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आर्थिकी: उपभोक्ता बाजार ही हमारी ताकत है... 2026 में 4,700 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता

Thu, 20 Mar 2025 05:30 AM IST
Jayantilal Bhandari जयंतीलाल भंडारी
Updated Thu, 20 Mar 2025 05:30 AM IST
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सार
यह बाजार की ही ताकत है कि 2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 3,500 अरब डॉलर था, जो 2026 में 4,700 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
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Indian Economy Consumer market is our strength potential to reach 4700 billion USD in 2026
शोरूम पर गहने देखते ग्राहक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इन दिनों भारतीय बाजार और भारत में तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग से संबंधित विषयों पर प्रकाशित हो रहीं राष्ट्रीय और वैश्विक रिपोर्टों में यह रेखांकित हो रहा है कि जहां भारत के मध्यम वर्ग की ऊंची खरीद क्षमता की बदौलत भारत का उपभोक्ता बाजार छलांग लगाकर आगे बढ़ रहा है, वहीं दुनिया के कई देश व  वैश्विक कंपनियां भारतीय बाजार के दरवाजों पर दस्तक देती हुए दिखाई दे रही हैं।



 गत 13 मार्च को वित्तीय सेवा फर्म मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि भारत का उपभोक्ता बाजार भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत बन गया है। यह भारत के मजबूत उपभोक्ता बाजार की ही ताकत है कि वर्ष 2023 में भारतीय अर्थव्यवस्था का जो आकार 3,500 अरब डॉलर था, उसके वर्ष 2026 में 4,700 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इससे अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा। इतना ही नहीं, वर्ष 2028 में भारत 5,700 अरब डॉलर के आकार की अर्थव्यवस्था के साथ जर्मनी से आगे निकल जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दशकों में भारत वैश्विक उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है, जिसके पीछे मजबूत आधारभूत कारक हैं, जिसमें मजबूत जनसंख्या वृद्धि, एक कार्यशील लोकतंत्र, आर्थिक स्थिरता से प्रभावित नीति, बेहतर बुनियादी ढांचा, एक बढ़ता हुआ उद्यमी वर्ग और बेहतर होता सामाजिक ढांचा शामिल है।


निस्संदेह, देश के उपभोक्ता बाजार को देश का मध्यम वर्ग नई आर्थिक ताकत दे रहा है। भारत में आर्थिक सुधारों के साथ ऊंची विकास दर और शहरीकरण की ऊंची वृद्धि दर के बलबूते मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हाल ही में प्रकाशित द राइज ऑफ मिडिल क्लास इंडिया नामक डॉक्यूमेंट के मुताबिक भारत के मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या तेजी से बढ़कर 2020-21 में लगभग 43 करोड़ हो गई है और 2047 तक यह संख्या बढ़कर 102 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। मध्यम वर्ग को पांच लाख से 30 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले परिवारों के रूप में परिभाषित किया गया है। रिसर्च फर्म कांतार की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2030 तक सालाना 10 हजार डॉलर से अधिक आय वाले भारतीयों की संख्या तीन गुना हो जाएगी। यह 2024 में लगभग 6 करोड़ थी, जो 2030 तक 16.5 करोड़ होगी।

हाल ही में डेलॉयट इंडिया और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) द्वारा जारी इंडियाज डिस्क्रेशनेरी स्पेंड इवॉल्यूशन रिपोर्ट के मुताबिक भारत का उपभोक्ता बाजार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। भारत के उपभोक्ता बाजार में जो निजी खपत वर्ष 2013 में 87 लाख करोड़ रुपये मूल्य की थी, वह वर्ष 2024 में दोगुनी से भी अधिक 183 लाख करोड़ रुपये से ऊपर निकल गई है। भारत के मध्यम वर्ग की मुट्ठियों में बढ़ती क्रय शक्ति और जेन जी एवं मिलेनियल्स की आंखों में उपभोग और खुशहाली के जो सपने दिखाई दे रहे हैं, उनके कारण दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने नामी ब्रांडों के साथ भारत के बहुआयामी उपभोक्ता बाजार में तेजी से पैर पसार रही हैं। प्रौद्योगिकी से लेकर परिधान, सौंदर्य, फैशन और मनोरंजन क्षेत्र के दिग्गज ब्रांड अब भारत के बड़े महानगरों से होते हुए टियर-2 और टियर-3 शहरों की तरफ बढ़ चले हैं।

यह कोई छोटी बात नहीं है कि भारत के आर्थिक विकास का इंजन बन गए मध्यम वर्ग के कारण दुनिया में पिछले 10 वर्षों में खपत बढ़ने की दर सबसे अधिक भारत में ही रही है। आय में बढ़ोतरी के साथ ही आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने वालों की संख्या 2013-14 में चार करोड़ से बढ़कर 2024-25 में नौ करोड़ से अधिक हो गई है।

इसका श्रेय अधिक कर लाभ, बढ़ी हुई पेंशन योजनाएं, सस्ते आवास के लिए बढ़ा हुआ समर्थन, उद्यमियों को अधिक वित्तीय सहायता और टिकाऊ बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने को जाता है। इन सबके साथ-साथ एक अप्रैल 2025 से प्रभावी होने वाला वित्त वर्ष 2025-26 का बजट करदाताओं, निवेशकों तथा मध्यम वर्ग की क्रय क्षमता बढ़ाते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, अब भी मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से से आरामदायक आवश्यकताओं की पूर्ति, प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं तक उपयुक्त पहुंच दूर बनी हुई है। ऐसे में डिजिटल विभाजन को पाटना, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा, ग्रामीण विकास का समर्थन करके मध्यम वर्ग का सशक्तीकरण बढ़ाया जा सकेगा। हम उम्मीद करें कि वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 साल पूरे करेगा, तब तक देश में मध्यम वर्ग के लोगों की संख्या एक अरब से भी अधिक हो जाएगी और इस वर्ग की ऊंचाई पर स्थित क्रय शक्ति के कारण भारत का उपभोक्ता बाजार दुनिया में सर्वोच्च होगा।

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