आखिर दुनिया चलती कैसे है: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मुनाफे की चाह, निवेशक महाभारत के यक्ष प्रश्न में उलझे
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विस्तार
महान निवेशक और वॉरेन बफेट के सहयोगी चार्ली मुंगर ने कहा था कि दुनिया लालच से नहीं, ईर्ष्या से चलती है। हालांकि, दुख के कारणों को बताते हुए इस कथन में लालच और ईर्ष्या शब्दों के क्रम को लेकर बहस हो सकती है, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि एक शब्द दूसरे की ओर ले जाता है। यह कथन समृद्धों और अभावग्रस्तों के बीच बढ़ती खाई के दुष्प्रभावों की ओर भी इशारा करता है। आज यही के (K) आकार की अर्थव्यवस्था, जिसमें ऊपरी भुजा समृद्ध लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और निचली भुजा उन लोगों का, जो विकास की दौड़ में पिछड़ते जा रहे हैं, बाजारों व राजनीति को रोशन कर रही है। पैसा किस तरह से काम करता है, वह पिछले कुछ हफ्तों में बाजारों में कीमतों में उतार-चढ़ाव में सबसे अधिक दिखाई देता है। सोने की कीमत जो वर्ष की शुरुआत में 2,623 डॉलर प्रति औंस थी, वह 4,300 डॉलर को पार कर अब 4,000 डॉलर के पास मंडरा रही है, जो 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। चांदी की कीमत, जो जनवरी में 28 डॉलर पर थी, अब 48 पर पहुंच चुकी है।
हम सभी ने चैटजीपीटी के बाद से एनवीडिया के बारे में सुना है। 2017 में इसकी कीमत 100 अरब डॉलर के आंकड़े को छू गई थी। यह दस खरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण को छूने वाली सातवीं अमेरिकी कंपनी थी। अगर यह एक राष्ट्र होता, तो एनवीडिया जर्मनी के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर होता। इसका मूल्य फ्रांसीसी शेयर बाजार के बाजार पूंजीकरण से भी ज्यादा है, जो भारत की 500 सबसे बड़ी कंपनियों से भी अधिक है।
इस गुरुवार को इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला का बोर्ड यह तय करेगा कि क्या एलन मस्क 10 साल में शेयरों के विकल्प सहित दस खरब डॉलर के वेतन पैकेज के हकदार हैं। बेशक, यह मस्क के लक्ष्य हासिल करने पर निर्भर है। मस्क जो राशि चाहते हैं, वह अमेरिका की प्रति व्यक्ति आय 86,800 डॉलर से लगभग 11,000 गुना अधिक है। पिछले हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व, जो वैश्विक मुद्रा प्रवाह को प्रभावित करता है, ने ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की। आमतौर पर ब्याज दरों में कटौती तब की जाती है, जब मुद्रास्फीति कम होती है या बेरोजगारी बढ़ती है। अमेरिका में मुद्रास्फीति अभी भी बढ़ रही है और बेरोजगारी कम हो रही है। फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल इस कटौती को सही ठहराने में काफी मशक्कत कर रहे थे। पॉवेल इस सवाल से भी बचते रहे कि कटौती से किसे फायदा होगा। उम्मीद के मुताबिक शेयर बाजार ऊपर गए।
फायदा किसे होगा, यह कोई रहस्य नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका की शीर्ष 0.1 फीसदी आबादी के पास 122 खरब डॉलर मूल्य की इक्विटी और फंड हैं। निचले 50 फीसदी के पास सिर्फ 5.4 खरब डॉलर मूल्य के शेयर और फंड हैं। के-आकार के रुझान में, विलासिता का सामान बनाने वाली कंपनियां और बैंक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि खुदरा विक्रेता कर्मचारियों की संख्या कम कर रहे हैं। वैश्विक बाजार में यह उन्माद, धनी और गरीबों के बीच बढ़ती तरलता और मुनाफे की तलाश में होने से प्रेरित है। हालांकि, रुझान के अनुसार, केवल नकदी संपन्न कंपनियों के शेयरों में ही वृद्धि हो रही है। अमेरिकी सूचकांक एसएंडपी 500 पिछले छह महीनों से हर महीने उच्च स्तर पर पहुंच रहा है, लेकिन 500 कंपनियों के सूचकांक में 220 से अधिक कंपनियों के शेयर जनवरी की तुलना में नकारात्मक रिटर्न/कम रिटर्न दिखा रहे हैं।
निवेशक कबीर के सीमाओं में रहने के पाठ और बेहद आकर्षक ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ के सूत्र बीच रस्साकशी में फंसे हैं। एसएंडपी 500 का मूल्य-आय अनुपात 28.47 है और बाजार मैग7 के शेयरों पर 40 गुना ज्यादा कमाई का भुगतान कर रहा है, जिससे धन की उम्मीद है। यह सब तब है जब एआई शेयरों में बुलबुले के बारे में चर्चा का बादल बढ़ रहा है, जिसमें बैंक ऑफ इंग्लैंड की चेतावनी भी शामिल है, बल्कि और भी गहरा हो रहा है। फिर भी, जैसा कि महाभारत के यक्ष प्रश्न में युधिष्ठिर कहते हैं, मृत्यु का सत्य रोजाना दिखाई देता है, और फिर भी लोग अमरता की आशा और तलाश करते हैं। तर्क हमेशा यही होता है कि ‘इस बार बात अलग है।’ एआई शेयरों की तुलना 1999 के डॉटकॉम बुलबुले से की जा रही है। तेजी के प्रति उत्साहित निवेशकों का तर्क है कि उस दौर के विपरीत, ये कंपनियां नकदी से भरपूर और परिसंपत्ति-रहित हैं। हालांकि, चिप निर्माताओं और उपयोगकर्ताओं के बीच दस खरब डॉलर के सर्कुलर सौदे, मेटा का 30 अरब डॉलर का ऋण जारी करना, और एआई बॉन्ड की 200 अरब डॉलर की बाढ़ की आशंकाओं ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। एआई से जुड़े 12 खरब डॉलर से ज्यादा के ऋण के साथ, वॉल स्ट्रीट इस बात पर विचार कर रहा है कि इसका असर ऋण बाजार में दिखेगा या इक्विटी में।
धीमी गति से बढ़ रही समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं के सूचकांक बेहतर रिटर्न दे रहे हैं। अमेरिका में 2025 में जीडीपी वृद्धि 1.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, और एसएंडपी 500 इस वर्ष अब तक 16.3 फीसदी बढ़ा है। जापान के केंद्रीय बैंक के अनुसार, 0.7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, और निक्केई 225, 31.3 प्रतिशत बढ़ा है। ईसीबी ने यूरोजोन में जीडीपी वृद्धि 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि जर्मन डीएएक्स 20 प्रतिशत बढ़ा है। यूके में 1.3 प्रतिशत की वृद्धि और एफटीएसई 17 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसके 6.6 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है, और निफ्टी 50 केवल 8.8 प्रतिशत बढ़ा है।
इसमें कोई शक नहीं कि जैसे-जैसे अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है, आम जनता खुद को उपेक्षित महसूस कर रही है। और इसका राजनीतिक असर न्यूयॉर्क के मेयर चुनाव में, ब्रिटेन में, जहां सरकार अति-धनवानों पर कर लगाने की योजना बना रही है, और पूरे यूरोप में, जहां आव्रजन-विरोधी आंदोलन वामपंथियों और दक्षिणपंथियों को एकजुट कर रहे हैं, दिखाई दे रहा है। लोकलुभावन राजनीति नाराज लोगों को वादों से रिझा रही है और रिझाती रहेगी। के-आकार की अर्थव्यवस्थाएं के-आकार की राजनीति को उत्प्रेरित करती हैं।