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आथिक क्रांति का सूत्रपात

Wed, 12 Jul 2017 05:23 PM IST
अनिल बलूनी
अनिल बलूनी Updated Wed, 12 Jul 2017 05:23 PM IST
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Initiation of economic revolution
अनिल बलूनी
देश के इतिहास में एक जुलाई, 2017 की तारीख हमेशा याद रखी जाएगी। आधी रात को संसद का विशेष सत्र और प्रधानमंत्री का सारगर्भ‌ि‌त भाषण जीएसटी के लागू होने को यादगार बना गया। सही मायने में यह दिन भारत में आर्थ‌िक क्रांति के सूत्रपात के तौर पर जाना जाएगा। मंच में जब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, (जिनका पूर्व में जुड़ाव कांग्रेस से रहा हो) तथा पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा हों, जिन्हें 1996 में सिर्फ इसलिए प्रधानमंत्री बनाया गया, तब प्रधानमंत्री की अगुआई में जीएसटी को भारतीयों के लिए बदलाव का ध्वजवाहक बताना दिलचस्प था।
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प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के बाद दूसरे प्रधानमंत्रियों के भाषणों से उनकी तुलना होने लगी। खासकर पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के उस संबोधन से, जो उन्होंने 15 अगस्त, 1947 की मध्यरात्रि को संसद के सभागार में दिया था। शख्सियत, लोकप्रियता, सम्मान और चुनाव जीतने की योग्यता के मानदंड पर कोई किसी से कम नहीं दिखता। एक नियति के मातहत चलता रहा, तो दूसरे ने दृढ़ निश्चय से अपना मार्ग खुद प्रशस्त किया। पंडित नेहरू का अंदाज विशेष था। उनका हर शब्द मानो प्रेरित करता था। ऐसे ही जनमानस से सीधा संवाद करने की विशेषता प्रधानमंत्री मोदी को दूसरों से अलग करती है।
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जीएसटी समय की जरूरत है। यह 125 करोड़ भारतवासियों के विकास के लिए उठाया गया ऐतिहासिक कदम है। यह भाव जन-जन के मन में उतारने की सम्मोहक क्षमता प्रधानमंत्री मोदी में ही है कि इस नए कदम को देशवासी सहजता से स्वीकार कर सकें। एक अलग वैचारिक भाव को मानने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषण में महात्मा गांधी, सरदार पटेल, बाबासाहब अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरोजिनी नायडू और आचार्य कृपलानी का नाम लेना नहीं भूले।
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जीएसटी की सफलता को निजी न बताते हुए मोदी इसे टीम इंडिया की सफलता का परिचायक करार देते हैं। वह गैरभाजपा शासित राज्यों की प्रशंसा करना भी नहीं भूलते। मोदी की हिंदी जनमानस के सीधे दिल में उतरती है। आज गांव के आखिरी छोर पर बैठा व्यक्ति भी प्रधानमंत्री से अपने को जोड़ पाता है। यह बात सच है कि पंडित नेहरू ने डिस्कवरी ऑफ इंडिया को पुस्तक का रूप दिया।

ऐसे ही एक जुलाई, 2017 की मध्यरात्रि के अपने भाषण में मोदी ने भारत के विकसित, उज्ज्वल और प्रगतिशील भविष्य पेश कर लोगों का दिल जीत लिया। अपने उद्बोधन में उन्होंने लोगों के मन में भारत के शक्ति बोध और सौंदर्य बोध का जो भाव पिरोया, वह अत्यंत आकर्षक था। सत्तर साल से अपने हक का इंतजार कर रहे गरीबों का सपना कैसे पूरा होगा, यह विश्वास दिलाने मे प्रधानमंत्री कामयाब रहे हैं। यह मोदी की ही ताकत है कि वह सामान्य जनमानस में यह भाव पैदा कर देते हैं कि जीएसटी से व्यापार, नौकरी,बाजार जैसे क्षेत्रों में भारी प्रगति होगी।


जीएसटी के लिए बुलाए गए विशेष सत्र से कांग्रेस की बेरुखी भी कइयों के गले नहीं उतर रही। कभी जीएसटी की सबसे बड़ी पैरोकार रही कांग्रेस का नदारद रहना समझ से परे था। खासकर तब, जब कांग्रेस को छोड़ सारे राजनीतिक दल कार्यक्रम में मौजूद थे। कार्यक्रम में न जाकर और उसे तमाशा बताकर कांग्रेस क्या साबित करना चाहती है, यह तो वही बता सकती है, पर इतना तय है कि कांग्रेस का नेतृत्व बदलते राजनीतिक सच का सामना करने के बजाय मुंह चुरा रही है। 
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