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अंतरराष्ट्रीय: अमेरिका और स्टील की राजनीति, ट्रंप को दुविधा में फंसा गए बाइडन

Sun, 16 Feb 2025 05:17 AM IST
Anshuman Tiwari अंशुमान तिवारी
Updated Sun, 16 Feb 2025 05:17 AM IST
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सार
अचानक अखबारों के न्यूज रूम में सनसनीखेज खबर आ गिरी है-राष्ट्रपति ट्रूमन ने स्टील मिलों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। अमेरिका का पूंजीवादी उद्योग जगत सन्न रह गया है। मिल मालिकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। अदालत ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। यूएस स्टील के राष्ट्रीयकरण का फैसला रद्द हो गया है। व्हाइट हाउस में जब डोनाल्ड ट्रंप के स्वागत की तैयारी हो रही है। इस बीच बाइडन ने मुक्त बाजार की परंपराओं को तोड़ते हुए यूएस स्टील का अधिग्रहण रद्द कर दिया है। मगर ट्रंप क्या करेंगे?
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International Affairs US and politics of steel former president Biden puts Donald Trump in dilemma
हड़ताल पर यूएस स्टील के कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला/ एजेंसी

विस्तार

निप्पॉन स्टील अमेरिकी सरकार पर मुकदमा करने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने जाते-जाते यूएस स्टील के अधिग्रहण को रोक दिया। जापान की निप्पॉन स्टील करीब 15 अरब डॉलर देकर इसका अधिग्रहण करना चाहती थी। यूएस स्टील बीते एक दशक से बीमार है। पूंजीवादी, बाजारवादी और प्रतिस्पर्धावादी अमेरिका में ऐसा भी कुछ हो सकता है-इसकी संभावना नहीं थी। राष्ट्रपति बाइडन पिछले वर्ष अप्रैल में पिट्सबर्ग में थे। अमेरिका में स्टील का मतलब ही पिट्सबर्ग है। पेनसिल्वेनिया का यह शहर बीते 150 साल से दुनिया की स्टील सिटी है। बाइडन ने यहां स्टील कामगारों की तालियों के बीच यूएस स्टील का अधिग्रहण रद्द करने का एलान किया था, जिस पर अब व्हाइट हाउस की मुहर लग गई है। अमेरिका के मुक्त बाजार में अधिग्रहण पर रोक! अमेरिका में संरक्षणवाद! वक्त का क्या कहिए, जो भी दिखाए दौर-ए फलक देखते चलो!



टाइम मशीन तैयार है। आइए अपनी सीट पर, हम चल रहे हैं एक ऐसे दौर में, जब कद्दावर कॉरपोरेट और व्हाइट हाउस आपस में भिड़ गए थे इसी यूएस स्टील को लेकर, जिसे बाइडन ने अमेरिकी औद्योगिक इतिहास का सबसे जीवंत स्मारक कहा है। हम 1952 में हैं। अमेरिकी अखबारों के न्यूज रूम में ताकतवर प्रेसीडेंट हैरी एस ट्रूमन की सबसे बड़ी राजनीतिक हार की खबर लिखी जा रही है। गुस्साए ट्रूमन ने अमेरिका स्टील उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया है, मगर इस कंपनी ने राष्ट्रपति को स्टील के चने चबाने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के सनसनीखेज फैसले को पलट दिया है। यह फैसला यूएस स्टील से ही जुड़ा है। टाइम मशीन ने रफ्तार पकड़ ली है।


यह 19वीं सदी का आखिरी दशक है। पेनसिल्वेनिया के उद्योग परिदृश्य में एक उद्यमी की कहानी दिलचस्पी से सुनी जा रही है। 1835 में स्कॉटलैंड से आया यह युवक एक कपड़ा मिल में बॉबिन बॉय है। वह करघों पर काम करने वाली महिलाओं को बॉबिन देता है और सूत को स्टोर में पहुंचाता है। इस युवा का नाम है-एंड्यू कार्नेगी। 19वीं सदी का आखिरी दशक चल रहा है। कार्नेगी की एडगर थॉमसन स्टील मिल अब कार्नेगी स्टील कंपनी है। इस कंपनी के ड्राइवर की बड़ी चर्चा है, जिसका नाम चार्ल्स एम श्वाब है, जो 35 साल की उम्र में श्वाब कार्नेगी स्टील कंपनी का प्रेसीडेंट बन गया है। कार्नेगी और श्वाब के इतिहास पुरुष बनने में अभी वक्त है। टाइम मशीन अब बीसवीं सदी की शुरुआत में है। अमेरिकी अखबारों में स्टील उद्योग को लेकर सुर्खियां ही सुर्खियां हैं। रेलरोड विकसित हो रहा है। स्टील की मांग आसमान पर है। अमेरिका के चर्चित बैंकर जेपी मोर्गन एक विशाल स्टील कंपनी खड़ी करना चाहते हैं। पिट्सबर्ग में मॉर्गन की योजना परवान चढ़ने लगी है। यह 1901 है। एंड्यू कार्नेगी, जेपी मॉर्गन और चार्ल्स श्वाब एकसाथ आ गए हैं। कार्नेगी स्टील, फेडरल स्टील, नेशनल स्टील और छह अन्य कंपनियों को मिलाकर इन तीनों ने दुनिया की सबसे बड़ी स्टील कंपनी बना डाली है। यह कंपनी यूएस स्टील है, जिसका मूल्य या वैल्यूएशन 94.2 करोड़ डॉलर है। चार्ल्स एम श्वाब यूएस स्टील के पहले अध्यक्ष बनाए गए हैं। स्थापना के कुछ ही वर्ष में यह दुनिया की पहली कंपनी बन गई है, जिसका मूल्य शेयर बाजार में एक अरब डॉलर है। बीसवीं सदी का पहला दशक है। यूएस स्टील ने (1907) टेनेसी कोल आयरन एंड रेलरोड कंपनी का अधिग्रहण कर लिया। यह यूएस स्टील की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी है।

टाइम मशीन अब राजधानी वाशिंगटन में है, जहां कॉरपोरेट एकाधिकारों के खिलाफ माहौल गर्म है। अमेरिकी नेता मान रहे हैं कि बड़ी कंपनियां पूरी अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर लेंगी। रॉकफेलर की स्टैंडर्ड ऑयल को विभाजित (1911) कर दिया गया है। यूएस स्टील पर कार्रवाई होने की चर्चा गर्म है, मगर फिलहाल अमेरिकी कानून निर्माता इसे बख्शने जा रहे हैं, क्योंकि इस वक्त यूएस स्टील अमेरिका की कुल मांग का दो तिहाई स्टील बना रही है। शेयर में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई, मगर यह ब्रांड नई ऊंचाई छू रहा है। हम दूसरे विश्वयुद्ध के दौर में हैं। यूएस स्टील का आधुनिकीकरण हुआ है। रक्षा संबंधी मांग के कारण यूएस स्टील फिर सुर्खियों में है। यह 1943 का साल है। यहां करीब 3.4 लाख लोग काम कर रहे हैं। सैन्य ऑर्डर के मामले में यह अमेरिका की शीर्ष 20 कंपनियों में शामिल हो गई।

टाइम मशीन अब 1950 के दशक में पहुंच गई। यह कोरिया युद्ध का दौर है। राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन यूएस स्टील के कर्मचारियों से उलझ गए हैं। ट्रूमन युद्ध के खर्च के लिए संसाधन चाहते हैं। वह टैक्स बढ़ाने की फिराक में हैं। इधर यूएस स्टील के कर्मचारी वेतन में दस फीसदी की बढ़त मांग रहे हैं। स्टील कंपनियों ने एलान कर दिया है कि स्टील की कीमत बढ़ाने की छूट मिलने पर ही वेतन बढ़ेगा। महंगाई के खतरे के कारण अमेरिकी सरकार इसकी इजाजत नहीं दे रही है। कंपिनयों और कर्मचारियों के बीच खुला टकराव शुरू हो गया। कोरिया युद्ध के बीच अमेरिका की सबसे बड़ी स्टील कंपनी में श्रम आंदोलन गरमा गया है। यह 1952 का साल है। यूएस स्टील में हड़ताल की नौबत आ गई। युद्ध के लिए स्टील की आपूर्ति रुकने का खतरा है। राजनीतिक हलकों में सुगबुगाहट है। अचानक न्यूज रूम में सनसनीखेज खबर आ गिरी है-राष्ट्रपति ट्रूमन ने स्टील मिलों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। अमेरिका का पूंजीवादी उद्योग जगत सन्न रह गया है। मिल मालिकों ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है।

टाइम मशीन अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने खड़ी है। जस्टिस ब्लेक अपना फैसला पढ़ रहे हैं। अदालत ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अधिकारों का दुरुपयोग किया है। राष्ट्रपति या कांग्रेस कानून बनाकर भी किसी उद्योग का अधिग्रहण नहीं कर सकते। यूएस स्टील के राष्ट्रीयकरण का फैसला रद्द हो गया है। राष्ट्रपति ट्रूमन पर कार्टूनों की बाढ़ आ गई है। टाइम मशीन अब 1980 में है। रोनाल्ड रीगन निजीकरण के महारथी हैं। उनके राज में मैरॉथन ऑयल ने 6.1 अरब डॉलर में यूएस स्टील खरीद लिया है। यह कंपनी अब यूएएक्स है। यूएस स्टील के मजदूरों के आंदोलन अब रोज की बात हो गए हैं। टाइम मशीन अब 21वीं सदी की शुरुआत में उड़ान भर रही है। अमेरिका के स्टील का युग समाप्त हो चुका है। चीन के सस्ते स्टील ने बाजार पर कब्जा कर लिया। यूएस स्टील संकट में है। मैरॉथन ऑयल ने इस कंपनी से खुद को अलग कर लिया है। कोरोना महामारी के बीच 20 मार्च, 2020 को इसका स्टॉक बुरी तरह टूट गया। यहीं से कंपनी की बिक्री की उल्टी गिनती शुरू हो गई। यूएस स्टील अब करीब 14.3 अरब डॉलर में जापान की निप्पॉन स्टील के हवाले होने जा रही है, 55 डॉलर प्रति शेयर के सौदे पर दस्तखत के दस्तावेज बन गए, पर इस बीच अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव शुरू हो गया। व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की अगवानी की तैयारी हो रही है। इस बीच बाइडन ने यूएस स्टील का अधिग्रहण रद्द कर दिया है। बाइडन ने कहा है कि चीन का सस्ता स्टील रोकने के लिए यूएस स्टील को विदेशी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। ट्रंप भी चीन के स्टील को रोकना चाहते हैं, मगर वह निजी अधिग्रहणों के मजबूत पैरोकार हैं। यूएस स्टील पर राजनीति और गरमाएगी! यूएस स्टील अभी और इतिहास बनाएगी। फिर मिलते हैं अगले सफर पर...

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