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यदि स्टालिन के पास स्मार्टफोन होता

Tue, 12 Mar 2019 06:29 PM IST
Raman Singh डेविड ब्रूक्स
डेविड ब्रूक्स Published by: Raman Singh Updated Tue, 12 Mar 2019 06:29 PM IST
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If Stalin Had a Smartphone
जोसेफ स्टालिन

मुझे जोसेफ स्टालिन के बारे में सोचकर बहुत बुरा लग रहा है। उसने एक ऐसा अधिनायकवादी समाज बनाने का सपना देखा था, जहां हर व्यक्ति के व्यवहार का अनुमान लगाकर उसे नियंत्रित किया जा सके। लेकिन वह एक शताब्दी पहले जन्मे थे। वह प्रौद्योगिकी युग से पहले जन्मे थे, जिसने तानाशाह बनना कहीं आसान कर दिया है! सबसे पहले तो उसके पास एक बेहतर निगरानी उपकरण होना चाहिए। इन दिनों ज्यादातर संपर्क कंप्यूटर के माध्यम से होते हैं, इसलिए जो कुछ भी हो रहा है, उसका हमेशा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड होता है।


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इंटरनेट का जिस तरह से विकास और विस्तार हो रहा है, उसे 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' कहा जा रहा है और उसमें हमारे रेफ्रिजेरेटर, घड़ियां, चश्मे, फोन और सिक्योरिटी कैमरा शीघ्र ही हमारी हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग तक करने लगेंगे। वर्ष 2017 में लेवी स्ट्रॉस ने सेंसरयुक्त एक इंटरेक्टिव डेनिम जैकेट बनाई, जो इसे पहनने वाले के हावभाव का पता लगाने और संचारित करने में सक्षम है, यहां तक कि एक उंगली उठाने जैसी मामूली गतिविधि का भी। जल्दी ही अभियोजक हमारी चालक रहित कारों को वश में करने में सक्षम होंगे, और वे हर उस जगह का रिकॉर्ड पुनः प्राप्त करेंगे, जहां-जहां कार हमें ले जाएगी। और यह चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक भर नहीं है, जिसका उपयोग चीन नागरिकों पर नजर रखने के लिए कर रहा है। बीजिंग में अपार्टमेंट भवनों में चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक का उपयोग किया जाता है, ताकि किरायेदार अपार्टमेंट को किसी और को भाड़े पर न दे सके।

एक चीनी कंपनी ने कर्मचारियों की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक सिस्टम स्थापित किया है, ताकि पता चल सके कि कब उन्होंने ब्रेक लिया या रेस्ट रूम में गए। उनकी ये गतिविधियां मॉनिटर पर दर्ज हो जाती हैं। यह सिस्टम आज के आधुनिक तानाशाह के लिए बेहद उपयोगी होगा।

और दूसरी बात, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण अंकल जोय (जोसेफ स्टालिन) के पास अपने नागरिकों के व्यवहार का अनुमान लगाने के लिए बेहतर उपकरण होता। जैसा कि शोशना जुबॉफ ने अपनी पुस्तक द एज ऑफ सर्विलांस कैपिटलिज्म में लिखा है, जब आप गूगल का उपयोग करते हैं, तो आप गूगल के ग्राहक नहीं होते हैं। आप गूगल के लिए कच्चा माल होते हैं। आप जो कुछ भी करते हैं, गूगल उसे रिकॉर्ड करता है, फिर वह एक मॉडल विकसित करता है, जो आपके व्यवहार का अनुमान लगाता है और फिर उन मॉडलों को विज्ञापनों के लिए बेच देता है, जो उसके वास्तविक ग्राहक हैं। इस बिजनेस मॉडल के कारण दुनिया के कुछ सबसे अच्छे दिमाग दसियों अरब डॉलर उन उपकरणों को सुधारने पर खर्च करते हैं, जो निजी उपभोग का अनुमान लगाते हैं। यह तकनीक भी किसी आधुनिक स्टालिन के काम आ सकती है।

तीसरी बात, बड़े आंकड़ों के कारण आज का स्टालिन चीन जैसा विशाल सोशल क्रेडिट सिस्टम का निर्माण करने में सक्षम होगा, ताकि नागरिकों को इसके आधार पर अंक और रैंक दी जा सके। सरकारें, बैंक, और ऑनलाइन डेटिंग साइट्स हर किसी का डाटा अच्छी तरह से एकत्र करती हैं। क्या आप अपना कर्ज चुकाते हैं? कितने घंटे आप वीडियो गेम्स खेलने में बिताते हैं? क्या आप ट्रैफिक सिग्नल की परवाह किए बगैर सड़क पर चलते हैं? यदि आपका स्कोर बहुत कम है, तो आपको काली सूची में डाला जा सकता है। आप संग्रहालय नहीं जा सकते। आप विमान में यात्रा नहीं कर सकते, होटल में ठहर नहीं सकते, किसी मॉल नहीं जा सकते या हाई स्कूल में पढ़ाई नहीं कर सकते। आपकी बेटी को उसके पसंदीदा विश्वविद्यालय से बाहर निकाला जा सकता है।

स्टालिन के दिनों में सामाजिक अनुशासन इतना ही कठोर था। आपको मुकदमे का सामना करना पड़ता, अपने परिवार के किसी व्यक्ति को श्रम-कारावास भेजना पड़ता या समुदाय से निष्कासन झेलना पड़ता। अब आपका अत्याचारी शासन छोटा, सूक्ष्म और सर्वव्यापी हो सकता है। यह तानाशाही के ब्रोकन विंडो थियरी की तरह है। इसमें छोटी मछलियों को दंडित करके आप बड़ी मछलियों को अपराध करने से रोकते हैं। चौथा, आपको क्रांति करने की परेशानियों से नहीं गुजरना होगा। आप शैतानी सौदेबाजी के जरिये लोगों को लुभा सकते हैं। आप जानवरों के वीडियो और संबंधित मीम्स का प्रस्ताव देकर लोगों को आठ घंटे के लिए भटका सकते हैं और वे अपनी निजता आपको सौंप सकते हैं और आप उनके मस्तिष्क तक पहुंच सकते हैं।

जैसे-जैसे ऑनलाइन जीवन का विस्तार होता है, पड़ोस का जीवन और सामाजिक भरोसे में गिरावट आती है। सामाजिक ताना-बाना के खत्म होते ही सामाजिक अलगाव बढ़ता है और ऑनलाइन शातिरता और ठगी इकट्ठा होती है। आप लोगों को बताते हैं कि राज्य को विश्वास बहाल करने के लिए कदम उठाना होगा। छोटे-छोटे कदमों की शृंखला के जरिये आप उनके ऑनलाइन जीवन पर नियंत्रण करने के लिए अनुमति हासिल कर लेते हैं। यह भी अनिवार्य रूप से चीन में हो रहा है। जैसा कि जॉर्ज ऑरवेल और एल्डस हक्सले ने कहा था, यदि आप एक अच्छे अधिनायकवादी बनना चाहते हैं, तो व्यवहार को नियंत्रित करना ही पर्याप्त नहीं है। पूर्ण शक्ति पाने के लिए आपको लोगों के दिमाग को नियंत्रित करने में सक्षम होना चाहिए। आधुनिक सूचना तकनीक के जरिये राज्य हमारे अंतरंग सूचना घेरे को नियंत्रित कर सकता है। मैं यह दावा नहीं करता कि इक्सीसवीं सदी के स्टालिन के लिए सब कुछ आसान होगा। आधुनिक तकनीक लोगों को नियंत्रित करना आसान बनाती है, लेकिन यह ऐसी मानसिकता का भी निर्माण करती है, जिसमें लोग नियंत्रित किए जाने पर बहुत आक्रोशित होते हैं। जब लोगों के हाथों में स्मार्टफोन होता है, तो उन्हें लगता है कि उनके पास आवाज होनी चाहिए, जो प्रसारित हो, उनके पास एजेंसी और गरिमा होनी चाहिए। जब उन्हें पता चलता है कि वे एक सूचना संजाल में फंस गए हैं, जो सूक्ष्म रूप से उन पर हावी हो रहा है, तो वे प्रतिक्रिया करते हैं।

आक्रोशित आंदोलन और भीड़ स्वतःस्फूर्त खड़े होते हैं। मानव इतिहास सत्ता संघर्ष की शृंखला है। हम सोचते हैं कि नया उपकरण सत्ता का लोकतांत्रिकरण करेगा, पर वे उसे केंद्रीकृत करते हुए लगते हैं। यह तानाशाहों के लिए वसंत है।

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