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जानना जरूरी है: किसके शाप से हुआ सीता का परित्याग? धोबी के रूप तोते के जन्म से जुड़ी है कथा

Sun, 18 May 2025 06:40 AM IST
Ashutosh Garg आशुतोष गर्ग
Updated Sun, 18 May 2025 06:40 AM IST
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सार
सीता जी ने जब शुकी को नहीं छोड़ा, तो उसने क्रोध व दुख में उनको शाप दिया, ‘जिस प्रकार तुम मुझे गर्भावस्था में अपने पति से विलग कर रही हो, वैसे ही तुम्हें स्वयं भी गर्भिणी अवस्था में श्रीराम से अलग होना पड़ेगा।’
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Indian Mythology Sita abandonment from ayodhya and curse story related to birth of a parrot as washerman
सीता परित्याग की कथा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

एक दिन राजा जनक की पुत्री सीता अपनी सखियों के साथ उद्यान में खेल रही थीं। वहां तोते का जोड़ा बात कर रहा था, ‘पृथ्वी पर श्रीराम नाम से एक बड़े प्रसिद्ध राजा होंगे। वे अपनी पत्नी सीता के साथ ग्यारह हजार वर्षों तक राज्य करेंगे।’ तोते की बातें सुनकर सीता ने सोचा, ‘ये मेरे ही जीवन की कथा कह रहे हैं। इन्हें पकड़ लूं, तो और बातें पता लग सकती हैं।’ यह सोचकर सीता ने अपनी सखियों के साथ तोते के जोड़े को पकड़ लिया। सीता ने पक्षियों से कहा, ‘मुझे बताओ, राम कौन हैं? सीता कौन हैं? तुम्हें उनकी जानकारी कैसे हुई?’



पक्षी सीता से बोले, ‘देवी! हम दोनों महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहते हैं। महर्षि, अपने शिष्यों के साथ प्रतिदिन राम की कथा पर चिंतन करते हैं। हमने उन्हीं से राम और सीता के बारे में सुना है। महर्षि ऋष्यशृंग द्वारा कराए पुत्रेष्टि-यज्ञ के प्रभाव से भगवान विष्णु ही राम के रूप में अवतार लेंगे। वे जनक नरेश की कन्या सीता के स्वयंवर में धनुष-भंग करेंगे, जिसके बाद सीता से राम का विवाह हो जाएगा। फिर उन्हीं के साथ श्रीराम अपने साम्राज्य का पालन करेंगे। हमें जो कुछ पता था, वह सब हमने तुम्हें बता दिया। अब तुम हमें छोड़ दो।’ इसके बाद सीता ने पक्षियों से पूछा, ‘मनुष्य अवतार में राम का श्रीविग्रह कैसा होगा?’ 


शुकी मन-ही-मन जान गई कि ये ही सीता हैं। वह सीता के चरणों में गिरकर बोली, ‘श्रीरामचंद्र का मुख कमल के समान सुंदर होगा। उनके नेत्र बड़े और खिले हुए पंकज के समान होंगे। नासिका ऊंची, दोनों भौंहें अत्यंत सुंदर होंगी। भुजाएं घुटनों तक लटकी हुई होंगी। गला, शंख के समान सुशोभित होगा। वक्षःस्थल चौड़ा एवं श्रीवत्स-चिह्न से युक्त होगा। उनके चरण भी परम शोभायुक्त होंगे। जिसके सौ मुख हैं, वह भी उनके गुणों का बखान नहीं कर सकता। फिर हमारे जैसे पक्षी की क्या बिसात है? उनका बल और पराक्रम महान है। वे अत्यंत मोहक रूप धारण करने वाले हैं। वे सब प्रकार के ऐश्वर्यमय गुणों से युक्त हैं। परम मनोहर रूप वाली जानकी देवी धन्य हैं, जो श्रीराम के साथ हजारों वर्षों तक प्रसन्नतापूर्वक विहार करेंगी। सुंदरी! तुम कौन हो? श्रीरामचंद्र जी के गुणों का कीर्तन सुनने के लिए इतने प्रश्न क्यों कर रही हो?’

तब सीता ने पक्षियों को अपना परिचय दिया, ‘जिसे तुम जानकी कह रहे हो, वह जनक की पुत्री मैं ही हूं। श्रीराम जब मुझे स्वीकार करेंगे, तभी मैं तुम दोनों को छोड़ूंगी। तुम इच्छानुसार मेरे घर में सुख से रहो।’

यह सुनकर शुकी ने जानकी से कहा, ‘हम वन के पक्षी हैं, हमें तुम्हारे घर में सुख नहीं मिलेगा। मैं गर्भिणी हूं, अपने स्थान पर जाकर बच्चे पैदा करूंगी। उसके बाद फिर तुम्हारे यहां आ जाऊंगी। मुझे छोड़ दो।’ परंतु सीता ने उसे नहीं छोड़ा। तब उसके पति ने भी सीता से शुकी को छोड़ने का आग्रह किया। तोते के ऐसा कहने पर सीता ने कहा, ‘तुम चाहो तो जा सकते हो, किंतु तुम्हारी पत्नी मेरे पास रहेगी। मैं इसे नहीं छोड़ूंगी।’


यह सुनकर तोता दुखी स्वर में बोला, ‘सीता! मैं अपनी भार्या के बिना जीवित नहीं रह सकता। तुम अच्छी हो, इसलिए मेरी प्रार्थना मान लो।’ परंतु सीता ने तोते की पत्नी को नहीं छोड़ा। तब शुकी ने क्रोध और दुख से आकुल होकर जानकी को शाप दिया, ‘जिस प्रकार तुम मुझे गर्भावस्था में अपने पति से विलग कर रही हो, वैसे ही तुम्हें स्वयं भी गर्भिणी अवस्था में श्रीराम से अलग होना पड़ेगा।’ ऐसा कहते हुए पति-वियोग के शोक से शुकी ने श्रीराम का स्मरण करते हुए प्राण त्याग दिए। पत्नी की मृत्यु हो जाने पर तोता शोक से आतुर होकर सीता से बोला, ‘आपके कारण मुझे यह दुख हुआ है। इसलिए मैं श्रीराम की नगरी में जन्म लूंगा तथा मेरे कहे शब्दों के कारण आपको पति-वियोग का कष्ट सहना पड़ेगा।’

जो प्राणी बड़े लोगों की बुराई करता है, वह मरने के बाद नीच योनि में जन्म लेता है। तोते के साथ यही हुआ। सीता का अपमान करने के कारण तोते ने धोबी के रूप में जन्म लिया। उस धोबी के कथन के कारण ही सीता निंदित हुईं और शुकी के शापवश उन्हें भी गर्भावस्था में अपने पति से अलग होना पड़ा।

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