इमरान के अमेरिका दौरे के मायने : यह वही ट्रंप हैं, जिन्होंने एक साल पहले पाक के खिलाफ ट्वीट किया था
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मुझे याद नहीं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पिछली बार अमेरिका में कब थे। इस हफ्ते इमरान खान डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए तैयार हो रहे हैं। लेकिन एक बात निश्चित है कि इमरान खान ने पिछली अमेरिकी यात्रा बहुत पहले की होगी, जब वह राजनीति में नहीं आए थे।
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मुझे याद नहीं कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पिछली बार अमेरिका में कब थे। इस हफ्ते इमरान खान डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए तैयार हो रहे हैं। लेकिन एक बात निश्चित है कि इमरान खान ने पिछली अमेरिकी यात्रा बहुत पहले की होगी, जब वह राजनीति में नहीं आए थे।
इमरान खान के अमेरिका जाने से बचने का एक कारण यह था कि उनकी साथी सीटा व्हाइट ने एक मामला दायर किया था, ताकि यह साबित हो जाए कि उनकी बेटी टायरिन जैद के पिता इमरान खान हैं। वे लंबे समय तक रिश्ते में रहे थे और कुछ खबरों के मुताबिक, इमरान खान ने सीटा व्हाइट को बताया था कि अगर वह बच्चा लड़का होता, तो वह उस पर दावा करता, लेकिन लड़की को वह नहीं अपनाएगा।
इमरान ने अमेरिकी अदालत में जाने से इनकार कर दिया और कहा था कि वह पाकिस्तान में मुकदमा लड़ेंगे। 1997 के आसपास लास एंजेलिस की अदालत ने फैसला दिया कि पांच वर्षीय बच्ची के पिता इमरान खान हैं। बाद में जब सीटा व्हाइट की असामयिक मृत्यु हो गई और उसने विरासत में कुछ नहीं छोड़ा, तो इमरान और उनकी पहली पत्नी जेमिमा खान ने टायरिन जैद को गोद ले लिया। फिलहाल टायरिन जैद अपने सौतेले भाई सुलेमान और कासिम के साथ लंदन में रह रही है और जेमिमा खान उसका खूब ख्याल रखती हैं, जो अब भी इमरान की दो अन्य पत्नियों से ज्यादा लोकप्रिय हैं।
लेकिन पिछले वर्ष आम चुनाव के दौरान इस पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि विपक्ष और यहां तक कि एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मामले को उठाया था। विपक्ष का तर्क कानूनी आधार पर था। संविधान के एक खंड के अनुसार, चुनाव लड़ने के लिए आपको अच्छे चरित्र का व्यक्ति होना चाहिए। उस दौरान सीटा व्हाइट और टायरिन जैद का नाम भी उछला था, लेकिन न तो शक्तिशाली न्यायपालिका, न चुनाव आयुक्त और न ही सेना ने इस मामले पर कोई ध्यान दिया।
यह भी उम्मीद की जाती है कि इमरान खान वाशिंगटन रवाना होने से पहले औपचारिक रूप से अफगान तालिबान के साथ कैमरे पर मिल सकते हैं। उनके साथ वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के भी आने की संभावना है, यहां तक कि सेना प्रमुख जनरल बाजवा भी हो सकते हैं। लेकिन अभी तक किसी के नाम को सार्वजनिक नहीं किया गया है। संकेत है कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका का रिश्ता रणनीतिक ही ज्यादा है।
पाकिस्तान ने इस द्विपक्षीय रिश्ते में विविधता लाने और व्यापार को प्राथमिकता देने की कोशिश की है, लेकिन यह मुश्किल है। हालांकि अमेरिका एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और पाकिस्तान इस रिश्ते को बढ़ाना चाहेगा। अतीत में अमेरिकियों के लिए अफगानिस्तान के अलावा एक और महत्वपू्र्ण मुद्दा पाकिस्तान की परमाणु नीति था। पश्चिमी जगत को यह आशंका थी कि तालिबान या कुछ अन्य आतंकी संगठनों की पाकिस्तान के परमाणु हथियारों तक पहुंच हो सकती है।
लेकिन चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान के शत्रु देशों से परमाणु रहस्य साझा करने की एक कोशिश हुई, जिसे किसी नागरिक या नॉन स्टेट ऐक्टर ने नहीं किया था। हाल ही में इंटर सर्विसेज प्रेस एजेंसी ने बयान जारी किया कि सेना के एक जनरल और एक ब्रिगेडियर सहित कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को शत्रु देश को परमाणु रहस्य देने की कोशिश करने के लिए मौत और उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसलिए परमाणु रहस्यों को सेना द्वारा ही संरक्षित किया जाना सबसे बड़ा डर है।
पाकिस्तान और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में भारत के साथ संबंधों पर चर्चा लाजिमी है। भारत द्वारा बालाकोट हमले के साथ शुरू हुए हालिया झड़पों ने अमेरिकियों को चिंतित कर दिया था, क्योंकि इससे दोनों परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ सकता था। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे के निपटारे के लिए व्यापक अमेरिकी भूमिका पर जोर देगा। चूंकि भारत अमेरिका को एक विशाल बाजार दे रहा है, इसलिए अमेरिका कम से कम कश्मीर के अंदरूनी हालात पर सार्वजनिक रूप से भारत को कुछ नहीं कहेगा।
एक महत्वपूर्ण मुद्दा, जिस पर पाकिस्तान ने अब तक सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की है, वह है अफगानिस्तान में पाकिस्तान तालिबान की मौजूदगी, जिसे नाटो का संरक्षण प्राप्त है। वे पाकिस्तान के भीतर हमला करने के लिए अफगानिस्तान के इलाके का उपयोग करते हैं। अब चूंकि अफगान तालिबान अच्छे तालिबान हैं और अमेरिकियों द्वारा उनका स्वागत किया जाता है, तो यही समय है कि पाकिस्तान तालिबान को खत्म किया जाए।
अभी तक प्रधानमंत्री इमरान खान की वाशिंगटन यात्रा से कोई बड़ी उम्मीद नहीं है। लेकिन अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सरकार के पूरी तरह विफल रहने के कारण जनता का प्रधानमंत्री पर अत्यधिक दबाव है। ऐसे में राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से किसी प्रकार के राजनीतिक उपहार का पाकिस्तान में स्वागत ही किया जाएगा।