदायिक दंगे के बारे क्या कहेंगे? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
मेरे पास अफसोस जाहिर करने के लिए अल्फाज नहीं हैं। यह सब कुछ एकाएक नहीं हुआ। लगता है कि राज्य सरकार इस दंगे के व्यापक स्तर पर फैलने का इंतजार कर रही थी। वह लोगों की हिफाजत नहीं कर पाई। भाजपा ने अमित शाह को जब उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया, उसके बाद ही उसे सतर्क हो जाना चाहिए था। इसके लिए भाजपा के साथ-साथ राज्य सरकार भी बराबर की जिम्मेदार है।
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मतलब अमित शाह इतने ताकतवर हैं कि कहीं भी दंगा करा सकते हैं? उनकी ताकत केंद्र और राज्य सरकार से भी ज्यादा है?
आप उनका करियर देखिए। उन पर फर्जी एनकाउंटर और गुजरात दंगे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के संगीन आरोप हैं। मतों के ध्रुवीकरण के लिए ही उन्हें भाजपा ने उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। फिर सांप्रदायिक भावना भड़काना बेहद आसान होता है। मेरे कहने का मतलब है कि केंद्र ने पहले ही उत्तर प्रदेश सहित ग्यारह राज्यों को सतर्क किया था। बावजूद इसके मुजफ्फरनगर में ऐसा हुआ। राज्य सरकार चाहती, तो ऐसा नहीं होता। जहां तक केंद्र की बात है, तो उसके हाथ बंधे हुए हैं।
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केंद्र के हाथ क्या इसलिए बंधे हुए हैं कि सपा केंद्र में आपकी सरकार को समर्थन दे रही है?
मेरे जवाब का गलत अर्थ मत निकालिए। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। केंद्र राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही कुछ कार्रवाई कर सकता है। वैसे भी गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है। फिर अगर राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हैं, तब केंद्र इस पर गंभीरता से विचार करेगा। केंद्र क्या कर सकता है? वर्षों से लटके सांप्रदायिक दंगा निरोधक विधेयक को ही लीजिए। कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है-यह तर्क देकर इस विधेयक को पारित ही नहीं होने दिया जा रहा।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव के मद्देनजर वोटों के ध्रुवीकरण के खेल में कांग्रेस भी शरीक है। इसलिए कांग्रेस के बड़े नेता चुप हैं, जबकि गृह मंत्री राज्य सरकार को क्लीन चिट दे चुके हैं?
माफ कीजिए, हम लाशों की ढेर पर राजनीति नहीं करते। ऐसी राजनीति करने वालों को जनता पहचानती है और उन्हें इसकी सजा भी चुनाव में मिल जाएगी। फिर चुप्पी और क्लीन चिट का तो सवाल ही नहीं उठता। मैंने और कई नेताओं ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। और मुझे नहीं पता कि गृह मंत्री ने राज्य सरकार को कब क्लीन चिट दे दी।

क्या आप कहना चाहते हैं कि यह भाजपा और सपा की मिलीभगत है?
भाजपा नफरत की ही राजनीति करती आई है। जहां तक सपा की बात है, तो वह भी शक के दायरे से बाहर नहीं। यह दंगा एकाएक नहीं हुआ। हालात के बेकाबू होने का इंतजार किया गया। और सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य सरकार निर्दोष लोगों के जानमाल की क्षति नहीं रोक पाई।


अब क्या करना चाहिए?
इसके लिए राजनीतिक दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। सबसे पहले अल्पसंख्यकों के मन में सुरक्षा की भावना पैदा करने की कोशिश की जानी चाहिए। समाज के जाने-माने लोगों को हालात संभालने के लिए आगे आना चाहिए। इसके साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

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