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नीति: मिशन लाइफ का केंद्र है जल प्रबंधन, जी-20 सम्मेलन में भी उठेगी बात

Gajendra Singh Shekhawat गजेंद्र सिंह शेखावत
Updated Fri, 14 Apr 2023 07:31 AM IST
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सार
भारत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग से जल प्रबंधन में जी-20 सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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india G20 presidency Water Resource Management Mission Life issues to be discussed in G20 Summit
जी20 (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जलवायु परिवर्तन की उत्पत्ति का पता 'ट्रेजेडी ऑफ कॉमन्स' नामक एक आर्थिक सिद्धांत से लगाया जा सकता है, जो बताता है कि जब व्यक्तियों के पास एक समान संसाधन तक पहुंच होती है, तो वे अपने हित में कार्य करते हैं, दूसरों पर उनके प्रभाव को देखते हुए स्वार्थी निर्णय लेते हैं। पृथ्वी हमारा साझा संसाधन है, और इसी मानवीय प्रवृत्ति ने हमें जलवायु परिवर्तन के रूप में ज्ञात इस खतरे में धकेला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 ग्लासगो में आयोजित सीओपी-26 में इस पर प्रकाश डाला। एक पहलू जिसे उन्होंने समझाया, वह थी, एलआईएफई (लाइफ) की अवधारणा यानी 'पर्यावरण के लिए जीवन शैली'। मिशन लाइफ का केंद्र जल है।



जब भारत ने एक दिसंबर, 2022 को जी-20 की अध्यक्षता संभाली, तो हमने 'वसुधैव कुटुंबकम' के आदर्श वाक्य के साथ 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के दृष्टिकोण को साझा किया। यदि दुनिया को जलवायु परिवर्तन के संकट से जीतना है, तो जी-20 देशों को अत्यधिक प्रयास करना होगा, क्योंकि दुनिया का 80 फीसदी उत्सर्जन इन देशों के कारण होता है। यद्यपि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव व्यापक है, यहां जल संसाधन प्रबंधन की चर्चा की जा रही है।


भारत तकनीकी अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अत्याधुनिक उपकरणों और प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जी-20 सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का मानना है कि जल हमारे विकास प्रतिमान के केंद्र में होना चाहिए।

27-29 मार्च, 2023 के दौरान गांधीनगर में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित पर्यावरण और जलवायु स्थिरता कार्य समूह (ईसीएसडब्ल्यूजी) की दूसरी बैठक में जलशक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में जल संसाधन प्रबंधन पर एक कार्यक्रम था। जल सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराने के लिए एकत्रित देशों के साथ, भारत ने फिर से पुष्टि की कि उसकी प्राथमिकताएं, नीति और कार्य एसडीजी द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित रूप से जुड़े हैं। जल संसाधनों के एकीकृत और सतत उपयोग/पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन, जल निकाय पुनरुद्धार, नदी संरक्षण, वर्षा जल प्रबंधन आदि  विविध विषयों पर कई प्रस्तुतियां दी गईं, जो सभी जी-20 सदस्यों के लिए बहुत मूल्यवान होंगी।

मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार ने अपने 1.4 अरब लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई पहल की है। देश में जल प्रबंधन के लिए अधिक तालमेल और सामंजस्य रखने के लिए एकीकृत जलशक्ति मंत्रालय का सृजन किया गया था।

दुनिया के सबसे बड़े पेयजल आपूर्ति कार्यक्रम जल जीवन मिशन के माध्यम से, आज 11.6 करोड़ से अधिक घरों में नल के पानी का कनेक्शन प्रदान किया गया है। हाल के अध्ययनों के अनुसार, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से पांच वर्ष से कम आयु के 1.36 लाख बच्चों का जीवन बचाया जा सकेगा। हमारे अन्य प्रमुख अभियान, स्वच्छ भारत अभियान ने 10 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण से भारत को 100 फीसदी खुले में शौच से मुक्त बना दिया, जिसने विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, तीन लाख बच्चों के जीवन को बचाया।

भारत ने जलवायु लचीलेपन के लिए रणनीतियों के माध्यम से जल संसाधन विकास पर किए गए कार्यों को भी साझा किया, जिसमें महत्वपूर्ण जल भंडारण के बुनियादी ढांचे और भागीदारी, भूजल के बेहतर प्रबंधन के लिए बांध पुनर्वास कार्यक्रम शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल ने भारत की प्राचीन जल प्रबंधन प्रथाओं को देखने के लिए गुजरात के अडालज वाव में बावड़ी का भी दौरा किया। इसके बाद साबरमती साइफन संरचना का दौरा किया, जो एक आधुनिक इंजीनियरिंग चमत्कार है, जिसने चुनौतीपूर्ण जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को डिजाइन और निष्पादित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया। दूसरी ईसीएसडब्ल्यूजी बैठक एक स्थायी भविष्य की दिशा में जी-20 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रयासों को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम है।
-लेखक , केंद्रीय जल शक्ति मंत्री हैं।

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