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औद्योगिक क्रांति गुजरात में हुई थी
शरद उपाध्याय
Updated Mon, 05 May 2014 07:24 PM IST
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आधुनिक वैज्ञानिक शोध से साफ हो गया है कि डार्विन की विकासवाद की थ्योरी गलत है। विकासवाद सर्वप्रथम इंग्लैंड में नहीं, गुजरात में प्रकट हुआ था। यह भी भ्रांति है कि पत्थर से पत्थर की रगड़ से आग का अविष्कार हुआ। सत्तारूढ़ दल के कुशासन के कारण गुजराती मानव के मन में विरोध के जन्म से आग प्रचलन में आई। गुजरात के विकास से मनुष्य के मन में सहज ही आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त हुई, जिससे वह पहिये का अविष्कार कर सका। पुराणों के रचयिताओं ने भी गुजरात प्रशासन का स्वर्णकाल देखकर स्वर्ग की कल्पना की।
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गुजरात का विकास इतना अद्भुत हुआ है कि लोग इसे पृथ्वी मानते ही नहीं। एक बार अमेरिका से नील आमस्ट्रांग उड़े, तो कच्छ के रण में उतरने पर समझ बैठे कि वह चांद पर आ गए हैं! ताजा रिसर्च से पता चलता है कि औद्योगिक क्रांति भी गुजरात में हुई थी।
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स्वर्ग के जन्मस्थान विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, पहले महात्मा गांधी जी का जन्म स्थान उत्तर प्रदेश अलॉट हुआ था। लेकिन फिर उसे चेंज कर गुजरात कर दिया गया, क्योंकि एक महापुरुष को गुजरात के अलावा कहीं और जन्म नहीं दिया जा सकता था।
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आर्कमिडीज ने सापेक्षता का सिद्धांत गुजरात भ्रमण पर खोजा था, क्योंकि इतनी प्रचुर मात्रा में टब भर पानी केवल गुजरात में मिल सकता था। गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत भी वहां गिर वन के पेड़ के नीचे न्यूटन ने खोजा। इन सभी को चुराकर ‘इटली’ के रास्ते यूरोप पहुंचाया गया। इसमें किसका ‘हाथ’ था, यह किसी से छिपा नहीं है।
पृथ्वी की उत्पत्ति की भी नई थ्योरी प्रकाश में आई है। अंतरिक्ष विज्ञानी एकमत हैं कि पूर्व में ‘गुजरात’ नामक बड़ा तारा अस्तित्व में था। समय के साथ मोदी प्रभाव के कारण उसमें तेज विस्फोट हुए, जिससे क्रमशः पृथ्वी, मंगल, बुध, शुक्र, वृहस्पति व अन्य ग्रहों की उत्पत्ति हुई। हालांकि विज्ञान मानता है कि ये सभी सूर्य के उपग्रह हैं। वैसे कालांतर में सरकार बनने की दशा में सूर्य का नाम बदलकर गुजरात करने का अध्यादेश लाया जा सकता है।