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बांध हटाए बिना गंगा कैसे हो अविरल

Tue, 18 Oct 2016 07:44 PM IST
सुरेश भाई
सुरेश भाई Updated Tue, 18 Oct 2016 07:44 PM IST
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How will Ganga flow without removing Dam
सुरेश भाई

नब्बे के दशक में जब नर्मदा बचाओ आंदोलन चरम पर था, उसी वक्त टिहरी बांध के विरोध में भी लोग खड़े थे। टिहरी बांध विरोधी आंदोलन में 'गंगा को अविरल बहने दो, गंगा को निर्मल रहने दो' नारा लगाया जा रहा था और उसे गांव-गांव तक ले जाया गया था। इस नारे से सर्वप्रथम विश्व हिंदू परिषद और भाजपा ने नजदीकी बढ़ाई थी। भाजपा के शीर्ष नेता मुरली मनोहर जोशी ने टिहरी बांध विरोध को समर्थन दिया था। उमा भारती भी केंद्रीय मंत्री बनने से पहले गंगा की अविरलता के लिए बड़े बांधों पर पाबंदी लगाने की बातें कह रही थीं। अब वह खुद जल संसाधन मंत्री हैं और केंद्र सरकार ने नमामि गंगे जैसी महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। पर उमा भारती अब बांधों के विरोध में नहीं हैं। क्या वह गंगा की अविरलता को सिर्फ गंगा सफाई तक सीमित रखना चाहती हैं?

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हरिद्वार से गंगासागर तक नमामि गंगे परियोजना की शुरुआत हुई। मोटे तौर पर जो जानकारी सामने आई, उससे पता चलता है कि गंगा ऐक्ट का निर्माण प्राथमिक रूप से किया जाना है, जिससे गंगा में गंदगी फैलाने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी। इसमें घाटों का सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, वृक्षारोपण, सीवरेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरे का निस्तारण आदि शामिल हैं। अब तक उत्तराखंड के केवल 143 गांवों को इसमें शामिल किया गया है। उत्तराखंड में 43 परियोजनाओं के लिए 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं, जिसके तहत उत्तरकाशी, गंगोत्री, यमनोत्री, श्रीनगर, देवप्रयाग, केदारनाथ, रूद्रप्रयाग और बद्रीनाथ में गंगा को स्वच्छ बनाया जाना है। इसमें कहीं भी गंगा की अविरलता को बाधित करने वाले बांधों और बैराजों को हटाने की बात नहीं है, जिसे उमा भारती ने हवा दी थी।
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आजकल गंगा की सफाई के साथ नदी जोड़, जलमार्ग और गंगा जल की बिक्री-ये तीन विषय हावी हो रहे हैं। दुनिया भर में पानी के व्यापारियों की कोई कमी नहीं है। उसमें हमारी व्यवस्था भी पीछे नहीं रहेगी। गंगा का पानी सरकार के लिए निश्चित ही एक आर्थिक एजेंडा के रूप में सामने आ सकता है। भविष्य में सरकार के लिए गंगा का पानी बहुत बड़ा आर्थिक स्रोत बन सकता है। सवाल खड़ा होता है कि क्या गंगा के उद्गम से गंगा सागर के बीच की 40 प्रतिशत आबादी को निशुल्क स्वच्छ पानी मिलेगा? गंगा की सफाई में खर्च हो रहे बजट से स्थानीय युवकों रोजगार मिलेगा या गंगा ऐक्ट बनाने के बाद लोग गंदगी फैलाना बंद कर देंगे और कॉरपोरेट के बल पर गंगा स्वच्छ हो जाएगी? इनके उत्तर वर्ष 2018 तक ही मिल पाएंगे। अभी सरकार ने केवल गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की योजना बनाई है। चार हजार करोड़ रुपये खर्च भी हो गए, लेकिन देश में कहीं भी ऐसी जगह का प्रचार नहीं है, जहां गंगा स्वच्छ और निर्मल हो गई हो। यदि किसी स्थान पर हो गई, तो उसे प्रचार में आना जरूरी है।
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दूसरा सवाल जिस पर केंद्र एवं राज्यों की सरकारों के सामने विकल्प सुझाने के बावजूद निर्णय नहीं लिए जाते। उत्तराखंड सरकार ने छोटी पनबिजली बनाने के अधिकार दिए हैं। मगर इसका हाल भी 2006 में यूपीए शासन के समय दिए गए वनाधिकार जैसा हो गया है। केंद्र सरकार गंगा की अविरलता का अर्थ केवल गंगा स्वच्छता तक सीमित रख रही है। यदि गंगा पर बैराजों और बांधों के ठेके रोक दिए जाएं, तो बड़े निवेशकों का क्या होगा? यदि गंगा की अविरलता की चिंता होती, तो पंचेश्वर बांध की पैरवी नहीं की जाती। उत्तराखंड में 2013 की आपदा के लिए जिम्मेदार 24 जलविद्युत परियोजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर गौर किया जाता।

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