{"_id":"07165a393888d3d7025e1effeb1e54b8","slug":"how-will-change-the-infrastructure-of-railway","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेलवे का ढांचा आखिर कैसे बदलेगा ","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
रेलवे का ढांचा आखिर कैसे बदलेगा
विवेक सहाय
Updated Wed, 09 Jul 2014 12:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोदी सरकार के पहले रेल बजट में सकारात्मक बातों के साथ ही दुविधाएं भी कुछ कम नहीं हैं। रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने उम्मीद के मुताबिक यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने पर खासी तवज्जो दी है। उन्होंने नौ रूटों पर तीव्र गति वाली ट्रेनों की घोषणा की है, साथ ही बुलेट ट्रेन योजना के लिए भी धन आवंटित किया गया है, मगर इसके लिए फंडिंग देश से होगी, या विदेश से, इस पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
विज्ञापन
रेलवे की कैटरिंग व्यवस्था में थर्ड पार्टी मूल्यांकन की बात की गई है, मगर बजट में इसकी किसी साफ योजना का कोई उल्लेख नहीं दिखता। सरकार रेल किराए में पहले ही बढ़ोतरी कर चुकी है। भारतीय रेल में ढांचागत सुधारों का दावा भी बजट में किया जरूर गया है, लेकिन वह किस तरह किया जाएगा, वह सवालों के घेरे में है।
विज्ञापन
दरअसल भारतीय रेल के साथ्ा सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इसमें योजनाएं तो तमाम बनती हैं, मगर वे जमीनी स्तर पर नहीं उतर पातीं। दिक्कत यह है कि रेलवे बोर्ड के पास नीति के निर्माण की और उसे लागू करने की दोहरी जिम्मेदारी होती है। फिर विभाग के अंदरूनी झगड़े रेलवे की हालत को और ज्यादा विकट बना देते हैं। इसी वजह से भारतीय रेल की पुनर्संरचना आज सबसे पहली जरूरत बन गई है।
विज्ञापन
जहां तक बात रेलवे में प्रत्यक्ष्ा विदेशी निवेश (एफडीआई) की है, तो समझने वाली बात है कि एफडीआई तभी आएगा जब लोगों को भरोसा होगा कि उनका पैसा सही ढंग से खर्च किया जा रहा है। यह पारदर्शिता की मांग करता है। इसके लिए अकाउंटिंग (लेखा) सुधार की जरूरत होगी। दरअसल अकाउंटिंग में सुधार ऐसा मुद्दा है, जिस पर पिछले पंद्रह वर्षों से बात हो रही है।
दिक्कत यह है कि भारतीय रेलवे में अकाउंटिंग के जो नियम हैं, वे उन कायदों पर आधारित हैं, जो 1921 में एक्वर्थ समिति ने निर्धारित किए थे। अब समय बदल चुका है। ऐसे में अकाउंटिंग के प्राचीन नियमों पर निर्भर रहना मुनासिब नहीं है। रेलमंत्री ने अपने बजट भाषण में अकाउंटिंग में सुधार की बात की है, मगर इसकी कोई निश्चित समय-सीमा बजट में नहीं दिखती।
यात्री सुविधा के मद्देनजर कई अहम घोषणाएं बजट में की गई हैं। स्टेशन पर पीने के साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए निजी कंपनियों और कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) का सहयोग लेने की भी बात की गई है। अगर यह योजना कामयाब रहती है, तो यात्रियों को सस्ता और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने में बेहद आसानी हो जाएगी। मगर देखना होगा कि कौन से एनजीओ इस योजना को अंजाम देने सामने आते हैं।
भारतीय रेलवे के लिए अफसोस की बात यह है कि ट्रेनों के रुकने की जगहों पर भी राजनीति होने लगती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में आज भी 3000 से ज्यादा ऐसे स्टॉपेज हैं, जो राजनीतिक वजहों से मुकर्रर किए गए हैं। इस व्यवस्था में बदलाव की बात रेल मंत्री ने की है, जो कि एक अच्छा कदम है। इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेनों में ऑटोमेटिक दरवाजों की व्यवस्था की घोषणा भी काफी महत्वपूर्ण है।
दरअसल भाजपा के घोषणापत्र को जारी किए जाने के वक्त से ही नरेंद्र मोदी रेल सुधार को अपनी प्राथमिकता में बताते आए हैं। फिर राकेश मोहन समिति भी कह चुकी है कि अगर रेलवे पर पैसा लगाया गया, तो इसका फायदा पूरे देश को मिलेगा। ऐसे में कहा जा सकता है कि रेल बजट में जो घोषणाएं की गई हैं, उनके दीर्घकालीन फायदे जरूर होंगे, मगर सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर कैसे उतारा जाता है।