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प्रौद्योगिकी : कैसे बने निर्यात आधारित व्यवस्था, नवाचार के साथ डिजिटल कौशल की दरकार
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विस्तार
हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ‘रायसीना डायलॉग 2023’ सम्मेलन में कहा कि भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 में वस्तु एवं सेवा निर्यात क्षेत्र में 676 अरब डॉलर मूल्य का रिकॉर्ड निर्यात किया है। वित्त वर्ष 2022-23 में भारत से निर्यात 750 अरब डॉलर मूल्य की ऊंचाई पर पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2030 तक भारत का निर्यात 2,000 अरब डॉलर यानी दो लाख करोड़ डॉलर के पार तक पहुंच सकता है।
यह कोई छोटी बात नहीं है कि वैश्विक आर्थिक संकट और वैश्विक निर्यात चुनौतियों के बीच भी भारत से निर्यात बढ़ रहे हैं। यदि हम उत्पाद निर्यात के नए आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो पाते हैं कि प्रमुख रूप से अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, बांग्लादेश व नीदरलैंड को बड़े पैमाने पर निर्यात किए गए हैं। निर्यात उत्पादों के मद्देनजर पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, चमड़ा, कॉफी, प्लास्टिक, रेडीमेड परिधान, मांस एवं दुग्ध उत्पाद, समुद्री उत्पाद और तंबाकू की निर्यात वृद्धि में अहम भूमिका रही है। साथ ही उच्च इंजीनियरिंग निर्यातों, परिधान और वस्त्र निर्यात आदि से संकेत मिलते हैं कि यह धारणा धीरे-धीरे बदल रही है कि भारत प्राथमिक जिंसों का ही बड़ा निर्यातक है। अब भारत द्वारा अधिक से अधिक मूल्यवर्धित और उच्च गुणवत्ता वाले सामान का भी निर्यात किया जा रहा है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत विश्व पटल पर कृषि निर्यात के नए उभरते हुए देश के रूप में उपस्थिति दर्ज करते हुए मानवता के आधार पर दुनिया के जरूरतमंद देशों के लिए खाद्यान्न की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर रहा है। भारत से खाद्य पदार्थों-अनाज, गैर-बासमती चावल, गेहूं, बाजरा, मक्का और अन्य मोटे अनाज के अलावा फलों एवं सब्जियों के निर्यात में भारी वृद्धि देखी गई है। खास बात यह है कि कोविड-19 के कारण भारत के सेवा निर्यात में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि पिछले वर्ष 2022 में देश से निर्यात बढ़ाने में भारत द्वारा संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की भी प्रभावी भूमिका रही है।
यह भी भारत की बढ़ती हुई वैश्विक निर्यात साख की सफलता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जुलाई, 2022 में डॉलर पर निर्भरता कम करने और निर्यात बढ़ाने के लिए विदेशी व्यापार का लेन-देन रुपये में करने का प्रस्ताव किया था। 15 मार्च तक रूस, मॉरिशस व श्रीलंका के द्वारा भारतीय रुपये में विदेशी व्यापार शुरू करने के बाद अब तक 18 देशों के बैंकों ने रुपये में व्यापार करने के लिए विशेष वोस्ट्रो खाते खोले हैं। दुनिया के 35 से अधिक देशों ने रुपये में व्यापार करने में रुचि दिखाई है। इससे भारत को निर्यात के मोर्चे पर बड़ा लाभ मिलेगा।
अब देश को निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हमें कई बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। इनमें यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के छह देशों, दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और इस्राइल के साथ एफटीए के लिए वार्ताएं शामिल हैं। रिजर्व बैंक ने डिजिटल रुपये की जो प्रायोगिक शुरुआत की है, उसे विस्तार देने की जरूरत है। निर्यात बढ़ाने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में मैन्यूफैक्चरिंग के तहत चिन्हित 24 सेक्टर को प्राथमिकता के साथ तेजी से आगे बढ़ाए जाने की जरूरत है।
देश से निर्यात बढ़ाने के लिए अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण की रफ्तार तेज करने, शोध व नवाचार तथा श्रमशक्ति को नई डिजिटल कौशल से सुसज्जित करने की राह पर तेजी से आगे बढ़ना होगा। ऐसे विभिन्न रणनीतिक प्रयासों से ही भारत निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था बन सकता है और 2030 तक वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात के लिए निर्धारित किए गए 2,000 अरब डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।