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बड़ी सैन्य ताकत बनने की राह पर

Sat, 15 Aug 2020 08:10 AM IST
Harsh Kakkar हर्ष कक्कड़
Updated Sat, 15 Aug 2020 08:10 AM IST
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independence day : On the way to becoming a big military force
लाल किला - फोटो : पीटीआई

पिछला एक वर्ष प्रतिरक्षा प्रबंधन में बड़े सुधारों के साथ ही चीन के साथ गतिरोध का गवाह रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से पहले बड़े सुधार की घोषणा की थी। उन्होंने लंबे समय से प्रतीक्षित चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की स्थापना की मांग को पूरा किया। जनरल बिपिन रावत ने इसी के फलस्वरूप एक जनवरी को देश के पहले सीडीएस के रूप में काम संभाला।


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इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय के अधीन सैन्य मामलों के विभाग का भी गठन हो सका। इस एक कदम से सैन्य मामलों से संबंधित निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशस्त्र बलों की भूमिका बढ़ गई है। भविष्य के युद्धों के लिए जरूरी समझे जा रहे थियेटर कमांड की स्थापना की दिशा में भी प्रगति हो रही है।

थियेटर कमांड ऐसा सैन्य ढांचा होता है, जिसमें तीनों सेनाओं के साजो-सामान एक तीन सितारा जनरल के अधीन होते हैं। सीडीएस की नियुक्ति से रक्षा बजट को निर्धारित करने में सशस्त्र बलों की भागीदारी में बदलाव देखा गया है। आखिरकार रक्षा मंत्रालय में उनकी भूमिका सुनिश्चित हुई है। बेशक कुछ कमियां हैं, मगर वह भी दूर हो जाएंगी।

भारत सैन्य साजो-सामान का दूसरा बड़ा आयातक है। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में कुछ और सुधारों की घोषणा की। उन्होंने जोरदार तरीके से रक्षा विनिर्माण में देश को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया। यह बहुत आवश्यक है, क्योंकि कोई भी देश तब तक सैन्य ताकत के रूप में नहीं उभर सकता, जब तक कि उसकी सशस्त्र सेनाएं साजो-सामान के लिए आयात पर निर्भर हों।

इस दिशा में पहला कदम आयुध फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) का निगमीकरण है,  जिसकी सिफारिश वर्षों से लंबित थीं। रक्षा प्रबंधन के आकलन के लिए गठित हर कमेटी ने इसकी सिफारिश की थी। संसदीय समितियों और कैग की रिपोर्ट में ओएफबी में तैयार उपकरणों और गोलाबारूद की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

अगला बड़ा कदम रक्षा संबंधी 110 सामानों के आयात पर रोक लगाने की घोषणा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक, इसकी वजह भारतीय रक्षा उद्योग को सशस्त्र बलों की जरूरतों से अवगत कराना है, ताकि वे स्वदेशीकरण के लक्ष्यों को हकीकत में बदल सकें। इससे रक्षा उत्पादन से जुड़े एमएसएमई को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे भारतीय आईटी कंपनियों के लिए भी दरवाजे खुलेंगे।

इस साल सैन्य बलों से कई बड़ी चीजें जुड़ीं। इनमें सबसे नया है राफेल विमान। उससे पहले एम777 तोप, धनुष और वज्र जैसी तोपों के साथ ही चिनूक तथा अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर सेना को मिल चुके हैं। मगर लद्दाख में चीन की घुसपैठ की घटना से तनाव भी बढ़ा। सरहद पर दोनों ओर सैनिकों की तैनाती से तनाव बढ़ा है, लेकिन इस संकट को खत्म करने के लिए बातचीत भी जारी है।

ऐसे संकेत हैं कि यह तनाव जल्द खत्म नहीं होने वाला, लिहाजा सर्दियों तक सैनिकों की तैनाती जारी रखने की तैयारी है। चीनी घुसपैठ के कारण सरकार को ऐसे समय रक्षा खर्च बढ़ाना पड़ा है, जब देश दशकों बाद भयंकर आर्थिक सुस्ती के संकट का सामना कर रहा है। जाहिर है, राष्ट्रीय सुरक्षा को मिल रही चुनौतियों का उचित स्तर पर सही तरह से आकलन नहीं किया गया था।

गलवां घाटी में हुए संघर्ष में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए और चीन के भी कई सैनिक हताहत हुए। इस टकराव से भारत और चीन के रिश्ते निचले स्तर पर आ गए। वहीं जम्मू और कश्मीर में पिछले वर्ष किए गए बदलाव के बाद से सुरक्षा बलों को आतंकवादियों को बैकफुट पर लाने में सफलता मिली है।

इसके अलावा संघर्ष विराम उल्लंघन की पाकिस्तान की कोशिशों को करारा जवाब दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर यही उम्मीद की जा सकती है कि चीन के साथ तनाव संवाद के जरिये खत्म होगा, कश्मीर में शांति कायम रहेगी और पाकिस्तान बचाव की मुद्रा में होगा। (लेखक रिटायर्ड मेजर जनरल हैं।)

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