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आप कितने स्मार्ट हैं
श्याम सिंह चंदेल
Updated Mon, 13 Jul 2015 08:39 PM IST
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फेसबुक और ट्विटर के जमाने में मन की बात अब मन में नहीं रह पाती। आज एक पल में आदमी जान जाता है कि सामने वाले के मन में क्या चल रहा है। फेसबुक बता देता है कि आपका साथी खुश है या पीड़ित, आपके पड़ोसी को क्या समस्या है, और सामने वाले का किससे झगड़ा चल रहा है। आखिर सारी भड़ास सोशल मीडिया पर जो दिख जाती है।
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फेसबुक यह भी बता देता है कि सत्ता बदलने के बाद किन बौद्धिकों ने पाला बदल लिया है और आपको प्रभावित करने के लिए आपका लंगोटिया यार रोज जो नए-नए चुटकुले सुनाता है, वह कहां से आता है। लंदन में बैठकर ललित मोदी नाम के एक शख्स ने ट्विटर के जरिये पिछले दिनों जितना हड़कंप मचाया, उतना विपक्ष पूरे सत्र के दौरान नहीं मचा सकता।
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कभी रहीम ने कहा था, रहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखो गोय। लेकिन आज कोई आदमी मन में कुछ भी रखने के लिए तैयार नहीं है। सब कुछ बाहर उड़ेलने के लिए बेकरार है। बस उसे एक मौका चाहिए। अगर गुस्सा आया, तो वह गालियों की बौछार कर सकता है। कोई मन के राज खोलकर दूसरों की नींद उड़ा रहा है, तो कोई मन की कहकर अपना दिल बहला रहा है। आम आदमी की तो बात छोड़िए, खुद प्रधानमंत्री 'मन की बात' रेडियो पर जोर-शोर से कह डालते हैं। यह हालांकि उनके अपने ही मन की बात होती है, उनके मन की बात नहीं, जिनके लिए रेडियो पर तामझाम होता है।
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कभी अपने बारे में बात करना घमंड समझा जाता था। पर स्मार्टफोन ने खुद की तस्वीर खींचने की कला क्या सीखा दी, हर आदमी सेल्फी ले रहा है, सेलफिश तो वह पहले से था ही। पहले लोग मौत की खबर सुनकर अनजाने लोगों के दरवाजे पर भी मानवीयता के नाते मातम मनाने पहुंच जाते थे। आज फेसबुक पर अपने परिचितों की मौत की खबर बैठे-बैठे लाइक कर दी जाती है। स्मार्टफोन होना आज स्मार्ट होने की गारंटी है। पर यह स्मार्टफोन हमें सिखा क्या रहा है? अगर स्मार्ट सिटीज भी इसी तरह बनेंगी, तब तो फिर भगवान ही मालिक है।