फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   india-heatwave-rising-temperature-night-heat-stress-climate-change

नहीं मयस्सर रात को भी चैन: पिछले चार दशकों में भारत का औसत तापमान लगभग 0.5 से 0.9 डिग्री तक बढ़ा

Wed, 06 May 2026 07:43 AM IST
Seema Javed सीमा जावेद
Updated Wed, 06 May 2026 07:43 AM IST
विज्ञापन
सार
फिलहाल गर्मी से राहत जरूर मिली है, पर अप्रैल में उसने जो तेवर दिखाए, उससे पता चलता है कि आगामी दिनों में हीट स्ट्रेस दिन के साथ रात का भी चैन छीन सकता है।
loader
india-heatwave-rising-temperature-night-heat-stress-climate-change
भारत में बढ़ती गर्मी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

फिलहाल कुछ दिनों से गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन पिछले महीने उसने जो तीखे तेवर दिखाए, उससे यही पता चलता है कि आने वाले समय में हीट स्ट्रेस दिन के साथ-साथ रात की नींद व सुकून भी छीन सकता है। अप्रैल में ही पारा चालीस डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाना भारत में लोगों की जिंदगी की एक हकीकत बन चुकी है। मौसम विभाग ने भी कहा है कि इस वर्ष गर्मी ज्यादा पड़ेगी और मानसून सामान्य से कम बरसेगा। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी अप्रैल से जून के बीच सामान्य से ज्यादा हीटवेव (लू) दिनों की आशंका जताई है।


पिछले चार दशकों में भारत का औसत तापमान लगभग 0.5 से 0.9 डिग्री तक बढ़ा है। यही ‘बेसलाइन वार्मिंग’ अब हर हीटवेव को पहले से और तेज बना रही है। 28 अप्रैल को ‘एक्यूआई डॉट इन’ के रियल टाइम डाटा के मुताबिक, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में नब्बे से भी ज्यादा भारत के थे। वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन और क्लाइमामीटर द्वारा किए गए वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है और अब हीटवेव पहले से ज्यादा जल्दी-जल्दी आने लगी हैं। साथ ही, उसकी संभावना भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। इस विश्लेषण में पिछले 10 वर्षों (2014-2023) में गर्मियों के दौरान 20 डिग्री और 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली रातों की संख्या पर गौर किया गया है।


कंपाउंड हीट वेव्स एक्रॉस इंडियन स्मार्ट सिटीज (द साउथ फर्स्ट, अप्रैल 2026) अध्ययन में पाया गया कि दिन और रात, दोनों ही समय लगातार चलने वाले हीट स्ट्रेस भारतीय शहरों का पैटर्न बन गए हैं। वैज्ञानिक इसे इस तरह समझाते हैं, ‘दरअसल जलवायु परिवर्तन स्वयं हीटवेव पैदा नहीं करता, पर जब मौसम गर्म होता है, तो उसका असर पहले से ज्यादा गर्म, लंबा और तीखा होता है।’ कंक्रीट की बहुमंजिला इमारतों से भरे दिल्ली, नोएडा, लखनऊ, नागपुर और हैदराबाद जैसे महानगरों में घनी आबादी व कम हरियाली के कारण दिन तो बेहद गर्म रहते ही हैं, रातें भी ठंडी नहीं हो पातीं। इसे ‘अर्बन हीट आइलैंड’ कहा जाता है। नेचर इंडिया में प्रकाशित वर्ष 2022 के एक अध्ययन में दक्षिण एशिया के कम आमदनी वाले नगरीय इलाकों के अंदरूनी तापमान के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इसमें पाया गया कि घनी आबादी और कम आमदनी वाले ऐसे इलाके, जहां पर हरियाली नहीं है, वहां दिन में बाहर के मुकाबले घरों के अंदर ज्यादा गर्मी होती है और यह रात में भी बरकरार रहती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की 2025 की स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट रिपोर्ट के अनुसार, 2015-2025 सबसे गर्म 11 साल रहे हैं। 2025 दूसरा सबसे गर्म साल था, जो 1850-1900 के औसत से करीब 1.43 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था।

गर्मी का तनाव एक बढ़ती हुई समस्या है। वैश्विक कार्यबल का एक-तिहाई से अधिक हर साल कार्यस्थल पर गर्मी के जोखिम का सामना करता है, विशेष रूप से कृषि व निर्माण में लगे लोग। लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, थकान बढ़ने के साथ हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही, मजदूरों व कामगारों की काम करने की क्षमता और कमाई पर भी बुरा असर पड़ता है।

अर्थ्स फ्यूचर में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, 1980 से 2021 के बीच खुले आसमान के नीचे उत्पन्न होने वाला हीट स्ट्रेस उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और इसकी वजह से दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में श्रमिकों की कार्य क्षमता में करीब 10 फीसदी की गिरावट आई है। क्लाइमेट सेंट्रल के विश्लेषण से जाहिर होता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब, जम्मू-कश्मीर व आंध्र प्रदेश में 2018 से 2023 के बीच हर साल तपिश से भरे तकरीबन 50 से 80 दिन जुड़ते जा रहे हैं। मुंबई में रात के तापमान में सबसे ज्यादा बदलाव देखे गए हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण इस शहर को 65 अतिरिक्त गर्म रातों का अनुभव करना पड़ रहा है।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अच्छी व आरामदायक नींद के लिए रात का तापमान करीब 24 से 25 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। इससे अधिक तापमान होने से नींद व स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह इन्सान के शरीर को ठंडा होने की क्षमता को कम कर देती है और गर्मीजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, गैर-संचारी रोग, जैसे मधुमेह और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियां और भी जोर पकड़ लेती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed