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कोई शरीफ हो तो दिखाओ

Mon, 06 Jul 2015 08:28 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Mon, 06 Jul 2015 08:28 PM IST
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If any decent show then

साधो, राजनीति में योग और संयोग का बड़ा महत्व है। मैंने सामने वाले से कहा, मोदी ने गजब कर दिया। वह बोले, लगता है, आप ललित मोदी के प्रशंसक हैं। मैंने कहा, आप बेकार ही कन्फ्यूजन क्रिएट कर रहे हैं। मेरा मतलब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। सुशील मोदी या ललित (कलाओं वाले) मोदी से मेरा कोई वास्ता नहीं। मेरी बात सुन वह अचकचाए। मैंने स्पष्टीकरण देते हुए कहना शुरू किया, प्रधानमंत्री मोदी ने एक झटके में ही योग को हिंदू बना दिया। यह मोदी का ही करिश्मा था कि उन्होंने केजरीवाल से झाड़ू छीन ली और कांग्रेस से गांधी जी का चश्मा। कम्युनिस्टों के पास तो कुछ था ही नहीं, जिसे वे उनके हाथों से झटक पाते।

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तो क्या वामपंथी निठल्ले हैं, उन्होंने सवाल दाग दिया। मैंने कहा, कम्युनिस्टों के लिए करने को कुछ बचा ही नहीं। मार्क्स और लेनिन सारा काम कर गए, जिसकी कमाई वे अब तक खा रहे हैं। मैं हैरत में हूं कि इन दिनों राजनीति में तोमर के प्रशंसक बढ़ रहे हैं। तोमर ने जिंदगी में किसी से मार नहीं खाई। वह चोट खाए, तो एक नकली डिग्री से। एक अदद डिग्री पर हो-हल्ला मचाने वाले कूढ़मगज हैं। डिग्री में क्या धरा है! वह न होती, तो क्या तोमर तोमर नहीं होते?
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एक बंदा नकली डिग्री के बल पर शुचितावादियों की पार्टी में कहां-से-कहां पहुंच गया, यह क्या कम बड़ी बात है! उनकी इस योग्यता के लिए किसी विश्वविद्यालय को उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि देनी चाहिए। तुम्हीं बताओ, कबीर और तुलसीदास के पास कौन-सी डिग्रियां थीं? वे किस कॉलेज के पिछवाड़े पढ़े थे? तोमर की जांच के चलते मेरे मोहल्ले के कई डिग्रीधारी भूमिगत हो गए हैं। मैंने उन्हें सुझाव दिया कि तुम सब मिलकर फर्जी डिग्रीधारक संघ का निर्माण करो। संघे शक्ति कलियुगे। एक संघ ही था, जो धीरे-धीरे केंद्र की सत्ता में जा बैठा। भाजपाई व्यर्थ ही हर वक्त पाकिस्तान से खुन्नस खाए रहते हैं। दुनिया में वही मुल्क है, जहां दो-दो शरीफ हैं, एक राहील और दूसरे नवाज। तुम्हारी पार्टी में कोई एक भी शरीफ तो दिखाओ।
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