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आतंक से लड़ने की कितनी तैयारी

Sun, 02 Aug 2015 07:40 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 02 Aug 2015 07:40 PM IST
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How much prepared for fight against terrorism

काश कि हम पत्रकारों ने गुरदासपुर में हुए आतंकवादी हमले पर उतना ध्यान दिया होता, जितना कि हमने याकूब मेमन की फांसी पर दिया। गुरदासपुर के हमले में मरने वालों में कुछ वे लोग थे, जिन्होंने इस देश की सुरक्षा के लिए अपनी जानें गंवा दीं, जबकि कुछ बेगुनाहों का कुसूर इतना था कि वे सुबह घर से गलत समय पर निकले। इसके बारे में कितनी चर्चाएं सुनीं आपने पिछले सप्ताह? एक ही व्यक्ति था, जिसने ध्यान दिलाने की कोशिश की कि दीनानगर की वारदात एक नए किस्म के युद्ध की शुरुआत है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को तबाह करने के लिए आरंभ हुआ है। इस व्यक्ति का नाम है केपीएस गिल, जिनके नेतृत्व में पंजाब से खालिस्तानी आंदोलन को समाप्त करने का काम हुआ था।

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उस जमाने में मैं कई बार पंजाब जाया करती थी किसी न किसी आतंकी घटना को कवर करने, सो यकीन के साथ कह सकती हूं कि गिल का नेतृत्व न होता, तो शायद आज भी पंजाब खालिस्तानी आतंकवाद के साये में होता। पुलिस से रिटायर होने के बाद गिल साहिब ने इंटरनेट पर एक साप्ताहिक पत्रिका शुरू की है, जिसका नाम है साउथ एशिया इंटेलीजेंस रिव्यू। इस पत्रिका का एक ही मकसद है-दक्षिण एशिया में हर आतंकवादी हमले का विश्लेषण करना। गुरदासपुर हमले के बारे में गिल साहिब ने अपने लेख में सावधान करने की कोशिश की है कि जिस जेहाद का भारत को भविष्य में सामना करना होगा, उसका दायरा पाकिस्तान से कहीं आगे फैला हुआ है।
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उनका मानना है कि आईएसआई से आगे निकलकर अब हमे आईएस (इस्लामिक स्टेट) के बारे में सोचना होगा। गिल साहिब अकेले नहीं, जो ऐसी सोच रखते हैं। उनके लेख के अगले दिन अमेरिका के यूएसए टुडे अखबार में एक लेख छपा, जिसमें एक ऐसे दस्तावेज के बारे में लिखा गया था, जो अमेरिकी गुप्त संस्थानों के हवाले से अखबार को मिला था। उस दस्तावेज में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय जेहाद का आम लक्ष्य है भारत में इतने बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमला करना कि अमेरिका को इस जेहाद में पूरी तरह शामिल होना पड़ेगा। इस दस्तावेज के मुताबिक, इस बड़े आतंकवादी हमले की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
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क्या भारत तैयार है इस जेहाद का मुकाबला करने के लिए? सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की कोई तैयारी नहीं है। केपीएस गिल ने पिछले सप्ताह इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख में इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की कि दीनानगर में जो स्वाट के सुरक्षाकर्मी थे, उनके पास न आधुनिक हथियार थे और न ही बुलेटप्रूफ लिबास। उन्होंने याद दिलाया कि खालिस्तान आंदोलन के समय उन्होंने मांग की थी बुलेटप्रूफ वाहनों की, जो उन्हें नहीं मिले थे। सो, पंजाब पुलिस ने अपने तौर पर कुछ पुरानी अंबेसडर कारों को बुलेटप्रूफ करने का काम किया था। यह भी लिखते हैं गिल साहिब कि राजनेताओं और आला अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही पंजाब जैसे सीमांत राज्य में ऐसा हाल है।


अंतरराष्ट्रीय जेहाद के खिलाफ हमें अभी से तैयारी करनी चाहिए। मगर क्या कोई सुनने वाला भी है दिल्ली में? गुरदासपुर में जिस दिन हमला हुआ, उस दिन गृह मंत्री ने आक्रामक अंदाज में वही कहा, जो हम वर्षों से सुनते आए हैं-पाकिस्तान का हाथ है, मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह समझने की जरूरत है कि अब इस लड़ाई का दायरा पाकिस्तान की सीमाओं से कहीं आगे फैल चुका है।

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