फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   internal problem of pakistan

अपने ही जाल में फंस रहा है पाकिस्तान!

Tue, 26 Nov 2013 01:20 AM IST
कुलदीप तलवार
कुलदीप तलवार Updated Tue, 26 Nov 2013 01:20 AM IST
विज्ञापन
internal problem of pakistan

प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) कमांडर हकीममुल्लाह महसूद के पाकिस्तानी कबायली क्षेत्र में अमेरिकी ड्रोन हमले में हाल ही में मारे जाने के बाद, वहां के राजनीतिक, सामाजिक, मीडिया व बुद्धिजीवी क्षेत्र में मची खलबली कम होने का नाम ही नहीं ले रही।

विज्ञापन


इसके लिए मुख्य रूप से महसूद की हत्या के तुरंत बाद, पाकिस्तानी गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान का यह बयान जिम्मेदार समझा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि महसूद की हत्या कर अमेरिका ने जान-बूझकर तालिबान के साथ होने जा रही शांति वार्ता को भंग किया है। महसूद के मारे जाने से ठीक पहले सरकार ने उग्रवादियों के साथ संपर्क साधा था और एक सरकारी प्रतिनिधि मंडल उनसे मिलने वाला था। चौधरी के इस वक्तव्य ने अमेरिका के प्रति बढ़ती नाराजगी को और हवा दी।
विज्ञापन


ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद हकीममुल्लाह महसूद अचानक शहीदों की श्रेणी में आ गया है। हालांकि पाक फौज के प्रवक्ता ने इसकी निंदा करते हुए कहा है कि दहशतगर्दों को शहीद कहना पाकिस्तानी फौज व हजारों निर्दोष व मासूम शहरियों की बेइज्जती है, जिनकी तालिबान ने हत्या की है। वहीं तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के मुखिया इमरान खान ने केंद्रीय सरकार को ड्रोन हमले बंद कराने के लिए जरूरी व ठोस कदम उठाने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ये हमले बंद न हुए, तो पख्तूनख्वाह प्रांत के रास्ते से अफगान फौजों को जा रही रसद सप्लाई बंद कर दी जाएगी। जबकि हकीकत यह है कि अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी व नाटो फौजों को जा रही हथियारों व रसद की आपूर्ति पाक और पूरे इस क्षेत्र में शांति बहाली कायम करने के लिए है। देखा जाए, तो पाक और अफगानिस्तान की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। अगर एक देश में सुरक्षा की सूरत ठीक नहीं होगी, तो दूसरे देश की सुरक्षा भी दुरुस्त नहीं रह सकती। ड्रोन हमलों के पक्ष में अमेरिका ने दलील दी है कि अफगानिस्तान में तैनात उसकी फौजों पर हमला करने वालों को जवाब देने का उसे पूरा अधिकार है।

अमेरिका का यह भी मानना है कि महसूद के मारे जाने के बाद अफगानिस्तान में उसकी फौजें अधिक सुरक्षित हुई हैं। तहरीक-ए-तालिबान ने महसूद के मारे जाने के बाद अपने संगठन का मुखिया कमांडर मुल्ला फजलुल्लाह को नियुक्त किया है। इस नियुक्ति से पता चलता है कि अति कट्टरपंथी तत्वों ने इस संगठन को अपने कब्जे में ले लिया है।

मुल्ला को 'मुल्ला रेडियो' के नाम से भी जाना जाता है। वह एक अवैध एफएम स्टेशन पर आक्रामक संदेश देता है। काबिले गौर है कि लड़कियों की शिक्षा की पैरोकार मलाला यूसुफजई की हत्या का फरमान जारी कर मुल्ला सुर्खियों में आया था। मुल्ला ने घोषणा की है कि तालिबान अब महसूद की हत्या का बदला लेने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे।

उल्लेखनीय है कि उक्त हमला पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की हाल ही की सरकारी अमेरिका यात्रा के चंद दिन बाद हुआ, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति ओबामा से ड्रोन हमले बंद करने की अपील की थी। शरीफ कहते रहे कि ऐसे हमले उनके देश की संप्रभुता में हस्तक्षेप है, लेकिन ओबामा ने साफ शब्दों में उन्हें बता दिया कि जब तक वह जरूरी समझेंगे, पाक क्षेत्र में ड्रोन हमले जारी रहेंगे।

ठीक इसी समय अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित हुई एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इस्लामाबाद इन हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता रहा है। मुशर्रफ व जरदारी के राष्ट्रपति के दौर में भी शीर्ष नेतृत्व की प्रत्यक्ष जानकारी में पाक के कई ठिकानों पर लगातार अमेरिकी ड्रोन हमले होते रहे।


आम ख्याल यह है कि शरीफ का अमेरिका दौरा नाकाम साबित हुआ और उन्हें खाली हाथ देश लौटना पड़ा। ओबामा ने कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका द्वारा भारत और पाक के बीच मध्यस्थता करने से एक बार फिर इंकार कर दिया, क्योंकि अमेरिका कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय मुद्दा मानता है। ओबामा ने शरीफ से मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए हमले, जिसे अब पांच वर्ष हो रहे हैं, के मुकदमे की सुनवाई में देरी पर भी जवाब मांगा। अमेरिका और पाकिस्तान में तनाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और वह आगे चलकर गंभीर सूरत भी ले सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed