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बढ़ती आबादी बढ़ाएगी प्रवासन: भारत अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में गिरावट के लिए तैयार है
Thu, 11 Jul 2019 06:11 AM IST
पत्रलेखा चटर्जी
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पत्रलेखा चटर्जी
Published by: पत्रलेखा चटर्जी
Updated Thu, 11 Jul 2019 06:11 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
सबसे पहले एक अच्छी खबर! हम इस बात पर खुश हो सकते हैं कि भारत अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में तेजी से गिरावट के लिए तैयार है। और यह कि आबादी बहुल हिंदी प्रदेश में बहुत कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। यह एक आशाजनक संकेत है। वर्तमान रुझानों के अनुसार, अगले दो दशकों में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि दर आधी फीसदी हो सकती है, सिर्फ बिहार में ही जनसंख्या वृद्धि दर एक फीसदी रहने की संभावना है।
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लेकिन जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण-2019 हमें बता रहा है, झारखंड के साथ ये राज्य अब भी 2021-41 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि में दो-तिहाई के हिस्सेदार होंगे, सिर्फ उत्तर प्रदेश और बिहार ही जनसंख्या वृद्धि में 40 फीसदी से ज्यादा के लिए जिम्मेदार होगा। जनसांख्यिकीय लाभांश, जिसकी हम इतनी चर्चा करते हैं, वास्तव में कामकाजी उम्र श्रेणी में जनसंख्या का उभार है। हिंदी प्रदेश लगातार जितने लोगों को रोजगार दे सकते हैं, उसकी तुलना में ज्यादा रोजगार तलाशने वालों को पैदा करते रहेंगे।
यह जमीनी हकीकत है। लोगों को रोजगार के लिए बाहर जाने और आकर्षित करने वाले कारक पहले से ही उत्तरी भारत के लोगों के भारी विस्थापन का कारण रहे हैं, जिनके चलते उत्तर भारत के लोग ज्यादा विकसित दक्षिण भारतीय राज्यों का रुख करते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण इसी बात की पुष्टि करता है कि इस प्रवृत्ति के आगे भी जारी रहने की संभावना है।
दक्षिण भारतीय राज्यों ने लगातार रोजगार सृजन के मार्ग का नेतृत्व किया है, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी और संबंधित रोजगारों में, इन्हीं विशेषताओं के कारण इस क्षेत्र में कंपनियों की संख्या, योग्य प्रतिभाओं के पुल की मौजूदगी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थान और तीन प्रमुख शहरी केंद्रों की सामीप्य निकटता है। लेकिन भारत के गरीब राज्यों के अनौपचारिक श्रमिकों के लिए दक्षिणी राज्यों के आकर्षण का केंद्र बने रहने की भी संभावना है।